‘जज साहब ने युवाओं को कहा “कॉकरोच” तो लड़कों ने खड़ी कर दी असली “कॉकरोच जनता पार्टी”! संस्थापक अभिजीत दीपके कौन है?; जानिए क्या है CJP का पूरा सच!’
नई दिल्ली: जस्टिस सूर्यकांत के 'कॉकरोच और युवा' वाले बयान के बाद इंटरनेट पर छिड़ा अनोखा व्यंग्यात्मक युद्ध। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम से बनी वेबसाइट, इंस्टाग्राम पर 40 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया पर गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए सफाई दी है। PNN24 की विशेष डिजिटल रिपोर्ट।

निलोफर बानो
PNN24 News: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत के युवाओं और कॉकरोच को लेकर दिए गए एक कथित बयान के बाद इंटरनेट पर शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) कैंपेन देश में एक अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन का रूप ले चुका है. इंस्टाग्राम पर 40 लाख से अधिक फॉलोअर्स और महज चार दिनों के भीतर वेबसाइट पर 2 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड सदस्यों के साथ यह अभियान इस समय देश भर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय है.

1. अपमान से उपजा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आइडिया
इस कैंपेन की शुरुआत कैसे हुई, इस सवाल पर अभिजीत दीपके बताते हैं कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर सीजेआई (CJI) का एक बयान देख रहे थे, जिसमें सिस्टम की आलोचना करने पर देश के युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच और परजीवियों से की जा रही थी.
अभिजीत कहते हैं:
“मैंने इसे बेहद हास्यास्पद और निराशाजनक समझा। जो न्यायपालिका और सीजेआई देश के संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षक हैं, वो युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? मैंने ट्विटर पर राय लिखी कि ‘अगर सब कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?’ इसके बाद 25 साल तक के युवाओं (Gen Z) के कमाल के जवाब आए कि हमें एक प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए। बस यहीं से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाने का आइडिया आया।”
2. सदस्य बनने के लिए रखी गई अनोखी ‘पात्रता’
अभिजीत के मुताबिक, उन्होंने पार्टी की सदस्यता के लिए उन्हीं मापदंडों को ‘पात्रता’ (Eligibility) बना दिया, जिनके जरिए युवाओं को बेइज्जत करने की कोशिश की गई थी:
- आलसी होना: जैसा कि युवाओं के लिए कथित तौर पर कहा गया था।
- बेरोज़गार होना: जो वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी हकीकत है।
- लगातार ऑनलाइन रहना: डिजिटल दौर के युवाओं की सक्रियता को दर्शाने के लिए।
इन पात्रता शर्तों के सोशल मीडिया पर आते ही चमत्कार हो गया और लोगों ने खुद को धड़ाधड़ रजिस्टर करना शुरू कर दिया, जिसके बाद CJP की आधिकारिक वेबसाइट और घोषणापत्र तैयार किया गया।
3. कीर्ति आज़ाद और महुआ मोइत्रा का मिला समर्थन
इस अनूठे डिजिटल विरोध को देश के कई बड़े और चर्चित चेहरों का भी साथ मिल रहा है। अभिजीत दीपके के अनुसार:
- पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आज़ाद ने इस पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई है।
- टीएमसी (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस डिजिटल मुहिम का खुलकर समर्थन किया है।
डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय राजनीति और डिजिटल मीडिया के इतिहास में एक बड़ा ‘खलल’ (Disruption) है, जिसे करोड़ों रुपये खर्च करके भी हासिल नहीं किया जा सकता था। यह सफलता युवाओं के भीतर सालों से पल रहे गुस्से और बेरोज़गारी की निराशा का परिणाम है।
4. कौन हैं CJP के नेता अभिजीत दीपके?
- मूल निवासी: अभिजीत महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से ताल्लुक रखते हैं।
- शिक्षा: ग्रेजुएशन के लिए पुणे गए और हाल ही में पिछले सप्ताह उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की है।
- राजनीतिक अनुभव: वे कुछ समय के लिए ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की कम्युनिकेशन टीम में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर काम कर चुके हैं।
5. न्यायपालिका और आरक्षण पर CJP का तीखा घोषणापत्र
पार्टी के घोषणापत्र के बारे में बात करते हुए अभिजीत कहते हैं कि यह भारत के वर्तमान लोकतंत्र की स्थिति को दर्शाता है। घोषणापत्र के दो मुख्य बिंदु बेहद गंभीर हैं:
- स्वतंत्र न्यायपालिका: जो जज निष्पक्ष होने चाहिए, वे रिटायरमेंट के बाद सरकार से लाभ ले रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
- महिला प्रतिनिधित्व: महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी नहीं, बल्कि सीधे 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।
6. नेपाल-श्रीलंका के जेन ज़ी से तुलना पर क्या बोले अभिजीत?
बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका में हुए हिंसक जेन ज़ी (Gen Z) आंदोलनों से तुलना करने पर अभिजीत इसे भारतीय युवाओं का ‘अपमान’ मानते हैं। वे कहते हैं कि भारतीय युवा हिंसा नहीं भड़का रहे हैं, बल्कि वे ‘व्यंग्य’ (Satire) के जरिए अपनी नाखुशी जाहिर कर रहे हैं। आज के युवा कॉकरोच का कॉस्ट्यूम पहनकर यमुना साफ कर रहे हैं, कचरा हटा रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से सिस्टम की खिल्ली उड़ा रहे हैं।
अभिजीत ने साफ किया कि वे पिछले सप्ताह ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अब वापस भारत लौट रहे हैं और इस पॉलिटिकल फ्रंट को आगे बढ़ाएंगे, क्योंकि भारतीय युवा अब धर्म और ‘हिंदू-मुस्लिम’ के उपदेशों से तंग आ चुका है और वह रोजगार व तकनीकी रूप से उन्नत भारत चाहता है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, बड़े पदों पर बैठकर जनता को ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझने की भूल करने वाले हुक्मरान भूल जाते हैं कि जब ये ‘कॉकरोच’ एक साथ मिलकर पर कतरने पर आते हैं, तो बड़े-बड़े सियासी सिंघासन हिल जाते हैं!”

बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे महाराष्ट्र के लड़के अभिजीत दीपके और उनकी ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ के घोषणापत्र पर जोरदार बहस छिड़ गई।
काका बोले: “बबुआ, हमें इस लड़के अभिजीत की बात में दम दिखता है। जब न्याय के मंदिर में बैठे लोग युवाओं के गुस्से को समझने के बजाय उनकी तुलना परजीवियों से करने लगें, तो समझ लो कि सिस्टम में खराबी आ चुकी है। लेकिन हमारे देश के इन डिजिटल लड़कों ने लाठी उठाने के बजाय जो ‘व्यंग्य का हंटर’ चलाया है, उसने दिल्ली तक हलचल मचा दी है। महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे नेता अगर इस पैरोडी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं, तो इसका मतलब साफ है कि युवाओं की ये आवाज सीधे निशाने पर लगी है।”
मैंने पूछा— “काका, अभिजीत दीपके का कहना है कि भारतीय जेन ज़ी हिंसा नहीं कर रहा, बल्कि कॉकरोच का कॉस्ट्यूम पहनकर यमुना साफ कर रहा है और सिस्टम की खिल्ली उड़ा रहा है, इसे आप कैसे देखते हैं?”
काका का जवाब: “ई तो सबसे खूबसूरत बात है बबुआ! श्रीलंका और बांग्लादेश की तरह सड़कों पर आग लगाने के बजाय बनारस और देश का युवा गांधीवादी तरीके से, लेकिन नए जमाने के मीम्स और पैरोडी के जरिए सरकार को आईना दिखा रहा है। जब देश का नौजवान पिछले 12 सालों से सिर्फ हिंदू-मुस्लिम का उपदेश सुनकर थक चुका हो और उसे नौकरी न मिले, तो वो अपना रास्ता खुद तलाशेगा। ये जो 40 लाख फॉलोअर्स हैं न, ये किसी आईटी सेल के खरीदे हुए रोबोट नहीं हैं, ये देश के वो बेरोजगार डिग्रीधारी युवा हैं जो सम्मान मांग रहे हैं। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, युवाओं को रेंगने वाला कॉकरोच मत समझिए, ये वो आबादी है जो देश की तकदीर बदल सकती है; अच्छा हुआ कि इस डिजिटल थप्पड़ ने हुक्मरानों को ये समझा दिया कि जनता से बड़ा कोई नहीं होता’।”











