‘कानपुर कमिश्नरेट में “हथियारबंद” आईटीबीपी जवानों के पहुंचने से मचा हड़कंप; मां का हाथ काटे जाने से नाराज साथी के समर्थन में उतरे जवान; जानिए क्या है इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का पूरा सच!’
कानपुर: मां के इलाज में लापरवाही और हाथ काटे जाने से नाराज आईटीबीपी (ITBP) के 50 जवान हथियारों के साथ पहुंचे पुलिस कमिश्नरेट। एडिशनल सीपी विपिन ताडा और कमांडेंट गौरव प्रसाद ने 'कमिश्नरेट घेरने' की खबरों का किया खंडन, सीएमओ से मांगी दोबारा जांच रिपोर्ट। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आदिल अहमद
कानपुर (PNN24 News): कानपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में शनिवार को उस समय एक बेहद असामान्य और तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली, जब देश के प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के लगभग पचास जवान अत्याधुनिक हथियारों के साथ वहां पहुंच गए। दरअसल, ये सभी जवान अपने साथी विकास सिंह की मां के इलाज में हुई कथित घोर लापरवाही और दोषी अस्पताल पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने से बेहद आक्रोशित थे।

🏥 क्या है पूरा मामला? संक्रमण के कारण काटना पड़ा हाथ!
पीड़ित आईटीबीपी जवान विकास सिंह का आरोप है कि उनकी मां को अचानक सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने के बाद उन्होंने कानपुर शहर के एक नामी निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों के अनुसार, अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही के कारण महिला के शरीर में संक्रमण (Infection) इस कदर फैल गया कि उनकी हालत बदतर हो गई।
मजबूरन परिजनों को महिला को वहां से निकालकर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने महिला की जान बचाने के लिए उनका एक हाथ काट देने (Amputation) का फैसला किया। इस अमानवीय लापरवाही के बाद पीड़ित जवान लगातार पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहा था, लेकिन कार्रवाई में हो रही लगातार देरी से जवानों में असंतोष पनप रहा था।
🗣️ “कमिश्नरेट घेरने” की बात से पुलिस का साफ इनकार: एडिशनल सीपी विपिन ताडा
परिसर को कब्जे में लेने या घेरने की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कानपुर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) विपिन ताडा ने मीडिया के सामने आकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की।
विपिन ताडा ने बताया:
“आईटीबीपी का पीड़ित जवान कुछ दिन पहले एक शिकायती आवेदन लेकर आया था, जिसमें उसने निजी अस्पताल पर लापरवाही पूर्वक इलाज करने के कारण अपनी मां का हाथ कटने का आरोप लगाया था। चूंकि मामला तकनीकी रूप से स्वास्थ्य विभाग का था, इसलिए आवेदन तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को भेज दिया गया था।”
उन्होंने आगे बताया कि सीएमओ द्वारा डॉक्टरों की एक विशेष कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई गई थी, लेकिन जो रिपोर्ट आई, उससे जवान संतुष्ट नहीं था। शनिवार को वह अपने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उसी रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराने और बातचीत करने आया था। जब वे अंदर बात कर रहे थे, तब उनके साथी जवान बाहर खड़े थे। पुलिस अधिकारियों द्वारा बात किए जाने के बाद अधिकारियों ने जवानों को वापस भेज दिया।
🛡️ सीएमओ से दोबारा मांगी गई रिपोर्ट, तथ्यों पर होगी कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और पीड़ित आईटीबीपी जवान के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने के लिए पूरी तरह राजी हो गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने सीएमओ से इस पूरे मामले पर दोबारा एक स्पष्ट और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जांच पूरी तरह से तथ्यों के आधार पर होगी और यदि अस्पताल प्रशासन या डॉक्टरों की लापरवाही साबित होती है, तो उनके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🎖️ “हमें कमिश्नर सर से पूरा सपोर्ट है”: कमांडेंट गौरव प्रसाद
इस पूरे घटनाक्रम पर विराम लगाते हुए अर्धसैनिक बल कानपुर के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने भी मीडिया को बयान जारी किया और मीडिया द्वारा खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने पर नाराजगी जताई।
कमांडेंट गौरव प्रसाद ने कहा:
“हमारे जवान की मां का हाथ कट गया है, जो कि एक बेहद संवेदनशील और दुखद मामला है। इसी सिलसिले में हमने कल ही पुलिस कमिश्नर सर से मिलने का समय (Appointment) लिया था। आज मेरे अधिकारी और जवान कमिश्नरेट आए थे। मैं खुद अंदर बैठक में शामिल था और जवान बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे। शायद मीडिया ने इसे गलत रूप में ले लिया है। यहाँ कमिश्नरेट बिल्डिंग को घेरने जैसी कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। हमें कमिश्नर सर की तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा है।”











