‘लखनऊ यूनिवर्सिटी में सनसनी: “लीक्ड पेपर्स फॉर यू, डार्लिंग…” छात्रा को पेपर का लालच देकर अकेले बुलाने वाले प्रोफेसर गिरफ्तार; ABVP का भारी बवाल!’
लखनऊ यूनिवर्सिटी शर्मसार: जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह छात्रा को पेपर लीक का ऑफर देने और आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार। "लीक्ड पेपर्स फॉर यू, डार्लिंग" का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल। एबीवीपी का भारी प्रदर्शन, प्रोफेसर ने बताया आंतरिक राजनीति की साजिश। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
लखनऊ (PNN24 News): उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी के जूलॉजी (प्राणि विज्ञान) विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को एक छात्रा को कथित तौर पर परीक्षा का पेपर लीक करने की कोशिश और आपत्तिजनक बातचीत करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले से जुड़ा एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने देश भर में चल रहे नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच इस विवि स्तरीय परीक्षा की सुचिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. वायरल ऑडियो में क्या है? “लीक्ड पेपर्स फॉर यू, डार्लिंग…”
विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्रा ने हौसला दिखाते हुए प्रोफेसर के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सीधे विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक की औपचारिक शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रोफेसर को हिरासत में लिया।
A major paper leak scandal has hit Lucknow University after an audio recording surfaced online. In the clip, an assistant professor can be heard telling a female student, "I have leaked both papers (core and elective) for you." The professor also repeatedly insisted that the… pic.twitter.com/56gslFEk0z
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) May 15, 2026
वायरल ऑडियो क्लिप के बेहद आपत्तिजनक अंश इस प्रकार हैं:
- प्रोफेसर छात्रा को कथित तौर पर “लीक्ड पेपर्स फॉर यू, डार्लिंग” (Leaked papers for you, darling) कहकर संबोधित करते हैं और पेपर लीक करने का सीधा ऑफर देते हैं।
- जब छात्रा शालीनता से जवाब देती है कि, “सर, मैंने पढ़ाई कर ली है और सिलेबस पूरा कर लिया है”, तो प्रोफेसर उस पर अकेले में मिलने का दबाव बनाते हुए कहते हैं— “तो तुम मुझसे मिलने भी नहीं आओगी एक बार?”
- ऑडियो में प्रोफेसर आगे कहते सुने जा रहे हैं— “एग्जाम से पहले आ जाओ, सात दिनों के अंदर”।
2. एबीवीपी (ABVP) का कैंपस में उग्र प्रदर्शन
इस शर्मनाक घटना के सामने आते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ यूनिवर्सिटी कैंपस में मोर्चा खोल दिया और भारी विरोध प्रदर्शन किया।
- ABVP कार्यकर्ताओं ने आरोपी प्रोफेसर को तुरंत सेवा से बर्खास्त करने और कड़ी कानूनी सजा देने की मांग की।
- एबीवीपी यूनिट के प्रेसिडेंट जय श्रीवास्तव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को कलंकित करने वाले ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
- संगठन ने परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने संबंधी कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि त्वरित न्याय नहीं मिला तो विवि में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
3. प्रोफेसर का दावा: “यूनिवर्सिटी की आंतरिक राजनीति का हिस्सा”
दूसरी ओर, गिरफ्तार सहायक प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह उन्हें जानबूझकर बदनाम करने और निशाना बनाने की एक गहरी साजिश है, जो विश्वविद्यालय की आंतरिक राजनीति से प्रेरित है।
चूंकि डॉ. परमजीत सिंह की छवि विवि में अब तक सामान्य और ठीक-ठाक मानी जाती थी, इसलिए इस खुलासे ने सहकर्मियों और छात्रों दोनों को हैरान कर दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक विश्वसनीयता और अन्य तकनीकी सबूतों की गहनता से जांच की जा रही है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, जहाँ ज्ञान की देवी सरस्वती का वास है, उसी आंगन में अगर एक गुरु अपनी ही शिष्या को ‘डार्लिंग’ कहकर पर्चा लीक करने का सौदा करे, तो समझ लो कि शिक्षा का मंदिर अब हवस और बेईमानी का बाजार बन चुका है!”
आज लखनऊ यूनिवर्सिटी के इस वायरल ऑडियो पर तीखी बहस छिड़ी हुई थी। काका ने चाय का कुल्हड़ हाथ में लेते हुए बहुत ही गंभीर लहजे में अपनी बात रखी।
काका बोले: “बबुआ, एक तरफ तो देश पहले से ही नीट (NEET) के पेपर चोरों से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ यूनिवर्सिटी के ये साहब जूलॉजी पढ़ाने के बजाय बिटिया को अकेले में मिलने का पाठ पढ़ा रहे हैं। धन्य है वह छात्रा जिसने इन साहब की मतिभ्रम को रिकॉर्ड कर लिया, नहीं तो जाने कितनी बच्चियां ऐसी गंदी राजनीति और दबाव का शिकार हो जाती हैं। प्रोफेसर साहब कह रहे हैं कि ये आंतरिक राजनीति है; अरे साहब, अगर राजनीति भी है, तो आवाज़ तो आपकी ही है न? ‘डार्लिंग’ शब्द किस जूलॉजी के सिलेबस का हिस्सा है, ज़रा देश को यह भी समझा दीजिए!”
मैंने पूछा— “काका, क्या ऐसे मामलों से यूनिवर्सिटी की साख पर बट्टा नहीं लगता?”
काका का जवाब: “बिल्कुल लगता है बबुआ! जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो माता-पिता किस भरोसे से अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे? एबीवीपी वाले जो प्रदर्शन कर रहे हैं, वो बिल्कुल जायज है। ऐसे लोगों को सिर्फ सस्पेंड नहीं, बल्कि सीधे जेल की ऐसी कोठरी में डालना चाहिए जहाँ हवा भी ‘अकेले’ में आए। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, डिग्री और पद से कोई गुरु नहीं बनता, गुरु बनता है अपने चरित्र से; और जिसका चरित्र ही लीक हो जाए, उसका समाज से बहिष्कृत होना तय है’।”











