‘प्रयागराज संगमरमर मस्जिद विवाद: इलाहाबाद हाई कोर्ट से मस्जिद कमेटी को अंतरिम राहत, 6 जुलाई तक नहीं दी जाएगी ढहाई; रेलवे के बेदखली नोटिस पर यथास्थिति बरकरार!’
प्रयागराज: जंक्शन परिसर में स्थित ऐतिहासिक 'संगमरमर मस्जिद' को हटाने के रेलवे नोटिस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई। अदालत ने 6 जुलाई 2026 तक लगाया स्टे, यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश। रेलवे और मस्जिद कमेटी के बीच छिड़ी कानूनी जंग पर PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तौसीफ अहमद/प्रदीप कुमार
प्रयागराज (PNN24 News): प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड स्थित ऐतिहासिक ‘मस्जिद संगमरमर’ को हटाए जाने के रेलवे के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर आज इलाहाबाद हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 जुलाई 2026 की तारीख मुक़र्रर की है। तब तक के लिए कोर्ट ने विवादित ढांचे पर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी रखा है, जिससे मस्जिद को फिलहाल टूटने से बड़ी राहत मिल गई है।
1. क्या है पूरा विवाद?
इस विवाद की शुरुआत 8 अप्रैल को हुई थी, जब रेलवे प्रशासन ने प्रयागराज जंक्शन के पुनर्विकास और विस्तारीकरण (Station Expansion) के मद्देनजर एक बेदखली का नोटिस जारी किया था। रेलवे का तर्क है कि यात्री सुविधाओं के विकास और स्टेशन के आधुनिकीकरण के लिए यह जमीन बेहद आवश्यक है। इस नोटिस के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने तत्काल इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2. मस्जिद कमेटी की दलीलें
कमेटी ने अपनी याचिका में रेलवे के इस कदम को मनमाना बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। कमेटी के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:
- यह मस्जिद महज एक सामान्य ढांचा नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर है।
- यह संपत्ति बाकायदा ‘वक्फ बोर्ड’ में पंजीकृत (Registered Waqf Property) है।
- यहाँ दशकों से शांतिपूर्ण ढंग से नमाज़ अदा की जा रही है, इसलिए इसे अचानक हटाना गलत है।
3. क्या है यथास्थिति (Status Quo) का मतलब?
हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के तहत 6 जुलाई 2026 तक विवादित स्थल पर कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसका सीधा अर्थ यह है कि:
- रेलवे प्रशासन मस्जिद के मौजूदा ढांचे को न तो गिरा सकता है और न ही उसे किसी प्रकार की क्षति पहुँचा सकता है।
- मस्जिद कमेटी भी इस दौरान परिसर के भीतर कोई नया निर्माण कार्य या विस्तार नहीं कर पाएगी।
4. कोर्ट का सुझाव: क्या शिफ्टिंग पर बनेगी बात?
पिछली सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण मौखिक सुझाव दिया था कि विकास कार्यों और धार्मिक आस्था के बीच समन्वय बिठाने के लिए मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट (Shift) करने की संभावनाओं पर दोनों पक्ष गंभीरता से विचार करें। हालांकि, आज की सुनवाई में इस बात को लेकर कोई अंतिम सहमति या जवाब सामने नहीं आ सका, जिस पर अब जुलाई में बहस होगी।












