‘पुणे में दरिंदगी की इंतिहा: 4 साल की मासूम से दुष्कर्म के बाद पत्थर से कुचलकर हत्या; 65 साल का “हैवान” भीमराव गिरफ्तार, सुलग उठा महाराष्ट्र..!’
पुणे के भोर में मानवता शर्मसार! 4 साल की मासूम से रेप के बाद पत्थर से कुचलकर हत्या। 65 वर्षीय आरोपी भीमराव कांबले गिरफ्तार, सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा। सीएम फडणवीस ने दी फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की मांग की मंजूरी। ग्रामीणों का हाईवे पर चक्काजाम। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक खान
पुणे (PNN24 News): महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तहसील से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ अपनी नानी के घर गर्मी की छुट्टियां बिताने आई एक 4 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ 65 साल के बुजुर्ग ने रेप करने के बाद बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।
1. तबेले में दिया वारदात को अंजाम
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे आरोपी भीमराव कांबले बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर के पास स्थित एक तबेले में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी पहचान छिपाने के लिए पत्थर से कुचलकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
2. सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने तलाश शुरू की और तबेले से उसका लहूलुहान शव बरामद हुआ। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें आरोपी भीमराव कांबले बच्ची को तबेले की ओर ले जाता साफ दिखाई दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है।
3. राजनैतिक उबाल और न्याय की मांग
इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी उबाल ला दिया है:
- सीएम देवेंद्र फडणवीस: सरकार ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और अपराधी के लिए फांसी की सजा मांगने का ऐलान किया है।
- अनिल देशमुख व सुप्रिया सुले: एनसीपी (एसपी) नेताओं ने घटना को मानवता पर कलंक बताते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
- शाइना NC: शिवसेना प्रवक्ता ने इसे मासूम के खिलाफ सबसे क्रूर अत्याचार करार दिया है।
4. जनता का आक्रोश और चक्काजाम
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
📝 मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और 65 साल की उम्र में कोई हैवानियत पर उतर आए, तो समझो समाज का नैतिक पतन हो चुका है; ऐसी दरिंदगी के लिए फांसी भी कम है!”
पुणे की इस जघन्य घटना पर काका का चेहरा गुस्से से लाल था।
काका बोले: “बबुआ, नानी के घर छुट्टियां मनाने आई उस मासूम को क्या पता था कि उसके पड़ोस में ही मौत घात लगाए बैठी है। 65 साल का वो शख्स, जिसे बच्ची बाबा कहती होगी, वही उसका शिकारी बन गया। ई सिर्फ एक अपराध नहीं है, ई हमारी सामाजिक व्यवस्था के मुँह पर तमाचा है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट से ऐसे मामले रुकेंगे?”
काका का जवाब: “कानून का डर तो होना ही चाहिए बबुआ। जब तक ऐसे दरिंदों को चौराहे पर फांसी नहीं मिलेगी, तब तक इन हैवानों के मन में खौफ नहीं पैदा होगा। 15 दिन में चार्जशीट दाखिल करने का वादा तो हुआ है, पर इंसाफ मिलने तक ई आग बुझनी नहीं चाहिए। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, मासूमों की चीखें जब तक दरबारों को नहीं हिलाएंगी, तब तक बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी’।”











