‘सर सैयद सोसाइटी महाघोटाला भाग-2: हाजी इश्तियाक पर बड़ागांव थाने की FIR नंबर 523 पर कुंडली मार कर बैठा विवेचक, PNN24 के पास पुख्ता सबूत..!’
वाराणसी: सर सैयद सोसाइटी घोटाले में बाहुबली हाजी इश्तियाक के 'नफरती और शातिर सिंडिकेट' का PNN24 पर सबसे बड़ा पर्दाफाश। बड़ागांव थाने में दर्ज FIR नंबर 523 पर विवेचक अभिषेक कुमार राय की सुस्ती की इनसाइड स्टोरी।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): पिछले अंक में PNN24 News ने इस कड़वे सच से पर्दा उठाया था कि किस तरह मुस्लिम हितों और कौम के मसीहा बनने का ढोंग रचने वाले ‘सर सैयद सोसाइटी’ के अध्यक्ष हाजी इश्तियाक ने वर्ष 2016 में संस्था का पंजीकरण निरस्त होने के बावजूद वर्ष 2018 से 2024 के बीच 11 बेशकीमती संपत्तियां धोखाधड़ी से बेच डालीं। हमने यह भी उजागर किया था कि रजिस्ट्री में सरकारी मूल्य कम दिखाकर बाकी की करोड़ों की रकम काले धन (Black Money) के रूप में नगद वसूली गई और वाराणसी का राजस्व विभाग आंखों पर पट्टी बांधकर सोता रहा। PNN24 न्यूज़ के पास ज़मीन की बिक्री के कई दस्तावेज़ उपलब्ध है

🚨 हाजी इश्तियाक का ‘सिंडिकेट’: ये हैं गैंग के 9 मुख्य किरदार
हाजी इश्तियाक के खिलाफ दर्ज बडागांव थाने में दर्ज ऍफ़आईआर संख्या 523/2024 को अगर आधार\ माने तो अकेले इस लूट-घसोट के धंधे को अंजाम नहीं देता, बल्कि उसने शहर के अलग-अलग इलाकों में अपने वफादार और शातिरो का एक बकायदा सिंडिकेट बना रखा है। इस ऍफ़आईआर में शामिल मुख्य अभियुक्तों के नाम इस प्रकार हैं:
- नेहालुद्दीन (निवासी: सरैया)
- अकबर (निवासी: बादशाह बाग)
- अबुल फकर (निवासी: वरुणा पुल)
- गफ्फार अंसारी (निवासी: रज़ा कालोनी)
- आफताब (निवासी: छित्तनपूरा)
- इम्तियाज़ (निवासी: लहँगपूरा)
- इखलाख (निवासी: लहँगपूरा)
- अब्दुल्लाह (निवासी: लहँगपूरा)
- शफीकुज्ज़मा (निवासी: औरंगाबाद)
📁 बड़ागांव थाने की FIR नंबर 523 का सच: आखिर चार्जशीट कोर्ट क्यों नहीं पहुंची?
हाजी इश्तियाक अपने रसूखदार और सफेदपोश साथियों के माध्यम से अपने खिलाफ होने वाली हर प्रशासनिक शिकायत और कानूनी कार्रवाई को दबवा देता है। इसका सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण बड़ागांव थाने पर दर्ज एफआईआर (FIR) नंबर 523 है, जो दिसम्बर 2024 में दर्ज की गई थी। इसका साथ देने वालो में एक मुस्लिम युट्यूबर पत्रकार, एक दलबदलू नेता शामिल है।
- पुख्ता सबूतों की अनदेखी: PNN24 News के पास वे अकाट्य साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध हैं, जो इस केस के विवेचक (Investigation Officer) सब-इंस्पेक्टर (SI) अभिषेक कुमार राय को लिखित रूप से बहुत पहले ही मिल चुके थे। जो इस बात को साबित करता है कि संस्था का पंजीकरण वर्ष 2016 से निलम्बित है, मगर विवेचक उसको अभी तक नज़रअंदाज़ किस आधार पर किये हुवे है, यह बात दरोगा जी ही जाने।
- गिरफ्तारी से दूरी: इस एफआईआर में दर्ज धाराएं पूरी तरह से गैर-जमानती (Non-Bailable) थीं, जिसके आधार पर इस गैंग के नामजद सभी अभियुक्तों की तत्काल गिरफ्तारी होनी तय थी।
- लापरवाही की हद: विवेचक ने इस मामले में गिरफ्तारी करना तो बहुत दूर की बात रही, अपराध का पुख्ता सबूत हाथ में होने के बावजूद आज तक अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) तक प्रेषित नहीं की है।
🧐 दिसंबर 2025 का अजीब खेल और दलाल की एंट्री
इस रसूखदार सिंडिकेट की पहुंच का अंदाजा इस बात से लगाइए कि दिसंबर 2024 में दर्ज हुई एफआईआर के संबंध में विवेचक अभिषेक कुमार राय ने एक साल बाद यानी दिसम्बर 2025 में लिखित साक्ष्य मांगे। जब साक्ष्य मिल भी गए, तब भी फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। आखिर विवेचक पर किसका और क्या दबाव है जो कानून को पंगु बना दिया गया है?
शिकायतकर्ता के ‘मैनेज’ होने की इनसाइड स्टोरी:
हमारे विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे और रसूख की प्रचंड शक्ति का इस्तेमाल किया गया है। पता चला है कि इस गंभीर मामले का शिकायतकर्ता अब पूरी तरह ‘मैनेज’ हो चुका है। इस मैनेजमेंट के पीछे अशोक विहार का रहने वाला एक तथाकथित ‘समाजसेवी’ है, जो असल में थाने-चौकियों का बड़ा दलाल है और अधिकारियों की ‘सेटिंग’ कराने के लिए कुख्यात है। इसी नकली समाजसेवी ने बीच में पड़कर शिकायतकर्ता का मुंह बंद करवा दिया है। वही एक यूट्यूबर और एक दलबदलू नेता की भूमिका भी अहम है।
हमारी तफ्तीश अभी थमी नहीं है!
मुस्लिमों के हमदर्द और मसीहा का मुखौटा ओढ़कर समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने वाले और भी सफ़ेदपोशों का कच्चा चिट्ठा PNN24 की टीम जल्द ही खोलने जा रही है। जुड़े रहें हमारे साथ, क्योंकि हमारी कलम न तो बिकती है और न ही अपराधियों की धमकियों से डरती है।
🧐 क्या कहते है आरोपी
इस मामले में खोज खबरिया यूट्यूब चैनल के ओबैद से कल हाजी इश्तियाक ने एक लम्बे चौड़े साक्षात्कार में खुद को पाक साफ़ और सभी आरोपों को फर्जी और साजिशन लगाया गया आरोप बताया है, आप उनका पूरा बयांन खोज खबरिया के फेसबुक पेज पर जाकर देख सकते है। वही हाजी इश्तियाक के भाई एखलाक जो हमारे सहपाठी भी रह चुके है, ने कहा कि ‘उक्त पूरा मामला फर्जी है, हमारे पास दस्तावेज़ है, समय से उपलब्ध करवाया जायेगा।’ उनके दावो के अनुसार संस्था वर्ष 2021 तक पंजीकृत थी। जबकि वर्ष 2025 के 20 दिसंबर में जारी सोसाइटी रजिस्ट्रार के पत्रांक संख्या 3020/वी-4754/2025-26/वाराणसी जिसकी प्रति PNN24 न्यूज़ के पास उपलब्ध है के अनुसार संस्था का पंजीकरण 27 मई 2016 को निरस्त हो चूका है। जिसके बाद न्यायालय आयुक्त वाराणसी मंडल में दाखिल अपील संख्या 2016140001078 में पारित आदेश दिनांक 20/07/2017 में पंजीकरण के निरस्त होने को वैध करार दिया गया है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, जब पुलिसिया तंत्र खुद ही एक साल तक फाइल दबाकर साक्ष्य-साक्ष्य का खेल खेले, तो समझ लो कि अपराधियों की तिजोरी से निकली ‘गांधी जी की गर्मी’ ने वर्दी के इक़बाल को ठंडा कर दिया है!”

आज बड़ागांव थाने की एफआईआर नंबर 523 और विवेचक अभिषेक कुमार राय की इस रहस्यमयी सुस्ती पर बनारसी मिजाज में तीखी बहस छिड़ गई। काका ने पुलिसिया इकबाल पर तंज कसा।
काका का कहना है: “बबुआ, कमिश्नर मोहित अग्रवाल साहब तो शहर में अपराधियों पर हंटर चलाने का दावा करते हैं, लेकिन जरा अपने मातहतों की कुंडली भी तो देखें! बड़ागांव थाने में साल 2024 में मुकदमा दर्ज होता है, धाराएं गैर-जमानती हैं, और विवेचक अभिषेक राय साहब साल 2025 के दिसंबर में जाकर साक्ष्य मांगते हैं। अरे साहब, जब साक्ष्य लिखित में मिल गए, तो अपराधियों को हवालात भेजने के बजाय चार्जशीट को बक्से में बंद करके क्यों रखा गया है? क्या बनारस के सफेदपोशों और दलालों की पहुंच कानून से भी ऊपर हो गई है?”
मैंने पूछा— “काका, चर्चा है कि अशोक विहार का एक स्वयंभू समाजसेवी इसमें दलाली करके शिकायतकर्ता को मैनेज कर चुका है?”
काका का करारा जवाब: “वही तो असली बीमारी है बबुआ! ये जो समाजसेवक का चोगा ओढ़कर थाने-चौकी की दलाली करते हैं न, यही इस शहर के सबसे बड़े नासूर हैं। हाजी इश्तियाक ने अपने साथ 9 गुर्गों की जो फौज पाल रखी है— चाहे वो सरैया का हो या औरंगाबाद का— ये सब इसी दलाली के तंत्र पर फल-फूल रहे हैं। कौम के नाम पर करोड़ों की जमीनें डकार जाओ और जब मुकदमा हो तो अशोक विहार वाले दलाल को आगे करके शिकायतकर्ता का मुंह पैसों से बंद कर दो। लेकिन ये सफ़ेदपोश भूल रहे हैं कि PNN24 के पास इन सब की पूरी कुंडली है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, अगर अपराधियों और दलालों के सामने बनारस की पुलिस इसी तरह नतमस्तक रहेगी, तो जनता का कानून से भरोसा उठ जाएगा; कमिश्नर साहब खुद इस फाइल को मंगाएं और इस पूरे नेक्सस को नेस्तनाबूद करें’।”











