पश्चिम बंगाल में बड़ा उलटफेर: शुभेंदु अधिकारी होंगे नए मुख्यमंत्री, अमित शाह ने की घोषणा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अमित शाह ने शुभेंदु अधिकारी को नया मुख्यमंत्री घोषित किया है। ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी रहे शुभेंदु ने बीजेपी को सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

तारिक खान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो गया है। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड जीत के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि शुभेंदु अधिकारी राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के 15 साल पुराने किले को ध्वस्त कर दिया है।

सर्वसम्मति से चुने गए नेता

कोलकाता में आयोजित बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद अमित शाह ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लग चुकी है। शाह ने कहा, “बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुझे और मोहन चरण माझी को पर्यवेक्षक के रूप में भेजा था। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगभग आठ प्रस्ताव मिले और सभी में केवल शुभेंदु अधिकारी का ही नाम था। किसी अन्य नाम का प्रस्ताव नहीं आया, इसलिए उन्हें निर्विरोध विधायक दल का नेता निर्वाचित किया जाता है।”

ममता के ‘नंबर दो’ से बीजेपी के ‘नंबर वन’ तक का सफर

शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचना भारतीय राजनीति की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक है। 2020 तक वे ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और सरकार में ‘नंबर दो’ माने जाते थे। लेकिन पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद के कारण उन्होंने 2021 के चुनावों से ठीक पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था।

2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। पिछले पांच वर्षों में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सरकार को हर मोर्चे पर घेरा और बंगाल के उन इलाकों में भी बीजेपी को मजबूत किया जहाँ पार्टी का नामोनिशान नहीं था।

‘अंग-बंग-कलिंग’ का सपना हुआ साकार

बीजेपी के लिए यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक वैचारिक विजय है। बिहार (अंग) और ओडिशा (कलिंग) में पहले से ही प्रभाव रखने वाली बीजेपी ने अब ‘बंग’ (पश्चिम बंगाल) पर भी कब्जा कर लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीतियों को जमीन पर उतारने का श्रेय शुभेंदु के सांगठनिक कौशल को जाता है।

विवादों के साथ रहा है नाता

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जहाँ एक ओर उनकी छवि एक कद्दावर और जमीन से जुड़े नेता की है, वहीं विपक्षी उन पर केंद्रीय एजेंसियों (ED और CBI) की कार्रवाई से बचने के लिए पाला बदलने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के बावजूद उन्होंने बंगाल की जनता के बीच अपनी पैठ बनाई और अंततः राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुँचने में सफल रहे।

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