‘मिसाइलें नहीं, मगर शब्दों से छिड़ चुकी है जंग; क्या तुर्की और इसराइल के बीच सैन्य टकराव अब अपरिहार्य है? “नया ईरान” के टैग और “हिटलर” की तुलना ने बदला कूटनीति का चेहरा!’

मध्य पूर्व में नया सैन्य संकट: क्या तुर्की और इसराइल के बीच छिड़ेगा युद्ध? नेतन्याहू और अर्दोआन की ज़ुबानी जंग ने बढ़ाई सैन्य संघर्ष की संभावना। "शीतकालीन शांति" से "शीतकालीन प्रतिद्वंद्विता" तक पहुंचे संबंधों पर PNN24 की विशेष इन-डेप्थ रिपोर्ट।

ईदुल अमीन संग तारिक आज़मी की मोरबतियाँ

PNN24 न्यूज़ डेस्क: पिछले तीन वर्षों में सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे तुर्की और इसराइल के संबंध अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर खड़े हैं, जहां सीधे सैन्य संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमलों और उसके बाद ग़ज़ा में इसराइली सैन्य अभियान ने दोनों देशों के बीच तनाव की आग में घी डालने का काम किया है।

1. नेताओं के बीच तीखी ज़ुबानी जंग

दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • बिन्यामिन नेतन्याहू (इसराइल): उन्होंने राष्ट्रपति अर्दोआन पर ईरान के “आतंकवादी शासन” की सहायता करने और अपने ही कुर्द नागरिकों का नरसंहार करने का आरोप लगाया।
  • रेचेप तैय्यप अर्दोआन (तुर्की): अर्दोआन ने नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की और कहा कि इसराइली नेतृत्व के हाथ 73,000 फ़लस्तीनियों के खून से सने हैं।

2. “शीतकालीन शांति” से “शीतकालीन प्रतिद्वंद्विता” का सफर

इज़मिर के कटेब चलाबी विश्वविद्यालय की डॉ. तोग़चे एरसोय के अनुसार, दोनों देशों के संबंध अब “शीतकालीन शांति” के बजाय “शीतकालीन प्रतिद्वंद्विता” में बदल गए हैं。

  • घरेलू राजनीति का प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव काफी हद तक घरेलू राजनीति से प्रेरित है। नेतन्याहू अपनी ‘सख्त छवि’ से दक्षिणपंथी समर्थकों को साधना चाहते हैं, जबकि अर्दोआन क्षेत्रीय नेतृत्व के अपने दावों को पुख्ता कर रहे हैं।
  • व्यापारिक संबंध: तनाव के चलते तुर्की ने इसराइल के साथ अपना व्यापार पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी है।

3. सैन्य संघर्ष के संभावित बिंदु (Flashpoints)

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण पैमाने पर युद्ध की संभावना कम है, लेकिन सीमित संघर्ष के कई बिंदु उभर रहे हैं:

  • प्रभाव क्षेत्र का टकराव: सीरिया, साइप्रस और पूर्वी भूमध्यसागर में दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ भू-राजनीतिक ढाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं。
  • सहायता बेड़ा: पूर्व राजनयिक एलोन पिंकास के अनुसार, यदि तुर्की ग़ज़ा या लेबनान जा रहे सहायता जहाज़ों को सुरक्षा प्रदान करता है और इसराइली नौसेना उन्हें रोकने की कोशिश करती है, तो सीमित युद्ध छिड़ सकता है।
  • राहत की बात: 2025 में अज़रबैजान में सैन्य प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई बैठकें बताती हैं कि सैन्य स्तर पर टकराव को रोकने के तंत्र (Hotlines) अभी भी काम कर रहे हैं।

4. क्या तुर्की “नया ईरान” है?

इसराइल के पूर्व पीएम नफ़्ताली बेनेट और मौजूदा नेतन्याहू सरकार के कुछ सदस्यों ने तुर्की को “नया ईरान” करार दिया है। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इस तुलना को खारिज करते हैं:

  • सुरक्षा संरचना: तुर्की नेटो (NATO) का सदस्य है और अमेरिका व यूरोपीय संघ के साथ उसके गहरे संबंध हैं。
  • परमाणु महत्वाकांक्षा: ईरान के विपरीत, तुर्की का लक्ष्य सैन्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है और न ही उसने इसराइल को नष्ट करने की कसम खाई है。
  • तुर्की का जवाब: विदेश मंत्री हाकान फ़िदान ने इसे इसराइल द्वारा एक “नया दुश्मन गढ़ने” की कोशिश करार दिया है।

📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

Tariq Azmi (तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, जब दो ‘मज़बूत’ नेता अपनी घरेलू कुर्सी बचाने के लिए विदेशी दुश्मन ढूंढने लगें, तो समझो कि सरहद पर बारूद की गंध आने वाली है; पर याद रखना, काग़ज़ी शेर हक़ीक़त में लड़ने से बचते हैं!”

आज तुर्की-इसराइल के ‘कोल्ड वॉर’ पर काका का मूड कुछ और ही था।

काका बोले: “बबुआ, अर्दोआन और नेतन्याहू, दोनों एक ही मिट्टी के बने हैं। दोनों को अपनी जनता को ये दिखाना है कि वो शेर हैं। अर्दोआन फ़लस्तीन के नाम पर मुस्लिम जगत का खलीफा बनना चाहते हैं, और नेतन्याहू इसराइल के रक्षक। पर सच्चाई ई है कि दोनों को पता है कि सीधी जंग किसी के हक में नहीं है। नेटो का सदस्य होकर तुर्की इसराइल से भिड़ेगा? ई बात गले नहीं उतरती। ई सब बस ‘चुनावी मसाला’ है।”

मैंने पूछा— “काका, क्या इसराइल में नेतृत्व बदलने से हालात बदलेंगे?”

काका का जवाब: “बबुआ, राजनीति में चेहरा बदलता है, चरित्र नहीं। नफ़्ताली बेनेट तो नेतन्याहू से भी दो हाथ आगे निकले, उन्होंने तो तुर्की को ‘नया ईरान’ कह दिया। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, जब तक ग़ज़ा जल रहा है, तब तक अंकारा और तेल अवीव की चाय में मिठास नहीं आने वाली’।”


📊 संघर्ष की संभावना: एक तुलनात्मक विश्लेषण

क्षेत्र तनाव की स्थिति विशेषज्ञों की राय
सीरिया उच्च लड़ाकू विमानों का आमना-सामना होने का जोखिम
पूर्वी भूमध्यसागर मध्यम भू-राजनीतिक प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा
राजनयिक संबंध शून्य 2010 के बाद के सबसे खराब दौर में
खुफिया संवाद सक्रिय मोसाद और तुर्की एजेंसियां संपर्क में हो सकती हैं

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