‘वाराणसी के बेनिया में बकरा मंडी पर अचानक चला प्रशासन का डंडा, जड़ा ताला; ठेकेदार राजा तिवारी पर कारोबारी के 23 लाख और पटाखा व्यापारियों का पैसा दबाने का गंभीर आरोप!’
वाराणसी: बेनिया क्षेत्र में संचालित बकरामंडी पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन का चला चाबुक, मुख्य द्वार पर जड़ा ताला। ठेकेदार राजा तिवारी पर कारोबारी साजिद खान के 23 लाख हड़पने का आरोप। बकरीद से पहले किसान और पशुपालक बेहाल, PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के बेनियाबाग क्षेत्र में आज सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल के साथ अचानक पहुंचकर वहां संचालित होने वाली बकरा मंडी को पूरी तरह से बंद करवा दिया। प्रशासन ने पूरे मंडी परिसर को खाली कराने के बाद उसके मुख्य प्रवेश द्वार पर अपना ताला लटका दिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से जहां एक ओर ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के मद्देनजर व्यापार करने आए पशुपालक और किसान सड़कों पर आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर मंडी का ठेका लेने वाले व्यापारी के लाखों रुपये डूबने का एक बड़ा वित्तीय घोटाला भी सामने आ रहा है।
🛑 एनओसी (NOC) निरस्त कर खाली कराया परिसर
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बेनिया की इस मंडी को एक सीमित अवधि के लिए ही संचालन की अनुमति (NOC) दी गई थी। लेकिन बाद में किन्हीं तकनीकी या प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने इसके आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिया। सोमवार को नगर निगम के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
💸 27 लाख का इन्वेस्टमेंट… साजिद खान के पैसे कौन लौटाएगा?
इस अचानक हुई तालाबंदी के बाद अब वाराणसी प्रशासन और स्मार्ट सिटी की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- लाखों की ठगी का आरोप: विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित व्यापारी साजिद खान ने इस बकरा मार्केट का ठेका संचालित करने के लिए बेनिया पार्क के मुख्य ठेकेदार राजा तिवारी को 23 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे।
- लाखों का अतिरिक्त खर्च: इसके अलावा साजिद खान ने मंडी को व्यवस्थित करने के लिए टेंट, बैरिकेडिंग और लाइटिंग वगैरह लगवाने में लगभग 4 लाख रुपये अलग से खर्च किए थे।
- कुल मिलाकर साजिद खान का करीब 27 लाख रुपये इस मंडी में दांव पर लगा हुआ था। चूंकि अभी व्यापार की शुरुआत ही हुई थी, इसलिए वे अपने कुल इन्वेस्टमेंट का 25 फीसदी पैसा भी बाजार से वापस नहीं निकाल पाए थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पार्क के ठेकेदार राजा तिवारी द्वारा लिए गए इन 23 लाख रुपयों को अब प्रशासन वापस करवाएगा या स्मार्ट सिटी प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी लेगा?
🎆 पटाखा मार्केट में भी हो चुका है एडवांस का ‘खेल’
पार्क के ठेकेदार राजा तिवारी की कार्यशैली को लेकर यह कोई पहला विवाद नहीं है। सूत्रों का दावा है कि इससे पहले दीपावली के समय लगने वाली पटाखा मार्केट के लिए भी राजा तिवारी द्वारा पटाखा कारोबारियों से लाखों रुपये का एडवांस पैसा वसूल लिया गया था। लेकिन बाद में प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पटाखा मार्केट की परमिशन (NOC) नहीं दी और बाजार नहीं लग सका। हैरान करने वाली बात यह है कि उन पटाखा कारोबारियों का एडवांस पैसा आज तक वापस नहीं मिला है।
पटाखा मार्किट का ठेका लेने का प्रयास बनारस व्यापार मंडल के महामंत्री अजहर आलम “अज्जू” ने लेने का प्रयास किया था। जिसमे पटाखा कारोबारियों ने अपनी दुकाने बुक करवाने हेतु अजहर आलम “अज्जू” को पैसे दिए थे, वो पैसे कई व्यापारियों को आजतक वापस नही मिला है। सूत्र बताते है कि व्यापारी जब अज्जू से पैसा मांगते है तो वह राजा तिवारी द्वारा पैसा मिलने पर वापस करने की बात करते है, जबकि राजा तिवारी अज्जू के ऊपर मामला टालते है इन सब के बीच व्यापारियों का पैसा जाकड़ बना हुआ है। .
⏳ 3 दिन तक क्या ‘माहौल’ बना रहे थे ठेकेदार?
इस पूरे मामले में स्मार्ट सिटी और नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने 22 तारीख को ही मंडी की एनओसी निरस्त कर दी थी। अगर यह खबर पूरी तरह सत्य है, तो पिछले 3 दिनों तक एनओसी निरस्त होने की बात छुपाकर ठेकेदार राजा तिवारी मंडी में क्या माहौल बना रहे थे और साजिद खान को धोखे में क्यों रखा गया? अचानक एनओसी निरस्त करने से पहले स्मार्ट सिटी ने ठेका लेने वाले कारोबारी के पैसे सुरक्षित वापस कराने का कोई कानूनी रास्ता क्यों नहीं तैयार किया?
🐐 पशुपालकों और दूरदराज से आए किसानों में भारी उहापोह
मंडी अचानक बंद होने का सबसे दर्दनाक असर उन गरीब व्यापारियों, पशुपालकों और किसानों पर पड़ा है, जो आगामी ईद-उल-अज़हा के मद्देनजर अपने साल भर पाले हुए बकरों को बेचने के लिए दूर-दराज के जिलों और ग्रामीण इलाकों से वाराणसी पहुंचे थे।
व्यापारियों के मुताबिक, यह बेनिया मंडी वर्षों से इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख और पारंपरिक पशु बाजार रही है, जहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये का टर्नओवर होता था। अचानक हुई इस कार्रवाई से लाखों-करोड़ों रुपये का कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। किसानों का कहना है कि वे भारी भाड़ा लगाकर यहां आए थे, और अब मंडी बंद होने से उनके सामने पशुओं के चारे और अपनी आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को मंडी बंद ही करनी थी, तो कम से कम त्योहार के मद्देनजर कोई वैकल्पिक स्थल उपलब्ध करा देना चाहिए था।
समाचार लिखे जाने तक, न तो प्रशासन द्वारा बेसहारा खड़े पशुपालकों के लिए किसी वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा की गई है और न ही ठेका लेने वाले व्यापारी साजिद खान के डूबे हुए पैसों की रिकवरी का कोई हल निकला है। पूरे बेनियाबाग क्षेत्र में फिलहाल भारी उहापोह और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, सरकारी बाबू जब दफ्तर के बंद कमरों में बैठकर फाइलों पर ‘निरस्त’ की मुहर मारते हैं, तो उन्हें सड़क पर खड़े गरीब किसान के आंसुओं और किसी व्यापारी की डूबी हुई गाढ़ी कमाई का अंदाज़ा नहीं होता!”

आज बेनिया बकरा मंडी पर अचानक लगे ताले और 27 लाख के इस बड़े घालमेल पर बनारसी गुरुओं की अड़ी पूरी तरह जमी हुई थी। काका ने अपनी मोरबत्ती सुलझाई, चश्मे को नाक पर थोड़ा नीचे खिसकाया और नगर निगम के रवैये पर कड़ा प्रहार किया।
काका बोले: “बबुआ, काशी में बकरीद का त्योहार सिर पर है। दूर-दूर से गरीब किसान और पशुपालक इस उम्मीद में बेनियाबाग आए थे कि साल भर जिस बकरे को औलाद की तरह पाला है, उसे बेचकर त्योहार मनाएंगे और घर का कर्ज चुकाएंगे। लेकिन धन्य हो हमारा नगर निगम और स्मार्ट सिटी का प्रशासन! बिना कोई वैकल्पिक जगह दिए, रातों-रात मंडी पर ताला ठोक दिया। अब वो गरीब किसान अपने मवेशियों को लेकर बनारस की सड़कों पर कहाँ भटके?”
मैंने चाय का कुल्हड़ बढ़ाते हुए पूछा— “काका, लेकिन उस ठेकेदार राजा तिवारी पर भी तो आरोप है कि उसने साजिद खान से 23 लाख ले लिए और पहले पटाखा व्यापारियों का पैसा भी हजम कर गया?”
काका का करारा जवाब: “अरे बबुआ, असली मलाई तो वही काट रहा है! जब नगर निगम ने 22 तारीख को ही एनओसी निरस्त कर दी थी, तो तीन दिन तक राजा तिवारी किस बात का तमाशा देख रहे थे? साजिद खान ने 23 लाख एडवांस दिए, 4 लाख का टेंट लगवाया, उसका तो पूरा घर बर्बाद हो गया। और ये पहली बार नहीं है, दीपावली में पटाखा बाजार के नाम पर भी यही खेल हुआ था। एडवांस ले लो, बाद में परमिशन कैंसिल करवा दो और पैसा डकार जाओ! अरे साहब, स्मार्ट सिटी और नगर निगम के अधिकारी आख़िरकार ऐसे ठेकेदारों पर मेहरबान क्यों रहते हैं? जब साजिद खान का पैसा डूबा है, तो प्रशासन राजा तिवारी की संपत्ति कुर्क करके पैसा वापस क्यों नहीं करवाता? काशी की अड़ियों पर हम यही मांग करते हैं— ‘कमिश्नर साहब और नगर आयुक्त साहब तुरंत इस मामले में दखल दें; सबसे पहले उन गरीब किसानों के लिए वैकल्पिक बाजार की व्यवस्था की जाए और साजिद खान के 27 लाख रुपये की पाई-पाई उस ठेकेदार से वसूल करवाई जाए, वरना साफ कहेंगे कि इस खेल में ऊपर से नीचे तक सबकी मिलीभगत है’।”*
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