‘भेलूपुर के अशफाक नगर में “सिस्टम” के साये में अवैध बकरा मार्केट; हर जानवर पर 500 की वसूली, “फैंटम” पर भी उठे सवाल; कब जागेगा वाराणसी प्रशासन?’
वाराणसी: भेलूपुर के अशफाक नगर सार्वजनिक मैदान में बिना अनुमति सज रही अवैध बकरा मार्केट। हर जानवर पर 500 रुपये की वसूली और 'सिस्टम' संभालने के नाम पर बंदरबांट का गंभीर आरोप। स्थानीय पुलिस और 'फैंटम' की चुप्पी पर PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी का भेलूपुर थाना क्षेत्र एक बार फिर प्रशासनिक ढील और अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला अशफाक नगर स्थित सार्वजनिक मैदान का है, जहां स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कथित ‘विशेष कृपा दृष्टि’ के चलते एक अवैध बकरा मार्केट का आयोजन धड़ल्ले से शुरू हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घनी आबादी वाले इलाके में बिना किसी कानूनी अनुमति, प्रशासनिक मंजूरी या सुरक्षा मानकों के इतने बड़े पैमाने पर बाजार लगाया जा रहा है, लेकिन भेलूपुर पुलिस इस मुताल्लिक अपनी आंखें पूरी तरह बंद किए हुए है।
💸 वसूली का ‘गणित’ और 500 रुपये का खेल!
इस अवैध बकरा मार्केट के संचालन के पीछे एक स्थानीय रसूखदार ‘मठाधीश’ का नाम सामने आ रहा है। PNN24 न्यूज़ की पड़ताल में इस बाजार में व्यापारियों से की जा रही अवैध वसूली का एक बकायदा सुनियोजित ढांचा (सिस्टम) उजागर हुआ है। यहां आने वाले हर एक जानवर (बकरे) के एवज में ₹500 का अनिवार्य शुल्क वसूला जाता है, जिसकी बंदरबांट कुछ इस तरह होती है:
- ₹50 (दलाल का हिस्सा): यह राशि उस बिचौलिए या दलाल को दी जाती है, जो बाहर से व्यापारियों और उनके माल (जानवरों) को इस मैदान तक बुलाकर लाता है।
- ₹50 (सिस्टम का हिस्सा): यह राशि उस बिचौलिए के खाते में जाती है जो स्थानीय स्तर पर ‘सिस्टम’ (यानी पुलिस और प्रशासनिक कारिंदों) को मैनेज करने का दावा करता है।
- ₹400 (मठाधीश की जेब में): बची हुई यह सबसे बड़ी रकम सीधे बाजार का संचालन करने वाले स्थानीय रसूखदार मठाधीश के पास जाती है।
कब्रिस्तान की देखभाल का ‘फर्जी’ बहाना!
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस भारी-भरकम अवैध वसूली को जायज ठहराने के लिए बकायदा एक तर्क गढ़ा गया है। आयोजकों द्वारा दावा किया जाता है कि इस पैसे का इस्तेमाल ‘कब्रिस्तान की देखभाल’ के लिए किया जाएगा। हालांकि, जमीन पर रहने वाले प्रबुद्ध नागरिकों का साफ कहना है कि यह देखभाल कब्रिस्तान की नहीं, बल्कि खुद की जेबें भरने और खुद की ‘देखभाल’ के लिए की जा रही है।
‘फैंटम’ के मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल?
इलाके में चल रही चर्चाओं को सही मानें तो इस अवैध कारोबार को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए स्थानीय पुलिस की विशेष विंग, खास तौर पर ‘फैंटम’ (पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग यूनिट) को कथित रूप से पूरी तरह ‘मैनेज’ करके रखा जाता है। यही वजह है कि रूटीन गश्त का दावा करने वाली पुलिस को सार्वजनिक मैदान में चल रहा यह इतना बड़ा अवैध मेला दिखाई नहीं देता।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी सुरक्षा इंतजाम और वैध परमिशन के चल रहे इस संवेदनशील और अवैध बकरा मार्केट पर वाराणसी के उच्च अधिकारियों की ‘निगाह-ए-करम’ कब तक बनी रहती है? क्या कमिश्नरेट पुलिस इस अवैध वसूली और सिस्टम के खेल पर कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करेगी, या फिर रसूखदारों का यह अवैध तंत्र इसी तरह फलता-फूलता रहेगा?
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, जब रक्षक ही ‘मैनेज’ होकर चादर तान सो जाए, तो भेलूपुर की सड़कों पर कानून का तमाशा बनना तय है; कब्रिस्तान के नाम पर खुद की तिजोरी भरना बनारस के मिजाज को शोभा नहीं देता!”

आज शाम चाय के कुल्हड़ के बीच अशफाक नगर की इस अवैध बकरा मार्केट और ‘फैंटम’ की कथित कृपा पर तीखी बनारसी बहस छिड़ गई। काका ने अपनी सिगरेट सुलझाई और धुएं का छल्ला छोड़ते हुए पुलिसिया इकबाल पर तंज कसा।
काका बोले: “बबुआ, भेलूपुर थाने का तो भूगोल ही अलग चल रहा है आजकल। एक तरफ तो घाटों पर वीडियो बनाने वालों को ढूंढने की मुस्तैदी दिखाई जाती है, और दूसरी तरफ अशफाक नगर के सार्वजनिक मैदान में खुलेआम बिना किसी कागज-पत्तर के बकरा बाजार सज जाता है। हर बकरे पर 500 रुपये की पर्ची कट रही है साहब! दलाल से लेकर ‘सिस्टम’ संभालने वालों तक का हिस्सा पहले से तय है। और नाम क्या दिया जा रहा है? कि कब्रिस्तान की बाउंड्री और देखभाल करानी है। अरे साहब, बनारस की जनता इतनी नासमझ नहीं है कि वो ये न समझे कि देखभाल किसकी हो रही है।”
मैंने पूछा— “काका, लोग कह रहे हैं कि पुलिस की फैंटम भी इस मामले में आंखें मूंदे हुए है?”
काका का जवाब: “वही तो असली दर्द है बबुआ! जब सड़क पर दौड़ने वाली सरकारी ‘फैंटम’ खुद ही इस अवैध वसूली की मूकदर्शक बन जाए, तो कानून का खौफ अपराधियों में कहाँ बचेगा? बिना सुरक्षा के, बिना किसी अनुमति के इतना बड़ा बाजार लगाना कल को किसी बड़े विवाद या हादसे का सबब बन सकता है। लेकिन बाबुओं को तो बस अपनी ‘कृपा दृष्टि’ बनाए रखनी है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, सरकारी जमीन और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करके जो मठाधीश अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं, उन पर तत्काल बुलेटप्रूफ कार्रवाई होनी चाहिए; कमिश्नर साहब जरा अपनी स्पेशल टीम भेजकर इस 500 रुपये वाले खेल का पर्दाफाश करवाएं’।”












