‘गंगा की लहरों पर इफ्तार मामला: 8 युवकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, जमानत अर्जी मंजूर!’

वाराणसी: गंगा की बीच लहरों पर नाव पर इफ्तार करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला। गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से 8 युवकों की जमानत अर्जी मंजूर। निचली अदालत से झटका लगने के बाद हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक खान संग तारिक आज़मी की मोरबतियाँ

PNN24 News: धर्मनगरी वाराणसी में गंगा नदी के बीच चलती नाव पर रोजा इफ्तार करने के मामले में गिरफ्तार किए गए युवकों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर आई है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए गिरफ्तार 14 लोगों में से 8 युवकों की जमानत अर्जी (Bail Plea) मंजूर कर ली है।

क्या था पूरा मामला?

बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। वीडियो में कुछ युवक गंगा नदी के बीचों-बीच चलती नाव पर बैठकर रोजा इफ्तार करते नजर आ रहे थे। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसे नियमों का उल्लंघन माना और मामले से जुड़े 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

निचली अदालत से झटका, हाईकोर्ट से मिली राहत

जेल भेजे जाने के बाद आरोपियों की तरफ से निचली अदालत में जमानत के लिए गुहार लगाई गई थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। निचली अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

माननीय न्यायालय का रुख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को सुनने के बाद अपना रुख स्पष्ट किया:

  • माननीय न्यायालय ने मामले में शामिल 8 युवकों की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
  • कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये सभी 8 युवक जल्द ही जेल से बाहर आ सकेंगे।
  • शेष अन्य आरोपियों की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।

📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, गंगा की लहरें तो सबकी प्यास बुझाती हैं और बनारस की रवायत ही मिल-जुलकर रहने की है; नाव पर इफ्तार करने पर जेल की सलाखें ज़रा ज़्यादा सख्त कदम था, खैर… कानून के घर में देर है पर अंधेर नहीं!”

Tariq Azmi (तारिक आज़मी)

आज हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद काका ने अपनी बात रखी।

काका बोले: “बबुआ, बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब दुनिया में मशहूर है। यहाँ सावन के मेले में मुसलमान भाई पानी पिलाते हैं और इफ्तार में हिंदू भाई शामिल होते हैं। चलती नाव पर इफ्तार करने का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने आनन-फानन में 14 लोगों को जेल भेज दिया। सुरक्षा और नियमों की बात अपनी जगह ठीक है, पर सीधे जेल का रास्ता दिखा देना लोगों के गले नहीं उतरा था। अब हाईकोर्ट ने 8 लड़कों की जमानत मंजूर कर ली है। ई फैसला साफ़ दिखाता है कि देश की बड़ी अदालतें स्थिति को सिर्फ ‘वायरल वीडियो’ के चश्मे से नहीं, बल्कि इंसाफ के तराजू पर तौलती हैं।”

मैंने पूछा— “काका, क्या इस विवाद से बनारस के माहौल पर कोई असर पड़ा था?”

काका का जवाब: “बबुआ, बनारस का मिजाज इतना कच्चा नहीं है कि किसी वीडियो से डगमगा जाए। हाँ, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर राजनीति चमकाने की कोशिश ज़रूर की थी। पर कानून ने अपनी लकीर खींच दी है। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, गंगा मैया के आंचल में दुआ कुबूल हो या इफ्तार, दिल में मोहब्बत होनी चाहिए, नफरत नहीं’।”

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