‘लोहता पुलिस का अनोखा “क्राइम कंट्रोल फार्मूला”: रोंग साइड ड्राइविंग से युवक का पैर हुआ अंग-भंग, मगर कमिश्नर के आदेश को ठेंगा दिखा नहीं दर्ज की FIR; अब पीड़ित से ही पैसे वापस मांग रही पुलिस!’
वाराणसी: पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के क्राइम कंट्रोल के आदेश की लोहता पुलिस ने उड़ाई धज्जियां। एक्सीडेंट का मुकदमा दर्ज न करने का अनोखा फार्मूला। रॉन्ग साइड से आ रही स्प्लेंडर (UP-65-FY-7598) ने युवक को मारी टक्कर, पैर की नस कटी; इंसाफ के बजाय पुलिस पीड़ित से ही मांग रही पैसे। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

मो0 सलीम
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के मुखिया, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने शहर में अपराध पर लगाम कसने और पीड़ितों की तत्काल सुनवाई के लिए सभी थानों को सख्त हिदायत दे रखी है। इस आदेश के बाद कमिश्नरेट का हर थाना अपने-अपने स्तर पर अपराधियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने का प्रयास कर रहा है। लेकिन, लोहता थाना प्रभारी ने क्राइम कंट्रोल करने का एक ऐसा ‘नायाब और आत्मघाती’ फार्मूला खोज निकाला है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोहता पुलिस का यह फार्मूला है— “न रहेगा अपराध दर्ज, न बढ़ेगा क्राइम ग्राफ”।

🏍️ रॉन्ग साइड से आ रही स्प्लेंडर ने मारी टक्कर, युवक का पैर हुआ अंग-भंग
घटना के संबंध में लोहता थाने में शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपने वाले शिकायतकर्ता अहसान अली (पुत्र रमज़ान अली, निवासी: धमरिया, थाना: लोहता) ने अपनी तहरीर में न्याय की गुहार लगाते हुए वारदात का पूरा ब्योरा दिया है:
- पैदल जा रहे युवक को रौंदा: 18 मई 2026 की दोपहर करीब तीन से चार बजे के बीच शिकायतकर्ता का भाई इमरान अली केराकतपुर मार्ग पर पैदल ही घर के किसी जरूरी काम से जा रहा था।
- अनियंत्रित बाइक की टक्कर: इसी दौरान अचानक विपरीत दिशा (Wrong Side) से बेहद लापरवाही और अनियंत्रित गति से आ रहे बाइक चालक महेश कुमार (पुत्र शिव कुमार) ने अपनी स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल संख्या UP-65-FY-7598 से पैदल जा रहे इमरान अली को जोरदार टक्कर मार दी।
- कट गई पैर की नस: इस भीषण टक्कर के कारण इमरान के घुटने में बेहद गंभीर चोट आई। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की कि घुटने के अंदर की मुख्य नस पूरी तरह कट चुकी है, जिसके कारण युवक का अंग-भंग (Permanent Disability) हो गया है। प्रार्थी का परिवार अत्यंत गरीब है और इलाज का भारी-भरकम खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ और बेबस है।
💰 ₹2000 का ‘उपकार’ और लोहता पुलिस का शर्मनाक पैंतरा!
इस पूरे मामले में लोहता पुलिस की जो भूमिका सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली और मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करने वाली है। मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद आरोपी बाइक चालक खुद घायल युवक के साथ अस्पताल गया था और डॉक्टरों से बातचीत की थी। इस दौरान आरोपी ने घायल के शुरुआती इलाज और पट्टियों आदि पर करीब दो हजार रुपये खर्च किए थे।
अब लोहता पुलिस इस गंभीर सड़क हादसे पर कानूनी कार्रवाई करने और मुकदमा दर्ज करने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही दबाव बना रही है। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब पीड़ित के लाचार परिवार से कह रही है कि पहले आरोपी युवक द्वारा अस्पताल में खर्च किए गए वे दो हजार रुपये वापस करो, तभी कोई बात होगी!
🧐 PNN24 के तीखे सवाल: रसूख के आगे कब तक दबेगा कानून?
लोहता पुलिस के इस रवैए के बाद कई गंभीर और सुलगते हुए प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं:
- क्या वाराणसी कमिश्नरेट में रॉन्ग साइड ड्राइविंग करके किसी गरीब की जिंदगी बर्बाद करने वाले रसूखदारों पर कानूनी कार्रवाई तब तक नहीं होगी, जब तक आरोपी द्वारा खर्च किए गए चंद रुपयों की ‘भीख’ वापस नहीं हो जाती?
- क्या किसी पीड़ित की पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाने की कीमत लोहता पुलिस की नजर में महज दो हजार रुपये है?
- जबकि यह एक सामान्य रोड एक्सीडेंट (Road Traffic Accident) का मामला है, जिसमें पीड़ित को अदालत (MACT Court) और बीमा कंपनी (Insurance Company) से कानूनी मुआवजा मिलना तय है, तो पुलिस एफआईआर दर्ज कर मामले को कानूनी रूप देने से क्यों बच रही है?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लोहता पुलिस ने खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली और रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने वाली उस स्प्लेंडर बाइक (UP-65-FY-7598) का अभी तक ऑनलाइन चालान तक काटना मुनासिब नहीं समझा है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, बड़े साहब एसी कमरे में बैठकर क्राइम कंट्रोल का ग्राफ नापते हैं, और नीचे थाने के दरोगा जी एफआईआर दबाकर अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। इसे स्मार्ट पुलिसिंग नहीं, पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कना कहते हैं!”

आज शाम जब लोहता के धमरिया से आए गरीब अहसान अली ने रोते हुए अपने भाई इमरान के टूटे हुए पैर की मेडिकल रिपोर्ट दिखाई, तो अश्क के कुल्हड़ की चाय भी कड़वी लगने लगी। काका ने लोहता पुलिस की इस ‘अनोखी पंचायत’ पर जमकर बरसे।
काका बोले: “बबुआ, जरा इस दरोगा जी की अक्ल का पैमाना तो देखो! एक गरीब लड़का पैदल जा रहा है, सामने से एक रसूखदार मोटरसाइकिल वाला रॉन्ग साइड से आकर उसे उड़ा देता है। डॉक्टर कह रहे हैं कि पैर की नस कट गई, लड़का जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो सकता है। और हमारी न्यायप्रिय पुलिस क्या कह रही है? कह रही है कि चूंकि मालिक ने अस्पताल में दो हजार का मरहम लगा दिया था, इसलिए पहले वो दो हजार लौटाओ तब रिपोर्ट लिखेंगे! अरे साहब, ये पुलिस थाना है या किसी सूदखोर का कबाड़खाना? कानून साफ़ कहता है कि एक्सीडेंट होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो ताकि पीड़ित को मोटर क्लेम ट्रिब्यूनल से मुआवजा मिल सके। लेकिन यहाँ तो साहब लोग अपना ‘क्राइम ग्राफ’ चमकाने के लिए पीड़ित को ही मुलजिम बनाने पर तुले हैं।”
मैंने पूछा— “काका, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल तो लगातार थानों की चेकिंग कर रहे हैं, फिर ऐसी लापरवाही क्यों?”
काका ने करारा तंज कसा: “अरे बबुआ, बड़े साहब तो आदेश देकर निकलते हैं कि ‘क्राइम कंट्रोल करो’, लेकिन थानेदार साहब उसका मतलब निकाल लेते हैं कि ‘क्राइम लिखना ही बंद कर दो’! जब मुकदमा दर्ज ही नहीं होगा, तो सरकारी कागजों में लोहता थाना बिल्कुल शांत और रामराज्य जैसा दिखेगा। लेकिन उस मां-बाप के दिल से पूछो जिसका जवान बेटा घर में चारपाई पर पड़ा आंसू बहा रहा है। हम तो पुलिस कमिश्नर साहब से यही गुहार लगाएंगे कि साहब, जरा अपनी स्पेशल टीम भेजकर लोहता थाने के इस ‘नो-एफआईआर फार्मूले’ की कुंडली खंगालिए। रोंग साइड गाड़ी चलाने वाले का तुरंत चालान हो, आरोपी पर मुकदमा दर्ज हो और गरीब इमरान को न्याय मिले, वरना जनता का खाकी पर से भरोसा उठते देर नहीं लगेगी।”











