‘वाराणसी के रमई पट्टी में माहवारी स्वच्छता दिवस पर विशेष जागरूकता शिविर; सामाजिक कार्यकर्ता जूही यादव बोलीं— “बात करें, चुप न रहें, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है!”‘
वाराणसी: रमई पट्टी में विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर सामाजिक कार्यकर्ता जूही यादव की अगुवाई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित। 70 महिलाओं और किशोरियों को दिए गए सुरक्षित सैनिटरी पैड उपयोग और स्वच्छता के टिप्स। किशोरियों ने पोस्टर बनाकर दूर किए पीरियड्स से जुड़े मिथक। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
वाराणसी (PNN24 News): विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) के उपलक्ष्य में वाराणसी के रमई पट्टी क्षेत्र में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को समर्पित एक विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री जूही यादव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में पीरियड्स (माहवारी) को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और किशोरियों को सही स्वास्थ्य आदतों के प्रति सजग बनाना था। गौरतलब है कि 28 मई को बकरीद का पर्व होने के कारण इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन आज 30 मई को किया गया, जिसमें क्षेत्र की लगभग 70 महिलाओं और किशोरियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया।
🧼 सैनिटरी पैड के सही उपयोग और सुरक्षित निस्तारण की दी गई ट्रेनिंग
प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को माहवारी के दिनों में बरती जाने वाली सावधानियों और व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई:
- हाथों की स्वच्छता: प्रशिक्षक जूही यादव ने बताया कि सैनिटरी पैड का उपयोग करने से पहले और पैड बदलने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।
- सुरक्षित निस्तारण: उपयोग किए जा चुके सैनिटरी पैड्स को खुले में फेंकने के बजाय उन्हें कागज में लपेटकर सुरक्षित तरीके से निस्तारित करने के नियम समझाए गए, ताकि पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचे।
- संक्रमण से बचाव: माहवारी के दौरान समय-समय पर (हर 4 से 6 घंटे में) पैड बदलने की सलाह दी गई, जिससे खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण और बीमारियों से बचा जा सके।
🥗 ‘बात करें, चुप न रहें’— पोषण और आराम पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में केवल स्वच्छता ही नहीं, बल्कि महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। जूही यादव ने प्रतिभागियों को समझाया कि इन दिनों में पौष्टिक और आयरन युक्त आहार लेना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को उचित आराम देना कितना आवश्यक है।
“बात करें, चुप न रहें – जागरूकता ही सुरक्षा है” विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि माहवारी एक पूरी तरह से प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया (Natural Biological Process) है। इसे लेकर समाज में किसी भी प्रकार की शर्म, झिझक या हीनभावना नहीं होनी चाहिए। जब तक महिलाएं इस विषय पर खुलकर संवाद नहीं करेंगी, तब तक सदियों से चली आ रही सामाजिक वर्जनाएं और रूढ़िवादी भ्रांतियां दूर नहीं होंगी।
🎨 किशोरियों ने पोस्टर बनाकर बयां किए अपने विचार
कार्यक्रम को और अधिक रचनात्मक और प्रभावी बनाने के लिए किशोरियों के बीच एक पोस्टर निर्माण गतिविधि का भी आयोजन किया गया। क्षेत्र की किशोरियों ने बेहद सुंदर और ज्ञानवर्धक पोस्टरों के माध्यम से माहवारी स्वच्छता संबंधी उपायों, सही जानकारियों और समाज में प्रचलित विभिन्न मिथकों को कैनवास पर उतारा। इस गतिविधि ने न केवल किशोरियों को अपनी समझ और विचारों को खुलकर अभिव्यक्त करने का मंच प्रदान किया, बल्कि उनके भीतर पीरियड्स के प्रति एक सकारात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🙌 प्रतिभागियों ने की अनूठी पहल की सराहना
इस सफल आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और semi-urban क्षेत्रों की महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना था। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं और किशोरियों ने सुश्री जूही यादव की इस जमीनी पहल की भूरि-भूरि सराहना की। प्रतिभागियों का कहना था कि इस तरह के ज्ञानवर्धक और संवेदीकरण कार्यक्रमों को हर महीने नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि कोई भी किशोरी जानकारी के अभाव में किसी गंभीर बीमारी का शिकार न बने।













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