‘वाराणसी के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में “समूह लोन” का मकड़जाल: स्वावलंबन के नाम पर महिलाओं का आर्थिक उत्पीड़न; कर्ज के जाल में उलझकर कठपुतली बन रहे गरीब परिवार…!’

वाराणसी: लोहता, बजरडीहा और लल्लापुरा जैसे क्षेत्रों में माइक्रो फाइनेंस और 'समूह लोन' बना गरीबों के लिए काल। 5 हजार से शुरू होकर लाखों के कर्ज में डूब रहे दिहाड़ी मजदूर परिवार। संचालिकाओं और सफेदपोशों के गठजोड़ से चल रहा 'वोट बैंक' और 'कमीशन' का खेल। PNN24 की विशेष इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट।

तारिक आज़मी

वाराणसी (PNN24 News): धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के लोहता, बजरडीहा, लल्लापुरा, औरंगाबाद, कोइला बाज़ार, जलालीपुरा, नक्खीघाट और सरैया जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में इन दिनों ‘समूह लोन’ का एक ऐसा भयावह चक्रव्यूह फैला है, जिसने हजारों गरीब परिवारों की शांति छीन ली है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का दावा अब केवल एक कथित उद्देश्य बनकर रह गया है, जिसकी आड़ में ठगी और शोषण का काला कारोबार फल-फूल रहा है।

1. कैसे बुना जाता है कर्ज का जाल?

हमारी पड़ताल में सामने आया कि इस मकड़जाल की शुरुआत मात्र 5 से 10 हजार रुपये के कर्ज से होती है। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कुछ महिलाओं का समूह बनाती हैं, जिसकी कमान एक ‘दबंग’ महिला संचालिका के हाथ में होती है।

  • कर्ज पर कर्ज: यदि कोई महिला एक लोन नहीं चुका पाती, तो संचालिका उसका पिछला कर्ज भरने के लिए दूसरी कंपनी से और बड़ा लोन करवा देती है।
  • कमीशन का खेल: हर लोन पर संचालिका अपना मोटा कमीशन काटती है, जिससे लाभार्थी के पास हाथ में कम रकम आती है और कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है।

2. संचालिका और संरक्षणदाताओं का गठजोड़

इन समूहों की संचालिकाओं को स्थानीय स्तर पर ऐसे ‘संरक्षणदाताओं’ का साथ हासिल होता है जो थाना और चौकी की दलाली में माहिर होते हैं।

  • पुलिस मैनेजमेंट: यदि कोई महिला उत्पीड़न की शिकायत लेकर पुलिस तक जाती है, तो ये दलाल मामले को रफा-दफा करवा देते हैं।
  • बड़ा फ्रॉड: कई बार महिला को 10 हजार की ज़रूरत होती है, लेकिन उसके नाम पर 50 हजार का लोन लिया जाता है। 40 हजार संचालिका खुद रख लेती है और बाद में उसे न भरने की स्थिति में महिला को ही डिफाल्टर बना दिया जाता है।

3. नशे की लत और पारिवारिक मजबूरी

इस दलदल में फंसने वाले परिवारों के पुरुष सदस्य अक्सर मजदूर तबके के हैं और नशे की प्रवृत्ति के पाए गए हैं। 300 रुपये दिहाड़ी कमाने वाला व्यक्ति यदि 200 रुपये नशे में उड़ा देता है, तो घर की महिलाएं विवश होकर इन समूहों के पास जाती हैं। पुरुष सदस्य ही अपनी विलासिता के लिए महिलाओं को लोन लेने के लिए उकसाते हैं।

4. राजनीति और वोट बैंक का हथियार

चुनावी मौसम में ये संचालिकाएं और उनके समूह राजनीतिक दलों के लिए ‘वोट मशीन’ का काम करते हैं।

  • वोट का दबाव: कर्ज के बोझ तले दबी महिलाओं को धमकी दी जाती है और जबरन एक खास प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का दबाव बनाया जाता है।

5. सर्वाधिक प्रभावित इलाके

वाराणसी के लोहता, बजरडीहा, लल्लापुरा, औरंगाबाद, कोइला बाजार, सरैया, कोनिया, जलालीपुरा और नक्खीघाट जैसे इलाके इस अवैध वसूली और शोषण के केंद्र बने हुए हैं।


📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

Tariq Azmi (तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, ये ‘स्वावलंबन’ की चाशनी में लिपटा हुआ ज़हर है; जब तक गरीब की मजबूरी का सौदा होता रहेगा, तब तक ये समूह लोन की संचालिकाएं ऐश करेंगी और मज़दूर की औरतें आँसू पिएंगी!”

आज वाराणसी के इस ‘कर्ज चक्रव्यूह’ पर काका ने गहरी चिंता जताई।

काका बोले: “बबुआ, लोहता, बजरडीहा, लल्लापुरा, कोइला बाज़ार, जलालीपुरा, नक्खीघाट और सरैया की गलियों में विकास भले न पहुंचा हो, पर ये लोन वाली कंपनियाँ घर-घर पहुंच गई हैं। 5 हजार का लालच देकर ये लोग घर की महिलाओं को बंधुआ बना ले रहे हैं। संचालिकाएं तो जैसे ‘फ्रॉड’ में पीएचडी की हुई हैं— मासूम औरतों का अंगूठा लगवाकर खुद लाखों डकार रही हैं और पुलिस-प्रशासन दलालों के चश्मे से दुनिया देख रहा है।”

मैंने पूछा— “काका, क्या इन गरीबों को इस जाल से निकालने का कोई रास्ता है?”

काका का जवाब: “बबुआ, रास्ता तब निकलेगा जब प्रशासन इन माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के ऑडिट हो और एक साथ सभी डाटा इकठ्ठा करने से संचालिकाओं पर शिकंजा कसेगा। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, ये ज़बरदस्ती डलवाया गया वोट और ये कमीशन का पैसा किसी का भला नहीं करेगा’। ये गरीब तबका अपनी रोटी कमाए या इन कंपनियों का ब्याज भरे? इस पर गंभीरता से सोचना होगा।”

PNN24 News की विशेष अपील: किसी भी समूह लोन में शामिल होने से पहले नियमों को समझें और किसी को भी अपनी आईडी या ब्लैंक चेक/साइन न दें। जनहित की खबरों के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *