‘नमो घाट पर बाउंसरों का खूनी तांडव; सोनभद्र के 17 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत्या, 4 घायल; सत्ता के चहेते दो “बजड़ा संचालकों” की शह पर चल रही गुंडागर्दी!’
वाराणसी: नमो घाट पर सुरक्षा के नाम पर तैनात बाउंसरों का खूनी तांडव। सोनभद्र से घूमने आए 17 वर्षीय राजेश उर्फ चिंटू की पीट-पीटकर हत्या, चार साथी गंभीर रूप से घायल। आरके वैदिक संस्था के गार्डों और दो रसूखदार बजड़ा संचालकों के सिंडिकेट पर PNN24 का सबसे बड़ा खुलासा।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी के प्रसिद्ध ‘नमो घाट’ से मानवता और पर्यटन को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। घाट पर सुरक्षा के नाम पर तैनात आरके वैदिक संस्था के बाउंसर रूपी गुंडों ने रविवार तड़के सोनभद्र से घूमने आए बेकसूर युवकों पर लाठी, रॉड और बेल्ट से ऐसा खूनी तांडव मचाया कि 17 वर्षीय एक किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके चार साथी जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं। इस जघन्य हत्याकांड के बाद घाट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और एक बार फिर नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था और उसके पीछे पल रहे सिंडिकेट पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
🌌 रात 8 बजे निकले थे बाबा की नगरी घूमने, सुबह मिली लाश
मृतक किशोर की पहचान राजेश उर्फ चिंटू (17 वर्ष) पुत्र झुन्नू जायसवाल के रूप में हुई है, जो खलियारी गांव (थाना रायपुर, जनपद सोनभद्र) का रहने वाला था। वह अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था (बड़े भाई का नाम अंकित जायसवाल और छोटे भाई का नाम मिंटू है)।
परिजनों और गंभीर रूप से घायल साथियों के अनुसार:
- राजेश अपने साथियों शिवजी, बृजेश, अंगद और रोहित के साथ शनिवार रात करीब आठ बजे अपने गांव से वाराणसी घूमने के लिए बेहद उत्साह के साथ निकला था।
- सफर तय करते हुए ये सभी युवक रविवार तड़के रात करीब तीन बजे नमो घाट पहुंचे। उन्हें क्या पता था कि जिस घाट की खूबसूरती को वो देखने आए हैं, वही उनके साथी का डेथ वारंट बन जाएगा।
🏏 गेट नंबर-1 पर रुकते ही टूट पड़े 12 कसाई, 10 मिनट तक की बर्बरता
पीड़ितों का आरोप है कि जब वे नमो घाट के गेट नंबर-1 पर पहुंचे, तो वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्डों ने उन्हें रोक दिया और कहा कि घाट बंद हो चुका है। जब युवकों ने इसका सामान्य विरोध किया, तो गार्ड सीधे गाली-गलौज पर उतर आए। विवाद बढ़ता देख जब युवक वहां से चुपचाप लौटने लगे, तभी करीब 10 से 12 सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद जो हुआ, वह कानून व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। सुरक्षा गार्डों ने डंडे, लोहे की रॉड और बेल्ट से मासूम युवकों को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर करीब दस मिनट तक बेरहमी से पीटा। इस बर्बर पिटाई के कारण राजेश उर्फ चिंटू के सिर और नाजुक अंगों में गंभीर चोटें आईं और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसके अन्य चारों साथी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
🚨 इंस्पेक्टर विमल मिश्रा ने संभाला मोर्चा, चार गार्ड हिरासत में
घटना की चीख-पुकार सुनकर जब हड़कंप मचा, तो सूचना मिलते ही आदमपुर थाना इंस्पेक्टर विमल मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों और अचेत पड़े राजेश को उपचार के लिए मंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद राजेश उर्फ चिंटू को मृत घोषित कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि मृतक के शव को पंचनामा कर मंडलीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार सिक्योरिटी गार्डों को हिरासत में ले लिया है, जबकि मारपीट में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस घाट पर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को खंगालकर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
🌐 आरके वैदिक का टेंडर और दो “बजड़ा संचालकों” का खूनी नेक्सस!
PNN24 News की पड़ताल में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि नमो घाट पर बाउंसरों की यह गुंडागर्दी कोई पहली घटना नहीं है। इस घाट का सुरक्षा टेंडर ‘आरके वैदिक’ नामक संस्था के पास है। इस संस्था ने घाट की सुरक्षा के लिए जो गार्ड रखे हैं, वे रक्षक कम और भक्षक ज्यादा साबित हो रहे हैं। महीने में कम से कम 2 से 3 घटनाएं इन बाउंसरों की मारपीट की सामने आती हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया जाता है।
आखिर किसके इशारे पर नाचते हैं ये बाउंसर? सूत्रों के मुताबिक, नमो घाट पर दो बड़े बजड़ा (बड़ी नाव) संचालक सक्रिय हैं, जिन्हें सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ रसूखदार नेताओं का सीधा ‘वरदहस्त’ (संरक्षण) प्राप्त है। घाट से केवल इन्हीं दोनों की नावें और बजड़े चल सकते हैं। इन दोनों सिंडिकेट ऑपरेटरों ने इन सिक्योरिटी गार्डों को अपने हाथ की कठपुतली बना रखा है। इन्हीं रसूखदार संचालकों की शह पर ये बाउंसर पर्यटकों पर रौब झाड़ते हैं और गुंडागर्दी करते हैं। जब भी ये बाउंसर किसी पर्यटक को पीटते हैं, तो यही दोनों बजड़ा संचालक अपने राजनैतिक रसूख का इस्तेमाल कर अधिकारियों की ‘सेटिंग’ करके मामले को मैनेज करवा देते हैं। इसी शह के कारण आज एक 17 साल के बेकसूर बच्चे की जान चली गई।
हमने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी का बयान लेने हेतु फोन किया, परन्तु उनसे बात नही हो पाई है, जिलाधिकारी का वक्तव्य आने के बाद खबर अपडेट होगी
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, नमो घाट के चमकते पत्थरों और रोशनी के पीछे जो गुंडागर्दी का ‘काला सिंडिकेट’ पल रहा है, उसने आज एक मां की गोद सूनी कर दी; टेंडर वाली संस्था और उन दो बजड़ा दलालों पर जब तक रासुका नहीं लगेगी, तब तक काशी आने वाला हर पर्यटक खुद को असुरक्षित महसूस करेगा!”
आज शाम अस्सी घाट की अड़ी पर नमो घाट की इस दर्दनाक और खूनी वारदात पर बनारसियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। काका ने कांपते हाथों से अपना चश्मा ठीक किया और बेहद आक्रोशित लहजे में तंत्र को घेरा।
काका बोले: “बबुआ, आज बनारस का सिर शर्म से झुक गया है! सोनभद्र का वो 17 साल का मासूम बच्चा राजेश, अपने भाइयों का सहारा, बाबा विश्वनाथ की नगरी घूमने आया था। उसे क्या पता था कि नमो घाट पर स्वागत करने के लिए पुलिस नहीं, बल्कि ‘आरके वैदिक’ कंपनी के पाले हुए 12 कसाई हाथ में रॉड और बेल्ट लेकर खड़े हैं। अरे साहब, गेट बंद था तो मना कर देते, वापस भेज देते; लेकिन दस मिनट तक बेल्ट और रॉड से अधमरा होने तक पीटना कहां का न्याय है? सुरक्षा गार्ड हैं या जल्लाद?”
मैंने चाय का कुल्हड़ बढ़ाते हुए पूछा— “काका, घाट के दो रसूखदार बजड़ा संचालकों पर भी आरोप हैं कि वे इन बाउंसरों से अपनी दलाली करवाते हैं और हर मामले को मैनेज कर लेते हैं?”
काका का करारा जवाब: “वही तो असली कातिल हैं बबुआ! ये जो सत्ता के पिछलग्गू बनकर दो बजड़ा संचालक पूरे घाट पर एकाधिकार जमाए बैठे हैं ना, इन्हीं की शह पर इन बाउंसरों का खून बढ़ा हुआ है। हर महीने पर्यटकों को पीटा जाता है और ये दलाल अधिकारियों के पास जाकर फाइल बंद करवा देते हैं। अगर पिछली वारदातों पर पुलिस कड़क कार्रवाई करती, तो आज झुन्नू जायसवाल के घर का चिराग नहीं बुझता। कमिश्नर साहब और इंस्पेक्टर विमल मिश्रा सुन लें— केवल चार गार्डों को पकड़ने से इंसाफ नहीं होगा। इस आरके वैदिक संस्था का टेंडर निरस्त करो और उन दोनों बजड़ा माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजो, जिनकी दलाली के दम पर ये बाउंसर खुलेआम गुंडागर्दी करते हैं। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, अगर नमो घाट पर पर्यटकों की लाशें गिरेंगी, तो महादेव की इस नगरी की साख पर ऐसा बट्टा लगेगा जिसे कोई सफेदी साफ नहीं कर पाएगी; इन हत्यारों को सरेआम फांसी की सजा मिलनी चाहिए’।”*











