‘ममता शर्मसार: बिहार की महिला ने 16 हजार और 10 साड़ी के लिए बेची 12 साल की बेटी; खरीदार ने मंदिर में शादी का ढोंग रचा 4 महीने तक किया दुष्कर्म, ऑटो चालक ने भी की हैवानियत!’
वाराणसी: सारनाथ पुलिस ने किया मानव तस्करी और मासूम से हैवानियत के बड़े मामले का खुलासा। बिहार की महिला ने 16 हजार रुपये और 10 साड़ी के लिए अपनी 12 वर्षीय बेटी को चंदौली के लहरू यादव को बेचा। 4 महीने तक हुआ दुष्कर्म। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

मो0 सलीम
वाराणसी (PNN24 News): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी के सारनाथ थाना क्षेत्र से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने मां-बेटी के पवित्र रिश्ते और पूरे समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सारनाथ थाने की पुलिस ने शनिवार को करीब चार महीने पुराने एक बेहद संवेदनशील और संगीन मामले का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक मां ने महज 16 हजार रुपये और 10 साड़ियों के लालच में अपनी 12 वर्षीय नाबालिग बेटी को मानव तस्करों के हाथ बेच दिया। इसके बाद मासूम को दो अलग-अलग दरिंदों की हैवानियत का शिकार होना पड़ा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़िता की मां समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
📉 जनवरी 2026 में हुआ था सौदा; 90 हजार का हेयर ट्रांसप्लांट कराकर बना दूल्हा
सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घिनौना खेल जनवरी 2026 में शुरू हुआ था:
- मां ने किया सौदा: बिहार के अरवल की रहने वाली कलयुगी महिला अपनी 12 साल की मासूम बेटी को लेकर चंदौली पहुंची थी। वहां उसने चंदौली के बलुआ (हरधन) निवासी लहरू यादव उर्फ राकेश (उम्र 40 वर्ष) से सौदा तय किया।
- कीमत महज 16 हजार और 10 साड़ी: लहरू यादव ने इस मासूम बच्ची को खरीदने के बदले उसकी मां को महज 16 हजार रुपये नकद और 10 साड़ियां दी थीं, जिसे लेकर मां अपनी बेटी को नरक में धकेल कर वापस लौट गई।
- शादी का ढोंग और हेयर ट्रांसप्लांट: समाज की नजरों से बचने के लिए 40 वर्षीय आरोपी लहरू यादव ने चहनिया क्षेत्र के एक मंदिर में इस 12 साल की बच्ची के साथ शादी का ढोंग रचाया। लहरू दो बच्चों का पिता है और उसकी पत्नी का निधन हो चुका है। वह खुद को कम उम्र का दिखाने के लिए दिल्ली गया था और वहां 90 हजार रुपये खर्च करके हेयर ट्रांसप्लांट कराकर लौटा था। उसने नाबालिग को अपनी पत्नी के रूप में समाज के सामने स्वीकार नहीं किया और अपने बच्चों तथा परिजनों से हमेशा दूरी बनाकर रखा।
⛓️ चार महीने तक बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, फिर बनारस स्टेशन पर छोड़ा
पुलिस के अनुसार, नाबालिग को खरीदने के बाद आरोपी लहरू यादव उसे चार महीने तक बंधक बनाकर अपने पास रखे रहा। इस दौरान वह लगातार उस मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और शारीरिक शोषण करता रहा। जब उसका मन भर गया या पुलिस का डर सताने लगा, तो 19 मई को वह नाबालिग को बनारस रेलवे स्टेशन (मंडुवाडीह) ले आया और उसे वहीं असहाय स्थिति में अकेला छोड़कर भाग निकला।
🛺 मदद के नाम पर ऑटो चालक ने भी लूटी अस्मत, जान से मारने की दी धमकी
मंडुवाडीह स्टेशन पर अकेली रोती-बिलखती मासूम बच्ची को देखकर झारखंड के रहने वाले एक ऑटो चालक रवि वर्मा की नजर उस पर पड़ी। रवि वर्मा वर्तमान में वाराणसी के पहड़िया इलाके में रहकर ऑटो चलाता है।
- मदद का झूठा भरोसा: रवि ने मासूम को मदद का झांसा दिया और सुरक्षा का भरोसा दिलाकर उसे अपने साथ ऑटो में बैठा लिया।
- तालाब के पास किया दुष्कर्म: दरिंदगी की हद तो तब हो गई जब मदद करने के बजाय रवि वर्मा उस बच्ची को सारनाथ स्थित एक तालाब के पास ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। जब मासूम ने रोते हुए शोर मचाने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की सीधी धमकी दी।
- मोहल्ले वालों के शक से खुला राज: दुष्कर्म के बाद ऑटो चालक उसे पहड़िया स्थित अपने किराए के मकान में ले गया। एक अज्ञात और सहमी हुई कम उम्र की बच्ची को ऑटो चालक के घर में देखकर आसपास के स्थानीय निवासियों को गहरा शक हुआ। जागरूक मोहल्लेवासियों ने बिना देर किए पूरे मामले की सूचना तत्काल सारनाथ थाने की पुलिस को दी।
🚨 पुलिस ने चंगुल से कराया मुक्त, पॉक्सो और मानव तस्करी की धाराओं में मुकदमा दर्ज
सूचना मिलते ही सारनाथ थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पहड़िया स्थित मकान पर छापेमारी कर नाबालिग बच्ची को ऑटो चालक के चंगुल से सकुशल मुक्त कराया। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में जब पीड़िता की काउंसलिंग की गई और पूछताछ हुई, तो उसने जनवरी से लेकर मई तक की अपनी पूरी आपबीती और दर्द की दास्तान बयां कर दी, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए।
पीड़िता की लिखित तहरीर के आधार पर सारनाथ पुलिस ने 21 मई को दुष्कर्म (Rape), पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और मानव तस्करी (Human Trafficking – 370 IPC) सहित अन्य गंभीर व सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
🚔 फरीदपुर अंडरपास और रेलवे स्टेशन के पास से तीनों आरोपी गिरफ्तार
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सारनाथ पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुट गईं। शनिवार को पुलिस को सटीक मुखबिरी की सूचना मिली, जिसके बाद घेराबंदी कर फरीदपुर अंडरपास और सारनाथ रेलवे स्टेशन के पास से तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया:
- पीड़िता की सगी मां (निवासी: अरवल, बिहार) – जिसने अपनी बेटी को बेचा।
- लहरू यादव उर्फ राकेश (निवासी: बलुआ हरधन, चंदौली) – जिसने नाबालिग को खरीदा और 4 महीने दुष्कर्म किया।
- रवि वर्मा (निवासी: झारखंड, हाल पता: पहड़िया, वाराणसी) – जिसने मदद के नाम पर दुष्कर्म किया।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, जब कोख ही कातिल और सौदागर बन जाए, तो दुनिया में किस पर भरोसा किया जाए; 16 हजार रुपये और 10 साड़ियों के लिए बेटी को बेचने वाली मां को तो समाज कभी माफ नहीं करेगा!”

सारनाथ में हुए इस वीभत्स और रूह कंपा देने वाले मामले की गूंज वहां पहुंच गई। काका ने बेहद भारी मन से मुझे देखा, उनकी आंखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
काका बोले: “बबुआ, दुनिया में हर रिश्ते की एक सीमा है, लेकिन मां की ममता को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। मगर इस कलियुग में देखो, बिहार की एक मां ने अपनी ही 12 साल की फूल जैसी बच्ची को 16 हजार रुपये और 10 साड़ियों के बदले अधेड़ उम्र के भेड़िए के हाथ बेच दिया। धिक्कार है ऐसी मानसिकता पर! जो मां रक्षक होती है, वही जब भक्षक बन जाए, तो सृष्टि का अंत निश्चित है।”
मैंने गंभीर होते हुए कहा— “काका, उस 40 साल के आरोपी लहरू यादव की अय्याशी भी देखिए, खुद को जवान दिखाने के लिए दिल्ली जाकर 90 हजार का हेयर ट्रांसप्लांट कराता है और मंदिर में शादी का ढोंग रचता है।”
काका का करारा जवाब: “अरे बबुआ, वो लहरू यादव तो साक्षात राक्षस है, जो दो बच्चों का बाप होकर एक मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। और उस ऑटो चालक रवि वर्मा को देखो, जिसे झारखंड से आकर काशी ने शरण दी, उसने मंडुवाडीह स्टेशन पर लाचार बच्ची को मदद का भरोसा देकर सारनाथ के तालाब के पास नोच डाला। गनीमत कहो पहड़िया के उन जागरूक नागरिकों की, जिन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई और पुलिस को वक्त पर सूचना दे दी, वरना वो ऑटो चालक उस बच्ची को कहीं गायब कर देता या मार डालता। काशी की अड़ियों पर हम यही मांग करते हैं— ‘सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी और उनकी टीम ने इन तीनों को पकड़कर अच्छा काम किया है, लेकिन इस मामले में ऐसी सख्त और त्वरित पैरवी (Fast Track Trial) होनी चाहिए कि इन दरिंदों और उस कलयुगी मां को फांसी या ताउम्र कैद की सजा मिले; ताकि आगे कोई अपनी औलाद का सौदा करने की सोच भी न सके’।”












