‘सर सैयद सोसाइटी महाघोटाला: PNN24 के खुलासे से बौखलाया घोटालाबाज़ हाजी इश्तियाक; दलबदलू नेता के दम पर बुलाई कथित पत्रकारों की “हज़ार-पांच सौ वाली” फ़ौज, एडिटर को दी गीदड़ भभकी, पढ़े घोटाले की पूरी कुंडली!’

वाराणसी: करोड़ों की संस्थागत जमीन बेचने वाले घोटालाबाज़ हाजी इश्तियाक का PNN24 ने किया प्रामाणिक पर्दाफाश। 2016 में निरस्त हो चुकी 'सर सैयद सोसाइटी' की 9 बेशकीमती संपत्तियां कौड़ियों के भाव बेचकर किया करोड़ों का कैश का खेल। कानूनी कार्रवाई की तैयारी, पढ़ें विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी 

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के बाबतपुर क्षेत्र में संस्थागत और करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीनों के हेरफेर का एक ऐसा सनसनीखेज महाघोटाला सामने आया है, जिसकी परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, इसके मुख्य किरदार और उनके आकाओं के चेहरों से नकाब उतर रहा है। पिछले दिनों PNN24 News द्वारा ‘सर सैयद सोसाइटी महाघोटाला’ के संबंध में प्रमुखता से समाचारों का प्रकाशन किया गया था। इस प्रामाणिक खुलासे के बाद खुद को इस निरस्त हो चुकी संस्था का सचिव बताने वाले मुख्य घोटालेबाज़ हाजी इश्तियाक और उसके सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। अपने राजनीतिक रसूख और काले धन के बल पर पहले तो उसने पत्रकारिता को ‘मैनेज’ करने की नाकाम कोशिश की, मगर जब दाल नहीं गली तो अब गीदड़ भभकियों और कथित पत्रकारों को पैसे के दम पर बटोरकर अनर्गल बयानबाज़ी पर उतर आया है।

🤫 दलबदलू नेता का सहारा और ‘भाड़े के पत्रकारों’ का इंटरव्यू

जब मुख्य आरोपी हाजी इश्तियाक समाचार को रुकवाने या मैनेज करने में पूरी तरह फेल हो गया, तो उसने शहर के एक ऐसे दलबदलू नेता का सहारा लिया जो कभी कौमी एकता दल में रहते हुए मुख़्तार अंसारी का दाहिना हाथ समझा जाता था और जिसने समाज में मुख़्तार के नाम को खूब भुनाया। मगर मुख़्तार अंसारी के मौत के बाद पलटी मारकर अब वह एमएलसी बृजेश सिंह के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खुद का फर्जी दबदबा बनाने की कोशिश में लगा है।

इसी दलबदलू नेता ने चंद रुपये (हज़ार-पांच सौ) का लालच देकर कुछ कथित मीडियाकर्मियों को इकट्ठा किया। इस प्रायोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद मुख़्तार अंसारी के शूटरों को शहर में पालने के लिए मशहूर हाजी इश्तियाक खुद को ‘जान का खतरा’ बताते हुए विक्टिम कार्ड खेलने लगा और रोते हुए कहा कि ‘मेरी हत्या होने पर पांच लोग ज़िम्मेदार होंगे’, जिसमें उसने PNN24 के निर्भीक संपादक तारिक आज़मी यानि मेरा नाम भी शामिल किया। इस कथित इंटरव्यू के लिए पत्रकारों को पैसे दिए जाने की स्वीकारोक्ति खुद उस दलबदलू नेता ने एक फोन कॉल पर की है, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग PNN24 की लीगल टीम के पास पूरी तरह सुरक्षित है

📜 क्या है सर सैयद सोसाइटी और घोटाले की पूरी कुंडली?

दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियों के अनुसार, इस पूरे महाघोटाले की जड़ें लल्लापुरा से जुड़ी हुई हैं:

  • संस्था का इतिहास: लल्लापुरा स्थित मकान नंबर सी 19/44 के पते पर पंजीकृत संस्था ‘सर सैयद सोसाइटी’ का पंजीकरण 6 अप्रैल 1984 को पंजीकरण संख्या 422 के तहत हुआ था। समय के साथ इस संस्था के नाम पर बाबतपुर हवाई अड्डे के पास करोड़ों की बेशकीमती और अकूत संपत्तियां हो गईं।
  • वर्चस्व की जंग और निरस्तीकरण: इस अकूत संपत्ति के लालच में संस्था से जुड़े लोगों की नीयत डोल गई। दिसंबर 2012 में इस संस्था का अंतिम नवीनीकरण हुआ था, जिसके बाद हाजी एकराम और हाजी इश्तियाक के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हो गई। परिणाम यह हुआ कि 27 मई 2016 को इस सोसाइटी का पंजीकरण आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया गया
  • अदालतों से भी लगा झटका: पंजीकरण निरस्त होने के बाद मामला कमिश्नर कोर्ट (आयुक्त अदालत) गया, जिसने 19 जुलाई 2017 को निरस्तीकरण को पूरी तरह न्यायसंगत ठहराया। इसके बाद मामला हाई कोर्ट (रीट संख्या 25533/2017) गया, जहाँ से कोई राहत नहीं मिली और 11 अगस्त 2021 को हाई कोर्ट ने मामला निचली अदालत में ले जाने को निर्देशित किया। वर्तमान में न्यायालय सिविल जज (जू0डी0) में वाद संख्या 235/25 (जो अप्रैल 2025 में दाखिल हुई) में सिर्फ ‘यथास्थिति’ (Status Quo) कायम रखने का अंतरिम आदेश है। यानी जो संस्था 2016 में ही मर चुकी थी, वह आज भी कानूनी रूप से निरस्त ही है।

⚖️ निरस्त संस्था की जमीनें बेचकर किया करोड़ों का ‘कैश’ का खेल (अंडर-वैल्यूएशन)

कानूनी रूप से मृत हो चुकी संस्था का पदाधिकारी बनकर हाजी इश्तियाक ने वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2022-23 तक कुल 9 बेशकीमती संपत्तियां धड़ल्ले से बेच डालीं। सरकारी कागजों (रजिस्ट्री) में इन जमीनों का मूल्य बाजार दर से अत्यधिक कम दिखाकर (Under-Valuation) बड़े पैमाने पर स्टाम्प चोरी की गई और अंतर की करोड़ों रुपये की भारी-भरकम धनराशि हाजी इश्तियाक द्वारा अलग-अलग शहरों में विभिन्न माध्यमों से ‘नगद’ (Cash) के रूप में डकार ली गई।

📊 प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर बेची गई 9 संपत्तियों का पूरा विवरण:

क्र.सं. रजिस्ट्री की तिथि किसके नाम बेची गई जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज विवरण
1 28 फरवरी 2018 सोनिया मुखर्जी बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4008
2 26 मार्च 2018 अर्चना श्रीवास्तव बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4032
3 26 मार्च 2018 अरविन्द कुमार जयसवाल बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4033
4 13 अगस्त 2018 रीता द्विवेदी बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4205
5 20 अप्रैल 2019 नीलू सिंह बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4522
6 11 जून 2019 आशुतोष उपाध्याय बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4591
7 18 नवम्बर 2019 चंदा सिंह और अरुणा तिवारी बही संख्या 1, जिल्द संख्या 4806
8 12 मई 2022 मीनाक्षी केशरवानी बही संख्या 1, जिल्द संख्या 6024
9 26 सितम्बर 2023 पंकज कुमार बही संख्या 1, जिल्द संख्या 8652

🤔 सीनाजोरी और राजस्व विभाग की रहस्यमयी चुप्पी!

इतने बड़े दस्तावेजी सबूतों के बाद भी हाजी इश्तियाक का इंटरव्यू लेने वाले किसी भी कथित ‘चिरकुट’ पत्रकार ने यह बुनियादी सवाल नहीं पूछा कि “जब संस्था 2016 से अस्तित्व में ही नहीं है, तो आप किस हैसियत से जमीनें बेच रहे थे और आपको बेचने की इजाज़त किस सरकारी अधिकारी ने दी?” ज़ाहिर है, जब मुंह में रुपयों के ‘हरे पत्ते’ ठूंसे गए हों तो सवाल कैसे निकलेंगे! हाजी इश्तियाक का सीना ठोक कर यह कहना कि ‘प्लाट बिका, मगर पैसा संस्था को आया’, उसकी कानूनी अज्ञानता और सीनाजोरी को दर्शाता है।

इस गंभीर विषय पर आखिर वाराणसी का राजस्व विभाग बात करने को भी तैयार क्यों नहीं है? इसका सबसे आसान जवाब यही है कि ‘समरथ को नही दोष गुसाई’। मगर नाम के आगे हाजी लगा लेने से कोई पाक-साफ नहीं हो जाता, ‘मस्तान’ भी नाम के आगे हाजी लगाता था लेकिन था तो वो स्मगलर ही।

📝 संपादक का संदेश: हम डरने वाले नहीं (कलम की जंग)

“जो डटे हुवे है महाज़ पर, मुझे उन सफो में तलाश कर…”

PNN24 News ऐसी गीदड़ भभकियों, फर्जी मुकदमों की धमकियों या भाड़े के कथित पत्रकारों के बयानों से डरने वाला नहीं है। हम सच की जंग में डटे हुए हैं और हाजी इश्तियाक तथा उसके सिंडिकेट द्वारा किए गए इस महाघोटाले की एक-एक कुंडली खोलते रहेंगे। हमारे ऊपर लगाए गए झूठे और बेबुनियाद आरोपों के खिलाफ हमारी कानूनी (Legal) टीम पूरी ताकत से तैयारी कर रही है और उन कथित बिकाऊ पत्रकारों तथा मुख्य आरोपी हाजी इश्तियाक के खिलाफ जल्द ही मानहानि और विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अभी तो गंगा में काफी पानी बहना बाकी है। हमारी टीम कुछ अन्य बेहद गोपनीय और चौंकाने वाले दस्तावेज भी तलाश रही है। जल्द ही एक और बड़ा प्रामाणिक खुलासा होगा कि कैसे इस सिंडिकेट ने मुस्लिम मतदाताओं को तकसीम (विभाजित) करने का भी राजनीतिक सौदा किया था।

  • जब तालीम के इदारो पर ताले का सवाल आएगा,
  • कलम के इस सिपाही को जलाल आएगा।
  • घोटालेबाजों से निजात दिलाने के लिए,
  • अब एक नया तारीखी इन्कलाब आएगा।

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