‘VDA का दोहरा मापदंड: दालमंडी में नोटिस की बौछार, तो नखास में जर्जर मकान K 63/41-1 पर तन रही 4 मंजिला “मौत की इमारत”; साहब की “हरी नींद” कब खुलेगी?’
वाराणसी विकास प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल! दालमंडी में छोटे निर्माणों पर सख्ती, तो नखास की 3 फीट की गली में 4 मंजिला अवैध इमारत पर मेहरबानी क्यों? क्या सत्ता की हनक और भ्रष्टाचार के आगे बौना साबित हो रहा प्राधिकरण? क्षेत्रीय नागरिकों ने लगाया पक्षपात का आरोप। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की हालिया कार्रवाइयां और कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के घने बसे इलाकों में प्राधिकरण की “चुनिंदा सख्ती” ने नागरिकों के बीच भेदभाव और भ्रष्टाचार की चर्चाएं तेज कर दी हैं। एक तरफ जहाँ मुस्लिम बाहुल्य इलाके दालमंडी में छोटे-छोटे निर्माणों पर भी प्राधिकरण की पैनी नज़र है और नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पास के ही नखास इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
1. नखास: 3 फीट की गली और 150 साल पुराना जर्जर आधार
मामला थाना कोतवाली के अंतर्गत नखास क्षेत्र का है (भवन संख्या K 63/41-1)। यहाँ एक संकरी 3 फीट की गली के अंदर लगभग 150 वर्ष पुराने दो मंजिला जर्जर भवन के ऊपर अवैध रूप से चार मंजिला इमारत का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है।
- बिना अनुमति निर्माण: यह पूरी इमारत बिना किसी वैध मानचित्र या विकास प्राधिकरण की अनुमति के बन रही है।
- जानलेवा खतरा: जर्जर आधार पर इतनी ऊंची इमारत न केवल आसपास के घरों के लिए खतरा है, बल्कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में संकरी गली होने के कारण बचाव कार्य भी असंभव होगा।
2. सत्ता की हनक या “हरे पत्तों” का असर?
क्षेत्रीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि भवन स्वामी राज कुमार गुप्ता की सत्ता के गलियारों में ऊंची पकड़ है। शायद यही कारण है कि जोनल अधिकारी इस अवैध निर्माण को देखने के बाद भी आंखें मूंदे बैठे हैं। चर्चा यह भी है कि विभागीय अधिकारियों को “विशेष उपहारों” (भ्रष्टाचार) की ऐसी तकिया मिली है कि उन्हें इस जानलेवा निर्माण में कोई खतरा नज़र नहीं आ रहा।
3. लिखित शिकायत के बाद भी “कुंभकर्णी नींद”
स्थानीय नागरिकों ने इस संबंध में विकास प्राधिकरण को लिखित शिकायत भी सौंपी है। इसके बावजूद अब तक मौके पर कोई कार्यवाही न होना प्राधिकरण की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। लोगों का कहना है कि शायद साहब को अपनी कुर्सी जाने का डर है या फिर वे किसी “बड़े आदेश” का इंतज़ार कर रहे हैं।
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, कानून की लाठी तभी चलती है जब सामने वाला कमजोर हो; अगर जेब गरम हो और सत्ता का हाथ सर पर हो, तो 3 फीट की गली में भी कुतुब मीनार खड़ी हो जाए और साहब को पता तक न चले!”
आज VDA की इस कार्यशैली पर अस्सी घाट की अड़ी पर काका ने बड़े ही कटाक्ष भरे लहजे में अपनी राय रखी।
काका बोले: “बबुआ, ई बनारस है, यहाँ गली-गली में खेल होता है। दालमंडी में अगर कोई एक ईंट रख दे तो प्राधिकरण का दस्ता बुलडोजर लेकर खड़ा हो जाता है, पर नखास में 150 साल पुराने बुज़ुर्ग मकान पर 4 मंज़िल लाद दी गई और साहब सो रहे हैं? ई नींद नहीं है बबुआ, ई ‘मैनेजमेंट’ है। जब तक हादसा नहीं होता, तब तक साहब के लिए सब ‘ऑल इज़ वेल’ रहता है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या शिकायत का कोई असर नहीं होगा?”
काका का जवाब: “शिकायत का असर तो तब हो जब फाइल पर वज़न न रखा गया हो। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, अगर कुर्सी बचानी है तो नियम सबके लिए एक रखिए, वर्ना जनता जब जागती है तो स्टूल भी नसीब नहीं होता’।”
📊 विवाद का विवरण: एक नज़र में (Case Summary)
| विवरण | जानकारी |
| विवादित स्थल | नखास (भवन K 63/41-1), थाना कोतवाली |
| भवन स्वामी | राज कुमार गुप्ता (कथित सत्ता पक्ष से जुड़ाव) |
| निर्माण की स्थिति | 150 साल पुराने भवन पर बिना नक्शा 4 मंजिला निर्माण |
| नागरिकों का आरोप | भेदभावपूर्ण कार्यवाही और भ्रष्टाचार |
| प्राधिकरण का पक्ष | अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं |













