‘असम के स्कूल में “बीफ टिफिन” पर महा-बवाल: सहपाठियों को जबरन खिलाने के आरोप में छात्र हिरासत में, मां गिरफ्तार; प्रशासन ने स्कूलों में नॉन-वेज टिफिन पर लगाया पूरी तरह बैन!’
असम: गोलपारा के कृष्णाई में सरकारी स्कूल के टिफिन में कथित 'बीफ' लाने पर भारी विवाद। 9वीं के छात्र पर हिंदू सहपाठियों को बीफ खिलाने का प्रयास करने का आरोप; छात्र हिरासत में, मां गिरफ्तार। जिला उपायुक्त प्रदीप तिमुंग का बड़ा आदेश— स्कूलों में टिफिन में मीट-मछली लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध, केवल शाकाहारी भोजन और अंडे की होगी अनुमति। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
असम (PNN24 News): असम के गोलपारा जिले से स्कूली शिक्षा और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। कृष्णाई पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी स्कूल में एक मुस्लिम छात्र द्वारा अपने टिफिन बॉक्स में कथित तौर पर बीफ (गोमांस) लाने और उसे अपने हिंदू सहपाठियों को खिलाने का प्रयास करने का संगीन मामला प्रकाश में आया है। इस घटना की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली, तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद पुलिस और जिला प्रशासन को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा है।
🚨 5 छात्रों पर लगा आरोप; छात्र हिरासत में और मां गिरफ्तार
कृष्णाई थाने के प्रभारी अधिकारी आनंद राभा ने मीडिया को इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी दी है:
- सहपाठियों को खिलाने का प्रयास: पीड़ित हिंदू छात्रों के अभिभावकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह घटना पिछले शुक्रवार (5 जून 2026) की है। आरोप है कि 9वीं कक्षा के पांच मुस्लिम छात्रों ने मिलकर अपने दो हिंदू सहपाठियों को जबरन टिफिन में लाया गया बीफ खिलाने की कोशिश की।
- पुलिस की बड़ी कार्रवाई: इस संवेदनशील मामले की सूचना मिलते ही जिला उपायुक्त (DC) प्रदीप तिमुंग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नबनीत महंता ने तुरंत भारी पुलिस बल के साथ स्कूल का दौरा किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी छात्र को हिरासत में ले लिया है, जबकि इस कृत्य को बढ़ावा देने के आरोप में उसकी मां को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया है।
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धार्मिक भावनाएं भड़काने का केस: पुलिस के मुताबिक, मां और बेटे के खिलाफ कानूनी तौर पर धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने (Hurt Religious Sentiments) सहित अन्य कई संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट स्तर की उच्च स्तरीय जांच (Magisterial Inquiry) भी की जा रही है।
🚫 जिला प्रशासन का ऐतिहासिक फैसला: स्कूलों में मीट-मछली पर पूर्ण प्रतिबंध
इस घटना के बाद पैदा हुए जन-आक्रोश और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नाराजगी को देखते हुए जिला आयुक्त प्रदीप तिमुंग ने सभी संबंधित पक्षों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की। इसके तुरंत बाद स्कूल इंस्पेक्टर को सख्त नीतिगत निर्देश जारी किए गए हैं:
- केवल शाकाहारी भोजन को अनुमति: प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया है कि, “अब से जिले के किसी भी स्कूल में छात्र अपने टिफिन बॉक्स में किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन (जैसे मीट या मछली) लेकर नहीं आएंगे। स्कूल परिसरों के भीतर केवल और केवल शाकाहारी भोजन लाने की ही अनुमति होगी।”
- अंडे को मिली छूट: हालांकि, पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि छात्र अपने टिफिन में उबले या बने हुए ‘अंडे’ ला सकते हैं और खा सकते हैं, इस पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
- लंच ब्रेक में बाहर जाने पर रोक: इसके साथ ही अनुशासन बनाए रखने के लिए आदेश में यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि लंच या इंटरवल (ब्रेक) के समय कोई भी छात्र स्कूल कैंपस से बाहर नहीं जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिले के किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में इन निर्देशों का उल्लंघन पाया गया, तो स्कूल प्रबंधन और संबंधित छात्र के खिलाफ बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।










