‘बलिया में प्रशासनिक टकराव: दूसरे जिले में ट्रांसफर के बाद भी उभांव थाने पर जमे हैं SHO! भड़के भाजपा नेता ने SP को पत्र सौंपकर हटाने की मांग की; CM ऑफिस तक पहुंचा मामला’
बलिया: उभांव थाना प्रभारी दिनेश कुमार पाठक को हटाने की मांग को लेकर गरमाई बिल्थरारोड की राजनीति. भाजपा मंडल अध्यक्ष दिलीप सिंह ने एसपी बलिया को सौंपा पत्र; लगाया कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उत्पीड़न का आरोप. दूसरे जनपद में ट्रांसफर के बाद भी जमे रहने पर उठाए सवाल; पत्र की प्रतिलिपि सीएम ऑफिस भेजी. पढ़ें PNN24 की विशेष राजनैतिक रिपोर्ट.

उमेश गुप्ता
बिल्थरारोड, बलिया (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बिल्थरारोड क्षेत्र में उभांव थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार पाठक की तैनाती को लेकर सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और पुलिस प्रशासन के बीच रार खुलकर सामने आ गई है. भाजपा के मंडल अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय कद्दावर नेता दिलीप सिंह ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) बलिया को एक लिखित पत्र सौंपकर उभांव थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है. इस कदम के बाद से ही जिले के राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है.
🔄 “गैर-जनपद ट्रांसफर के बाद भी क्यों जमे हैं थाना प्रभारी?”— भाजपा
भाजपा नेता दिलीप सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षक बलिया को दिए गए पत्र में सबसे बड़ा और गंभीर प्रशासनिक मुद्दा उठाया गया है.
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स्थानांतरण की अनदेखी का आरोप: पत्र में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि उभांव थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार पाठक का स्थानांतरण (तबादला) काफी पहले ही दूसरे जनपद (गैर-जनपद) के लिए हो चुका है. इसके बावजूद, वे नियमों को ताक पर रखकर अभी तक उभांव थाने पर ही तैनात हैं और अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं.
⚠️ “विपक्ष को तवज्जो, कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न”— दिलीप सिंह
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने पत्र में कानून-व्यवस्था और पुलिस के रवैये को लेकर अपनी ही सरकार के प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है:
- कार्यकर्ताओं में असंतोष: पत्र में तीखा रुख अपनाते हुए कहा गया है कि उभांव थाना प्रभारी का व्यवहार सत्ताधारी दल भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रति बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है. जनता और कार्यकर्ताओं की जायज समस्याओं को भी पुलिस द्वारा गंभीरता से नहीं सुना जाता.
- अनावश्यक रूप से परेशान करने का आरोप: दिलीप सिंह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं को अनावश्यक और जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, जबकि इसके उलट विपक्षी दलों से जुड़े लोगों और उनके मामलों को थाने में ज्यादा तवज्जो (महत्व) दी जा रही है. इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रही है और उनमें भारी आक्रोश है.
🎯 2027 विधानसभा चुनाव का हवाला; संपूर्ण समाधान दिवस में भी गूंजा मुद्दा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह असंतोष अचानक नहीं फूटा है. शनिवार, 6 जून 2026 को आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान भी भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से सामूहिक रूप से इस गंभीर मुद्दे को प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठाया गया था और उसी दौरान एसपी को पत्र देकर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज कराई गई थी.
- मनोबल पर पड़ेगा असर: पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए इस पत्र में आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है. पत्र में चेतावनी भरे लहजे में कहा गया है कि चुनावी और संगठनात्मक दृष्टि से क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना बेहद आवश्यक है, लेकिन पुलिसिया रवैया इसे कमजोर कर रहा है.
- हाईकमान और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची चिट्ठी: मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा नेता ने इस पत्र की प्रतिलिपि (कॉपी) भाजपा के क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिला पदाधिकारियों, प्रदेश नेतृत्व और सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), लखनऊ को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी है.
इस हाई-प्रोफाइल राजनैतिक हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल बेहद तेज हो गई है. अब सभी की निगाहें बलिया पुलिस प्रशासन और कप्तान के अगले फैसले पर टिकी हैं कि क्या भाजपा संगठन के इस दबाव के बाद उभांव थाना प्रभारी को कार्यमुक्त किया जाता है या प्रशासन अपने स्तर पर कोई जांच बैठाता है.












