‘MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेल: मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, याचिका खारिज; बीजेपी के तीनों उम्मीदवार “निर्विरोध” निर्वाचित, दिल्ली में कांग्रेस का हल्लाबोल!’
नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद बीजेपी के तीनों प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका को किया खारिज; कहा— 'चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद दखल नहीं, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत जाएं हाईकोर्ट।' दिल्ली में कांग्रेस का राष्ट्रपति भवन मार्च, लोकतंत्र की हत्या का लगाया आरोप। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आदिल अहमद
नई दिल्ली/भोपाल (PNN24 News): मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में एक बेहद चौंकाने वाला और एकतरफा परिणाम सामने आया है। रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज किए जाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध (Unopposed) निर्वाचित घोषित कर दिया गया है। वहीं, इस प्रशासनिक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका को भी शीर्ष अदालत ने सुनने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार; कहा— “संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करें”
शुक्रवार (12 जून 2026) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांडूरकर की खंडपीठ ने मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका पर सुनवाई की:
- राहत देने से मना: शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता की उस दलील को स्वीकार नहीं किया जिसमें रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को ‘पूरी तरह मनमाना और अवैध’ बताया गया था।
- संविधान का दिया हवाला: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत स्थापित नियमों के मुताबिक, एक बार चुनाव प्रक्रिया (Electoral Process) शुरू हो जाने के बाद अदालतें बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
- चुनाव याचिका की छूट: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मीनाक्षी नटराजन को यह कानूनी छूट दी है कि वे चुनाव संपन्न होने के बाद ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act) के तहत संबंधित हाईकोर्ट में नियमित ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) दायर कर इस मामले को चुनौती दे सकती हैं।
🗳️ बीजेपी के तीनों प्रत्याशी निर्विरोध जीते; भोपाल में मिले सर्टिफिकेट
नामांकन वापस लेने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद मैदान में केवल सत्तारूढ़ दल के तीन उम्मीदवार ही बचे थे। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने तीनों को विजयी घोषित कर जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया:
- तरुण चुघ (बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव)
- रजनीश अग्रवाल (बीजेपी प्रदेश सचिव)
- महेश केवट (पूर्व अध्यक्ष, राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड)
क्या था सीटों का गणित?: मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों (230 सदस्य) के लिहाज से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत थी। 164 विधायकों वाली बीजेपी के पास दो सीटें आसानी से जीतने के बाद भी तीसरी सीट के लिए पर्याप्त नंबर नहीं थे। वहीं, 61 प्रभावी विधायकों के साथ कांग्रेस के खाते में एक सीट (मीनाक्षी नटराजन की) पक्की मानी जा रही थी, लेकिन पर्चा खारिज होते ही पूरा खेल पलट गया।
🚨 क्यों रद्द हुआ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन?
यह पूरा विवाद मंगलवार को तब शुरू हुआ जब बीजेपी प्रत्याशी महेश केवट के वकीलों ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे (Affidavit) को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई:
- बीजेपी का आरोप: बीजेपी का दावा था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत में लंबित आपराधिक/दीवानी मामले की जानकारी को जानबूझकर छुपाया (Concealment of Facts) है।
- कांग्रेस का बचाव: कांग्रेस और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा का कहना था कि तेलंगाना का मामला कोई औपचारिक आपराधिक केस या एफआईआर (FIR) नहीं है, बल्कि वह केवल एक मानहानि/मुआवजे का दीवानी नोटिस है, जिसे हलफनामे में दर्शाना अनिवार्य नहीं था। रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की दलीलों को दरकिनार करते हुए पर्चा निरस्त कर दिया था।
🛑 दिल्ली की सड़कों पर संग्राम, कांग्रेस का ‘राष्ट्रपति भवन मार्च’
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के भीतर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बुधवार को चुनाव आयोग (ECI) से निराशा हाथ लगने और गुरुवार को नामांकन खारिज होने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया:
- घोषित तानाशाही का आरोप: मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर ‘राष्ट्रपति भवन’ की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया।
- जयवर्धन सिंह का तीखा हमला: PNN24 News से बात करते हुए विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा, “यह पूरी तरह से बीजेपी की घोषित तानाशाही का प्रमाण है। मीनाक्षी जी एक ईमानदार और गांधीवादी नेता हैं, उनका पर्चा दुर्भावनापूर्ण तरीके से खारिज किया गया। हमें चुनाव आयोग से न्याय नहीं मिला और अब जब तक न्याय नहीं मिलता, हमारा सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रहेगा।”
इस निर्विरोध जीत के साथ ही मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें बीजेपी की झोली में चली गई हैं, जिससे उच्च सदन (Rajya Sabha) में सत्तापक्ष की ताकत और अधिक मजबूत हो गई है।










