‘ब्राजील में रीयल लाइफ “Orphan”: 37 साल की महिला बनी 12 साल की मासूम बच्ची; दूध की बोतल और खिलौनों से 14 महीने तक परिवार को ठगा, एक्स-रे में शरीर से निकलीं 200 सुइयां!’
इंटरनेशनल डेस्क: ब्राजील में रीयल लाइफ 'ऑर्फन' फिल्म का खौफनाक सच! 37 साल की महिला अमांडा मारिया सूज़ा डी ओलिवेरा खुद को 12 साल की 'ऑटिस्टिक' बच्ची 'गैब्रिएल' बताकर लोगों को ठगती रही। बच्चों की तरह दूध की बोतल पीना, खिलौनों से खेलना और 14 महीनों तक परिवार को धोखे में रखने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार। एक्स-रे में शरीर के भीतर मिलीं 200 सुइयां।

ईदुल अमीन
PNN24 News: जब एक मासूम लड़की ने बिलखते हुए मदद की गुहार लगाई कि वह महज 12 साल की है, बेहद गंभीर पारिवारिक उत्पीड़न (Abuse) से बचकर भागी है, ऑटिज्म से पीड़ित है और दुनिया में बिल्कुल अकेली है, तो ब्राजील के भावुक लोगों ने इंसानियत के नाते अपने घरों के दरवाजे उसके लिए खोल दिए। लेकिन जब ब्राजील की खुफिया पुलिस ने इस ‘मासूम बच्ची गैब्रिएल’ का असली चेहरा बेनकाब किया, तो पूरा देश सन्न रह गया। वह कोई बच्ची नहीं, बल्कि 37 वर्षीय एक शातिर महिला निकली, जो अपनी ढलती उम्र को छिपाकर मासूमियत का ढोंग कर रही थी।
🍼 दूध की बोतल, खिलौने और हार्मोन थेरेपी की झूठी कहानी
ब्राजील पुलिस ने 3 जून 2026 को इस हाई-प्रोफाइल धोखेबाज महिला को गिरफ्तार किया है। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, उसकी असली पहचान अमांडा मारिया सूज़ा डी ओलिवेरा के रूप में हुई है:
- 14 महीने तक परिवार के साथ रही: जांचकर्ताओं के अनुसार, ओलिवेरा ने एक नकली नाम और पहचान के तहत एक दयालु परिवार को झांसे में लिया और उनके साथ पूरे 14 महीने बिताए।
- बच्चों जैसी हरकतें: पुलिस ने बताया कि खुद को पूरी तरह बच्ची साबित करने के लिए वह बकायदा बच्चों की तरह तुतलाकर बात करती थी, नियमित रूप से दूध पीने वाली बोतल (Baby Bottle) का इस्तेमाल करती थी और खिलौनों से खेलती थी।
- वयस्क चेहरे का ये दिया तर्क: जब लोग उसके चेहरे की झुर्रियों या वयस्क बनावट पर सवाल उठाते, तो वह रोते हुए कहती कि बचपन में उसके माता-पिता ने उसे जबरन ‘हार्मोन ट्रीटमेंट’ (Hormone Injections) दिए थे, जिससे उसकी शारीरिक बनावट समय से पहले बड़ी दिखने लगी है।
🩺 एक्स-रे में दिखीं 200 सुइयां; एनजीओ को ऐसे किया बर्बाद
अमांडा की ठगी का जाल साओ पाउलो, रियो डी जनेरियो, मिनास जेराइस समेत कई राज्यों में फैला हुआ था। रियो डी जनेरियो में पीड़ित बच्चों के लिए ‘माओज क्यू अबेनओम कॉम आमोर’ नाम की चैरिटी संस्था चलाने वाली विवियन हेनरिक्स और रेनाता मैगलहाइस ने अपनी आपबीती सुनाई:
- ‘डूडा’ बनकर जाल में फंसाया: साल 2023 में अमांडा ने उनसे ‘डूडा’ नाम से संपर्क किया और कहा कि उसके पिता ने उसे जबरन वेश्यावृत्ति में धकेला था। दोनों महिलाओं ने भावुक होकर उसके लिए एक फ्लैट किराए पर लिया।
- शरीर में फंसी थीं 200 सुइयां: रेनाता ने बताया कि जब वे उसका मेडिकल चेकअप कराने ले गईं, तो एक्स-रे (X-Ray) देखकर डॉक्टरों के होश उड़ गए। अमांडा के शरीर के भीतर 200 से अधिक लोहे की सुइयां धंसी हुई थीं। अमांडा ने रोते हुए दावा किया कि उसके पिता ने जादू-टोने (काला जादू) के अनुष्ठान के दौरान ये सुइयां उसके शरीर में चुभोई थीं। इस भयावह दृश्य को देखकर किसी को उस पर शक नहीं हुआ।
- मानसिक और आर्थिक शोषण: रेनाता कहती हैं, “उसने कभी पैसे नहीं मांगे, लेकिन वह लगातार ध्यान खींचने के लिए खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) की धमकी देती थी। उसने मेरी मानसिक सेहत, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन को पूरी तरह तबाह कर दिया।”
📱 फोन की सर्च हिस्ट्री ने खोला राज: “ऑटिस्टिक लोग कैसा व्यवहार करते हैं?”
ठगी के इस बड़े साम्राज्य का भंडाफोड़ तब हुआ, जब पनाह देने वाले परिवार के एक रिश्तेदार को ‘गैब्रिएल’ के व्यवहार पर शक हुआ। उसने इंटरनेट पर खोजबीन की, तो रियो डी जनेरियो का पुराना मामला सामने आ गया।
जांच अधिकारी रोडरिगो गुसो और मोनिका एरियाल ने जब अमांडा को हिरासत में लेकर उसके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। अमांडा के फोन की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री में मिला कि वह गूगल पर लगातार सर्च करती थी: “ऑटिस्टिक लोग कैसा व्यवहार करते हैं?” और “उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति की तरह कैसे दिखें?”। वह इंटरनेट से ऑटिज्म के लक्षण सीखकर एक्टिंग करती थी।
⚖️ समझदार अपराधी या मानसिक बीमार?
जांच अधिकारी रोडरिगो गुसो ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद अमांडा ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, “वह पूरी तरह समझदार, तार्किक और शातिर है। उसमें मानसिक समस्या (Mental Illness) के कोई लक्षण नहीं दिखे।” हालांकि, ओलिवेरा के वकील राफ़ेल लुइस सिवर्ट ने कोर्ट से उसकी मनोवैज्ञानिक जांच (Mental Health Evaluation) की मांग की है, जिसे मंजूर कर लिया गया है।
फिलहाल, ब्राजील के कानून में धोखाधड़ी को गैर-हिंसक अपराध माने जाने के कारण उसे मुकदमे तक जमानत मिल गई है, लेकिन खुफिया एजेंसियां देश के अन्य राज्यों में उसके शिकार हुए परिवारों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।











