‘जंतर-मंतर पर “कॉकरोच जनता पार्टी” का महाप्रदर्शन संपन्न: बाबा साहेब की जीवनी लेकर दिल्ली पहुंचे अभिजीत दीपके; वांगचुक-प्रशांत भूषण का साथ; गोदी मीडिया के लगे नारे!’
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण संपन्न। अमेरिका से लौटे संस्थापक अभिजीत दीपके ने संभाला मोर्चा, शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी हुए शामिल। दिल्ली पुलिस की अनुमति के बाद जुटे हजारों छात्र, मीडिया के एक वर्ग के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी। प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और प्रियंका चतुर्वेदी ने आंदोलन को बताया 'शुभ संकेत'। पढ़ें PNN24 की विशेष राजनैतिक रिपोर्ट।

तारिक खान
नई दिल्ली (PNN24 News): सोशल मीडिया पर एक कटाक्ष और मीम के सहारे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का सफर शनिवार को देश की वास्तविक राजनीति के पन्नों में दर्ज हो गया. अमेरिका (बोस्टन) से पढ़ाई पूरी कर शनिवार सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पहुंचे पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने बिना किसी रुकावट के सीधे जंतर-मंतर पहुंचकर मोर्चा संभाला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बुलंद की. लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मौजूदगी और हजारों युवाओं के आक्रोश के बीच यह ऐतिहासिक प्रदर्शन शाम को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त घोषित कर दिया गया.
✈️ एयरपोर्ट पर बाबा साहेब की जीवनी और दिल्ली पुलिस की हरी झंडी
शनिवार सुबह जब अभिजीत दीपके दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे, तो उनके समर्थकों में उनकी गिरफ्तारी को लेकर गहरी आशंकाएं थीं. खुद पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने भी ऐसी आशंका जताई थी.
- अंबेडकर की जीवनी संग तस्वीर: तमाम कयासों को खारिज करते हुए सीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल ‘कॉकरोच इज़ बैक’ पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें अभिजीत दीपके सुरक्षित एयरपोर्ट से बाहर निकलकर कार में बैठते दिखे. इस दौरान उनके हाथ में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी नजर आ रही थी.
- दिल्ली पुलिस से मिली अनुमति: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर संशय तब खत्म हुआ जब दीपके ने खुद ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्हें दिल्ली पुलिस से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की औपचारिक मंजूरी मिल गई है. शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की तारीफ करते हुए लिखा, “शायद पहली बार दिल्ली पुलिस ने सही काम किया है, सीजेपी को प्रदर्शन की इजाज़त देकर।”
🗣️ “जब युवा सरकार के खिलाफ बोलता है, तो मां को डर लगता है”— अभिजीत दीपके
कड़ी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर पर जुटी युवाओं की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके बेहद भावुक और हमलावर नजर आए.
- मां के डर का जिक्र: दीपके ने कहा, “पिछले दो-तीन दिन से मेरी मां-बहन रो रहे थे कि तुम वापस आओगे तो ये लोग तुम्हें अंदर डाल देंगे। मेरे घर वापस आने से उन्हें डर लग रहा था। लेकिन यह मेरी मां का अकेले का डर नहीं है। इस देश में जो भी बच्चा, स्टूडेंट या युवा राजनीति के ऊपर और इस सरकार के खिलाफ बोलेगा, तो उसकी मां को डर लगता है कि मेरे बेटे को कहीं ये अंदर न डाल दें।”
- नारेबाजी और तीखे सवाल: उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे डर की राजनीति के आगे न झुकें. इसके बाद जंतर-मंतर “नहीं डरेंगे, तुम्हारी राजनीति से नहीं डरेंगे, धर्म की राजनीति बंद करो, हिंदू-मुसलमान की राजनीति बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा. उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए पूछा कि 10-12 साल की हिंदू-मुस्लिम राजनीति से देश में किसे नौकरियां मिलीं?
- कैमरा घुमाकर दिखाओ कितने ‘कॉकरोच’ आए: सोशल मीडिया पर अविश्वास जताने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग पूछ रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा, वे कैमरा घुमाकर देख लें कि जंतर-मंतर पर कितने ‘कॉकरोच’ (युवा) अपने घरों से बाहर निकलकर आए हैं।”
🎥 प्रदर्शन में ‘गोदी मीडिया’ की भारी किरकिरी; बीजेपी समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ा
जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में मुख्यधारा के मीडियाकर्मी और पत्रकार मौजूद थे. हालांकि, प्रदर्शनकारियों के निशाने पर मीडिया का वह वर्ग रहा जो सरकार के हर कदम को सही ठहराने के लिए प्राइम टाइम चलाता है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने ‘गोदी मीडिया मुर्दाबाद’, ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ और ‘गोदी मीडिया गो बैक’ के जमकर नारे लगाए.
इसी दौरान सीजेपी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ समर्थक भी वहां प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन माहौल बिगड़ने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रोक दिया और परिसर से बाहर निकाल दिया.
📝 क्या है CJP का इतिहास? क्यों रखा यह नाम?
बीबीसी मराठी को दिए एक पुराने इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने इस व्यंग्यात्मक नाम के पीछे की दिलचस्प वजह बताई थी.
- सीजेआई के बयान से नाराजगी: दीपके ने बताया था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का एक बयान देखा था, जिसमें वे सिस्टम की आलोचना करने वाले युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच और परजीवियों’ से कर रहे थे. संविधान के संरक्षक द्वारा युवाओं के लिए ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से नाराज होकर दीपके ने एक पैरोडी पार्टी बनाने का फैसला किया और नाम दिया— ‘कॉकरोच जनता पार्टी’.
- सदस्यता की अनूठी पात्रता: उन्होंने मजाक में इसके लिए पात्रता तय की कि सदस्य को आलसी होना चाहिए, बेरोजगार होना चाहिए और लगातार ऑनलाइन रहने वाला होना चाहिए. आज इंस्टाग्राम पर इस पैरोडी आंदोलन के 2.21 करोड़ (22.1 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स हैं और 2 लाख से अधिक लोगों ने इसकी वेबसाइट पर पंजीकरण कराया है.
📊 राजनीतिक विश्लेषकों और दिग्गजों की राय: इसे खारिज करना भूल होगी
शनिवार को जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ ने देश के बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है:
- योगेंद्र यादव (राजनैतिक विश्लेषक): “यह कोई पार्टी नहीं, बल्कि जनता की छिपी हुई ऊर्जा की एक दुर्लभ झलक है जो लोकतांत्रिक गणतंत्र को वापस हासिल कर सकती है। इसे नजरअंदाज करना बहुत बड़ी गलती होगी। इस गुस्से के पीछे एक गहरी आकांक्षा और उम्मीद छुपी है।”
- प्रशांत भूषण (वरिष्ठ वकील, सुप्रीम कोर्ट): “देश में पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के बीच यह जेन-ज़ी (Gen-Z) आंदोलन एक स्वाभाविक तूफान की तरह है, जिसे अब समझदारी भरे समर्थन और सही मार्गदर्शन की जरूरत है।”
- स्मिता शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार): “दक्षिण एशिया में श्रीलंका के अरागलया, बांग्लादेश और नेपाल के हालिया आंदोलन सोशल मीडिया से ही शुरू हुए थे। सीजेपी के प्रवक्ता (सौरव दास, आशुतोष रांका) शिक्षित और स्पष्ट विचारों वाले लोग हैं, इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता।”
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रशीद किदवई (वरिष्ठ पत्रकार व लेखक): “लोकतंत्र के लिए यह बहुत शुभ संकेत है कि लोग मायूस नहीं हैं और नया तजुर्बा करना चाहते हैं, जैसे तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी ने विकल्प दिया है। अन्ना आंदोलन के समय भी तत्कालीन अनुभवी नेता युवाओं के इस आक्रोश को सिर्फ बादल समझ रहे थे, लेकिन वह बादल जमकर बरसा था।”














