‘यूएपीए (UAPA) केस में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कश्मीरी एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज को 4 साल बाद मिली जमानत; कोर्ट बोला— “स्वीकार है अपील”, लेकिन अभी नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर!’
नई दिल्ली: कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, यूएपीए (UAPA) मामले में मिली नियमित जमानत। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने पलटा एनआईए कोर्ट का फैसला। वकील स्वाति खन्ना बोलीं— 'जमानत मिल गई है, लेकिन दूसरे केस के चलते अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।' एनआईए ने लगाया था लश्कर का रिक्रूटर होने का आरोप। पढ़ें PNN24 की विशेष विधिक रिपोर्ट।

जारा अंसारी
नई दिल्ली (PNN24 News): कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ‘जम्मू-कश्मीर कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी’ (JKCCS) के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर खुर्रम परवेज को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी कामयाबी मिली है। हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने खुर्रम परवेज को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए यूएपीए के एक मामले में नियमित जमानत प्रदान कर दी है। खुर्रम साल 2021 से इस मामले में जेल में बंद थे। हालांकि, इस राहत के बाद भी वे तुरंत जेल की सलाखों से बाहर कदम नहीं रख पाएंगे।
⚖️ एनआईए (NIA) कोर्ट का फैसला पलटा; जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने दी बेल
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए खुर्रम परवेज की वकील स्वाति खन्ना ने हाईकोर्ट के इस बड़े और महत्वपूर्ण आदेश की आधिकारिक पुष्टि की है:
- एनआईए कोर्ट का आदेश रद्द: दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की डिवीज़न बेंच ने एनआईए की विशेष अदालत के उस पुराने फैसले को पूरी तरह पलट दिया है, जिसने खुर्रम परवेज की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने खुर्रम की अपील को स्वीकार करते हुए रेगुलर बेल मंजूर की।
- शर्तों का आना बाकी: एडवोकेट स्वाति खन्ना ने बताया, “माननीय उच्च न्यायालय का विस्तृत लिखित आदेश अभी पूरी तरह अपलोड नहीं हुआ है, जिसके कारण हमें अभी जमानत की विस्तृत शर्तों और मुचलके (Bail Conditions) की जानकारी नहीं मिल सकी है, लेकिन उन्हें नियमित जमानत मिल गई है।”
- क्यों नहीं आ पाएंगे जेल से बाहर?: वकील ने स्पष्ट किया कि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद खुर्रम परवेज तुरंत जेल से रिहा नहीं हो सकेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) और अन्य आरोपों से जुड़ा एक और अलग आपराधिक मामला अदालत में विचाराधीन है, जिसमें उन्हें अभी जमानत मिलना बाकी है।
🚨 लश्कर-ए-तैयबा के ‘रिक्रूटर’ होने का था संगीन आरोप
यह पूरा मामला देश की प्रमुख जांच एजेंसी एनआईए (NIA) की एक बड़ी जांच से संबद्ध है, जिसमें खुर्रम परवेज की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे:
- 2021 में हुई थी गिरफ्तारी: एनआईए ने खुर्रम परवेज को साल 2021 में जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से गिरफ्तार किया था।
- एजेंसी के दावे: एनआईए ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर यह दावा किया था कि खुर्रम परवेज प्रतिबंधित वैश्विक चरमपंथी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ (LeT) के लिए एक एक्टिव ‘रिक्रूटर’ (भर्ती करने वाले) के रूप में काम कर रहे थे और वे देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे।
- बचाव पक्ष की दलील: वहीं बचाव पक्ष और खुर्रम के वकीलों का हमेशा से यह रुख रहा है कि उन्हें उनके मानवाधिकार कार्यों और कश्मीर में हो रही जमीनी गतिविधियों की रिपोर्टिंग करने के कारण जानबूझकर निशाना बनाया गया है।
📁 क्या है ‘जेकेसीसीएस’ (JKCCS) और इसकी भूमिका?
जिस समय खुर्रम परवेज की गिरफ्तारी हुई थी, वह कश्मीर घाटी की एक बेहद चर्चित गैर-सरकारी संस्था (NGO) ‘जम्मू-कश्मीर कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी’ (JKCCS) में बतौर प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। यह संस्था पिछले लगभग तीन दशकों (30 साल) से कश्मीर घाटी के भीतर कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, लापता नागरिकों, और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी बेहद विस्तृत और गंभीर रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जारी करने के लिए जानी जाती है, जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां हमेशा सतर्क रही हैं।
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यूएपीए जैसे सख्त कानून में, जहां धारा 43डी(5) के तहत जमानत मिलना लगभग नामुमकिन माना जाता है, वहां दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य के अन्य मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर (Precedent) साबित हो सकता है।










