‘सरहद बनी विलेन: फेसबुक का प्यार, धर्म परिवर्तन और फिर शादी; एक Phone Call ने उजाड़ी तरुण-काजल की दुनिया, अब निर्वासन के डर से रो रहे मासूम बच्चे’

गुजरात ब्रेकिंग: 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' की जद में आई सीमा पार की मोहब्बत, आणंद के तरुण पटेल की बांग्लादेशी पत्नी काजल पर निर्वासन (Deportation) का खतरा। एक आईएसडी (ISD) फोन कॉल ने खोला अवैध रूप से रहने का राज। महिला संरक्षण गृह में रो-रोकर बुरा हाल, बच्चों से बिछड़ने का डर। हाईकोर्ट पहुंची वकील ज़ैनब सैयद। पढ़ें PNN24 की विशेष मानवीय रिपोर्ट।

तारिक खान

PNN24 News: “प्यार की कोई सरहद नहीं होती”— यह पंक्ति सुनने में जितनी खूबसूरत लगती है, हकीकत के धरातल पर कई बार उतनी ही दर्दनाक साबित होती है। कुछ ऐसा ही मामला गुजरात के आणंद जिले के लांभवेल से सामने आया है, जहाँ रहने वाले तरुण पटेल के लिए अब भारत-बांग्लादेश की ‘सरहद’ उनके जीवन की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है। करीब एक दशक पहले बांग्लादेश की एक युवती से प्रेम विवाह कर घर बसाने वाले तरुण आज अपने सुंदर परिवार को बिखरने से बचाने के लिए कानूनी जद्दोजहद में रात-दिन एक कर रहे हैं।

📱 फेसबुक का प्यार और एजेंट की धोखाधड़ी की दास्तान

इस अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत साल २०१२ में हुई थी। बांग्लादेश के गोपालपुर गांव की रहने वाली ‘काजुली’ की मुलाकात फेसबुक पर गुजरात के तरुण पटेल से हुई। वक्त के साथ दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने जिंदगी साथ बिताने का फैसला किया।

  • धोखाधड़ी का शिकार: तरुण ने काजुली को वैध तरीके से पासपोर्ट बनवाकर भारत आने को कहा था। काजुली ने इसके लिए बांग्लादेश में एक स्थानीय एजेंट को 12-13 हजार रुपये भी दिए, लेकिन एजेंट ने उसके साथ धोखाधड़ी की और पैसे हड़प लिए।
  • मजबूरी में उठाया कदम: उधर, काजुली का परिवार उन पर एक बांग्लादेशी युवक से शादी करने का भारी दबाव बना रहा था। इस पारिवारिक दबाव से तंग आकर काजुली बिना पासपोर्ट-वीजा के किसी तरह सीमा पार कर पहले कोलकाता पहुंचीं और वहां से आणंद (गुजरात) तरुण के पास आ गईं।
  • नाम और धर्म परिवर्तन: तरुण से शादी के बाद मूल रूप से मुस्लिम काजुली ने हिंदू धर्म अपना लिया और अपना नया नाम ‘काजल’ रख लिया। हालांकि, किसी भी वैध अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट/वीजा) के न होने के कारण इस शादी का कभी कानूनी रूप से पंजीकरण (Registration) नहीं हो सका।

📞 मां की बीमारी पर की गई एक ‘ISD Call’ और शुरू हुआ ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’

तरुण और काजल अपने दो बेटों और बुजुर्ग मां के साथ पिछले कई सालों से बेहद सामान्य और खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। लेकिन २ जून 2026 को गुजरात पुलिस के ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ (अवैध प्रवासियों की धरपकड़ का अभियान) ने उनकी पूरी जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। तरुण बताते हैं कि काजल की मां बांग्लादेश में रहती हैं। वहां चल रही राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के बीच काजल की मां की एक गंभीर सर्जरी हुई थी। मां की सलामती जानने के लिए काजल बेहद चिंतित थी और रोने लगी थी। तरुण ने अपनी पत्नी की तसल्ली के लिए अपने मोबाइल से बांग्लादेश एक आईएसडी (ISD) कॉल की। काजल ने सिर्फ अपनी मां से उनकी तबीयत का हालचाल पूछा था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय कॉल को ट्रेस कर लिया गया।

जब पुलिस तरुण के घर पहुंची, तो मोबाइल में ‘काजोल्स मॉम’ नाम से सेव नंबर को देखकर पूछताछ शुरू हुई। काजल के पास कोई वैध भारतीय दस्तावेज न मिलने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आणंद के पुलिस अधीक्षक (SP) जीजी जसानी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि करते हुए कहा कि जांच में यह साबित हो चुका है कि काजल बिना पासपोर्ट और बिना किसी वैध दस्तावेज के गुजरात में गैरकानूनी रूप से रह रही थीं, इसलिए उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

💔 बिखरता परिवार: “बहू नहीं, बेटी चली गई, बच्चे भूखे रो रहे हैं”

फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद काजल को आणंद स्थित ‘जागृति महिला संगठन’ के संरक्षण गृह (Shelter Home) में रखा गया है। काजल के बिना पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

  • सास का दर्द: काजल की बुजुर्ग सास इंदुबेन रोते हुए कहती हैं, “काजल मेरे लिए सिर्फ बहू नहीं, बल्कि बेटी जैसी थी। उसके जाने के बाद घर में किसी ने ठीक से खाना नहीं खाया है। बच्चों की हालत देखकर मेरा दिल फटा जा रहा है, पूरा घर सूना हो गया है।”
  • संरक्षण गृह से आंखों देखा हाल: जागृति महिला संगठन की अध्यक्ष आशा दलाल ने बताया कि काजल हर समय अपने दोनों बेटों की याद में रोती रहती हैं और भारी मानसिक तनाव में हैं। अधिकारियों की विशेष अनुमति मिलने पर कभी-कभी बच्चों को दूर से दिखाया जाता है, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिलती है। उन्हें सबसे बड़ा डर यह है कि अगर उन्हें निर्वासित (Deport) कर बांग्लादेश भेज दिया गया, तो वे अपने बच्चों को दोबारा कभी नहीं देख पाएंगी। साथ ही हिंदू धर्म अपनाने के कारण उन्हें बांग्लादेश में भी सुरक्षा का खतरा सता रहा है।

⚖️ हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई: संविधान के ‘अनुच्छेद 21’ का सहारा

तरुण पटेल अब अपनी पत्नी को बचाने के लिए हर दरवाजे पर गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने आणंद के स्थानीय सांसद मितेश पटेल से भी मदद मांगी है और मामले को लेकर गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

काजल की पैरवी कर रही उच्च न्यायालय की प्रख्यात वकील ज़ैनब सैयद ने बताया:

“हम अदालत के समक्ष भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देंगे। देश का संविधान यह मौलिक अधिकार न केवल भारतीय नागरिकों को, बल्कि भारत की धरती पर रह रहे हर एक इंसान को देता है। चूंकि काजल ने एक भारतीय नागरिक से शादी की है और वह कई वर्षों से शांतिपूर्वक एक गृहस्थ के रूप में यहां रह रही हैं, इसलिए परिस्थितियों और मानवीय साक्ष्यों को देखते हुए वे भारतीय नागरिकता की पात्र हो सकती हैं। हमारी पूरी कोशिश होगी कि इस परिवार को बिखरने से बचाया जाए और काजल को भारत की नागरिकता मिले।”

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *