‘काशी की गंगा-जमुनी तहज़ीब अमर रहे: ज्ञानवापी से जुड़े 20 साल पुराने केस में बड़ा फैसला; अदालत ने सभी 16 हिंदू-मुस्लिम आरोपियों को किया बरी, अंजुमन कमेटी ने दोनों पक्षों के लिए लड़ा था केस!’
वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े 20 साल पुराने मुकदमे में अदालत का बड़ा फैसला, सभी 16 हिंदू-मुस्लिम व्यापारी दोषमुक्त। वर्ष 2006 में मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी के साथ चेकिंग के नाम पर हुई अभद्रता के बाद दर्ज हुआ था केस। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने निभाई थी कौमी एकता की मिसाल, हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों की पैरवी के लिए खुद नियुक्त किया था वकील। संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा— "अमर रहे काशी की गंगा-जमुनी तहजीब"। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी से आज सांप्रदायिक सौहार्द और न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वर्ष 2006 में दर्ज हुए एक बेहद संवेदनशील और पुराने मुकदमे में आज (3 जून 2026 को) अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने इस मामले में नामजद सभी आरोपियों को पूरी तरह दोषमुक्त करार दिया है। इस मुकदमे की सबसे खास और ऐतिहासिक बात यह रही कि इसमें आरोपी बनाए गए 7 हिंदू व्यापारियों और 9 मुस्लिम व्यापारियों, दोनों ही पक्षों के मुकदमों का पूरा खर्च और कानूनी पैरवी ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था ‘अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी’ ने उठाई थी।
🚨 क्या था वर्ष 2006 का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद आज से लगभग 20 वर्ष पूर्व का है। ज्ञानवापी मस्जिद में जुमा (शुक्रवार) की नमाज़ पढ़ाने जाते समय मुफ्ती-ए-शहर इमाम व खतीब मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी साहब के साथ सुरक्षा चेकिंग के नाम पर कुछ सुरक्षाकर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया था।
- बिगड़ गई थी स्थिति: इस घटना के बाद राजनैतिक और सामाजिक सरगर्मी बढ़ गई और शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। हिंदू और मुसलमान दोनों पक्षों के लोग बेकाबू हो रहे थे।
- गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था केस: इस तनाव के इनपुट के बाद पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए शहर के प्रमुख लोगों और व्यापारियों पर कार्रवाई की थी। इसके नतीजे में 9 मुसलमानों तथा 7 हिंदुओं पर गंभीर धाराओं में मुकदमे कायम कर दिए गए थे।
🤝 अंजुमन कमेटी ने पेश की थी मिसाल, हिंदुओं के लिए भी खड़ा किया वकील
फैसला आने के बाद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने अपना एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि गलती किसी की थी और भुगतान निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ा था।
एसएम यासीन ने कहा:
“जब यह मुकदमा कायम हुआ, तो हमारी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने उसी समय यह ऐतिहासिक घोषणा की थी कि हम किसी एक पक्ष की नहीं, बल्कि इस केस में फंसे सभी हिंदू और मुसलमान भाइयों के मुकदमों की पैरवी खुद करेंगे। हिंदुओं में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रमुख लोग जैसे राजेंद्र तिवारी, गुलशन कपूर, शंकर गिरी, भानु मिश्रा आदि अभियुक्त बनाए गए थे। हमने उस समय नगर के मशहूर वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को इन सभी मुकदमों की पैरवी के लिए नियुक्त किया था।”
⚖️ 20 वर्षों का लंबा संघर्ष और एडवोकेट श्रीनाथ त्रिपाठी की मजबूत बहस
कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने आज अदालत से आए फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी और उनके सहयोगियों का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि एडवोकेट श्रीनाथ त्रिपाठी ने अदालत के सामने इन 20 वर्षों में बेहद मजबूती से बहस की और निर्दोषों का पक्ष रखा। तमाम हिंदू-मुसलमानों के बीच आपसी सद्भावना और भाईचारे को कायम रखने के लिए अंजुमन मसाजिद ने 20 वर्षों तक इस पूरी विधिक प्रक्रिया का सारा आर्थिक बोझ उठाया।
🕯️ जूनियर यासीन एडवोकेट को भी किया याद
आज दिनांक 3 जून 2026 को सभी अभियुक्तों के बरी होने के बाद एसएम यासीन ने सभी को बधाई दी। इस भावुक मौके पर उन्होंने अपने हमनामी (एक ही नाम वाले) श्रीनाथ त्रिपाठी के जूनियर यासीन एडवोकेट को भी याद किया, जिनका कुछ समय पूर्व एक सड़क हादसे (एक्सीडेंट) में दुखद देहांत हो गया था। उन्होंने कहा कि इस केस को तार्किक परिणति तक पहुंचाने में स्वर्गीय यासीन एडवोकेट की सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। अंत में उन्होंने संदेश दिया कि काशी की यह ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब हमेशा अमर रहे।












