‘खाकी पर लगा सबसे बड़ा दाग: 5000 करोड़ के “नकली दवा घोटाले” के आरोपी को बचाने के लिए IPS अफसर ने मांगी 3 करोड़ की रिश्वत; CBI ने भेजा समन, दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर पहले ही जेल में!’
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े ₹5000 करोड़ के पुडुचेरी नकली दवा घोटाले में सीबीआई का महा-ऐक्शन, जांच से राहत दिलाने के नाम पर ₹3 करोड़ की रिश्वत मांगने वाले हरियाणा कैडर के 2012 बैच के IPS अधिकारी को समन। आरोपी आईपीएस फिलहाल DGCA में रीजनल डायरेक्टर के पद पर है तैनात। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह सहित दो लोग ₹1 करोड़ के हवाला लेन-देन के साथ पहले ही गिरफ्तार। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

आदिल अहमद
नई दिल्ली (PNN24 News): ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा सूत्रों के हवाले से किए गए एक बहुत बड़े खुलासे के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक ऐसे इंटरनेशनल लेवल के ‘रिश्वतखोरी सिंडिकेट’ (Bribery Syndicate) का पर्दाफाश किया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर से लेकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक शीर्ष स्तर के अधिकारी की संलिप्तता सामने आई है। हरियाणा कैडर के 2012 बैच के एक आईपीएस अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने पुडुचेरी के कुख्यात ₹5,000 करोड़ के नकली दवा रैकेट के मास्टरमाइंड एन. राजा (N. Raja) को सीबीआई की एफआईआर से राहत दिलाने और रसूख का इस्तेमाल कर क्लोजर रिपोर्ट लगवाने के नाम पर ₹3 करोड़ की डील फिक्स की थी।
✈️ DGCA में रीजनल डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं आरोपी IPS
सीबीआई की जांच में नामजद किए गए आरोपी अधिकारी के रसूख और वर्तमान प्रोफाइल को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं:
- 2012 बैच के अफसर पर शिकंजा: आरोपी आईपीएस अधिकारी हरियाणा कैडर के 2012 बैच के हैं और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर भारत सरकार के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में रीजनल डायरेक्टर (Regional Director) के अति-महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं।
- सीबीआई की पूछताछ और समन: सीबीआई ने इस आईपीएस अधिकारी की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ने के बाद उनके संबंधित विभाग (DGCA/नागरिक उड्डयन मंत्रालय) को आधिकारिक रूप से पूरी रिपोर्ट भेज दी है, ताकि पूछताछ की प्रक्रिया में कोई प्रशासनिक अड़चन न आए। इस सिलसिले में अधिकारी को 12 जून 2026 को सीबीआई के दिल्ली स्थित एंटी-करप्शन विंग के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था।
🤝 दिल्ली के सीक्रेट मीटिंग रूम में तय हुआ था ₹3 करोड़ का सौदा
सीबीआई की जांच के अनुसार, इस महा-रिश्वतखोरी की पूरी पटकथा राजधानी दिल्ली के एक पॉश इलाके में 14 मई 2026 को हुई एक गुप्त बैठक के दौरान लिखी गई थी:
- रसूख का रौब: बैठक में आरोपी आईपीएस अधिकारी ने मुख्य आरोपी एन. राजा को भरोसा दिलाया था कि सीबीआई के शीर्ष निदेशकों और बड़े ओहदों पर बैठे सरकारी अधिकारियों के साथ उनके बेहद आत्मीय और घरेलू संबंध हैं। वे अपनी इस पहचान का फायदा उठाकर राजा का नाम केस डायरी से हमेशा के लिए गायब करवा देंगे।
- हवाला के जरिए ₹1 करोड़ का एडवांस: ₹3 करोड़ की इस कुल डील में से ₹1.5 करोड़ की राशि एडवांस के तौर पर तुरंत दी जानी तय हुई थी। आरोपी एन. राजा ने आनन-फानन में चेन्नई और दिल्ली के बड़े हवाला ऑपरेटरों के जरिए ₹1 करोड़ की पहली किस्त दिल्ली भिजवा दी थी।
👮 दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में सीबीआई की कार्रवाई केवल आईपीएस अफसर तक सीमित नहीं है, बल्कि कड़ियां जुड़ने पर दिल्ली पुलिस का एक रसूखदार इंस्पेक्टर भी सलाखों के पीछे पहुंच चुका है:
- 8 जून को दर्ज हुई थी FIR: सीबीआई ने 8 जून 2026 को मुख्य आरोपी एन. राजा, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह और राजकुमार नाम के एक बिचौलिए के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
- प्रभात नाम के शख्स को मिले पैसे: जांच में साबित हुआ कि गिरफ्तार इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह ने हवाला ऑपरेटर के जरिए ₹1 करोड़ की रकम रिसीव की थी और उसमें से बड़ी राशि ‘प्रभात’ नाम के एक शख्स को सौंप दी थी। यह प्रभात कोई और नहीं, बल्कि उक्त आरोपी आईपीएस अधिकारी का सबसे करीबी और राजदार (Handled) बताया जा रहा है। इंस्पेक्टर प्रदीप ने बचे हुए ₹25 लाख अपने पास रख लिए थे, जिसे सीबीआई ने छापेमारी के दौरान इंस्पेक्टर और राजकुमार के घर से रंगे हाथों बरामद किया है।
💊 क्या है ₹5,000 करोड़ का पुडुचेरी नकली दवा घोटाला?
गौरतलब है कि पिछले साल (2025) पुडुचेरी में स्थानीय पुलिस और सीबीआई-सीआईडी (CBI-CID) ने संयुक्त रूप से कई दवा फैक्ट्रियों और गोदामों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस दौरान भारी मात्रा में जानलेवा, नकली और मिलावटी जीवन रक्षक दवाइयां और टनों कच्चा माल जब्त किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आंकी गई कुल कीमत ₹5,000 करोड़ से अधिक थी।
इस रैकेट के पीछे जब पुडुचेरी के कई बड़े कद्दावर राजनेताओं, ड्रग कंट्रोलर ऑफिस के अफसरों और रसूखदारों के नाम सामने आने लगे, तो मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के गृह मंत्रालय ने इसी साल मार्च 2026 में पूरी जांच औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने मार्च में एन. राजा के खिलाफ नया रेगुलर केस दर्ज किया था। अब जैसे-जैसे इस मौत के सौदागर एन. राजा की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे देश के भ्रष्ट अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। सीबीआई अब इस बात की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है कि इस करोड़ों की रिश्वतखोरी के सिंडिकेट में दिल्ली और हरियाणा के और कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं।











