‘Tinder पर “राइट स्वाइप” कर फंसीं हरियाणा की महिला जज: ठग ने ऐंठे 52 लाख; मैडम ने लाज बचाने के लिए “घरेलू नौकरानी” को बनाया ढाल, दिल्ली कोर्ट ने लगाई भयंकर फटकार!’

नई दिल्ली/हरियाणा: टिंडर (Tinder) पर 'राइट स्वाइप' के चक्कर में फंसीं हरियाणा की महिला जज, जालसाज दीपक वत्स ने ठगे ₹52 लाख। बदनामी के डर से जज साहिबा ने अपनी 'हाउस हेल्प' के नाम से दर्ज कराई फर्जी एफआईआर। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने खोला राज, महिला जज को लगाई कड़ी फटकार— कहा, "न्याय की कुर्सी पर बैठने वालों का यह आचरण न्याय प्रणाली का मजाक है।" आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका खारिज।

महविश कुरैशी

नई दिल्ली/भोपाल (PNN24 News): न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी इसलिए बंधी होती है ताकि वह बिना किसी भेदभाव के सिर्फ सच और सबूतों के आधार पर फैसला कर सके। लेकिन जब न्याय की कुर्सी पर बैठने वाला ही कानून की आंखों में धूल झोंकने लगे, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक बेहद चौंकाने वाली विधिक रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer) डेटिंग ऐप ‘टिंडर’ पर एक शातिर ठग का शिकार हो गईं। इसके बाद उन्होंने खुद को आपराधिक जांच से बचाने के लिए अपनी घरेलू नौकरानी (House Help) के नाम का गलत इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह किया, जिसका पर्दाफाश अब देश की राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने कर दिया है।

📱 ‘Altruistic Joy’ नाम की फेक प्रोफाइल और ₹52 लाख का फ्रॉड

इस पूरे वाकये की शुरुआत तब हुई जब हरियाणा में तैनात उक्त महिला जज ने डेटिंग प्लेटफॉर्म ‘टिंडर’ (Tinder) पर अपनी असली पहचान छिपाकर ‘Altruistic Joy’ नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाई:

  • दोस्ती और प्रेमजाल: टिंडर पर स्क्रॉल करते हुए जज साहिबा ने दीपक वत्स नाम के एक शख्स को ‘राइट स्वाइप’ (Right Swipe) किया। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी दोस्ती और फिर प्रेम संबंध (Love Affair) तक पहुंच गई।
  • सट्टेबाजी के नाम पर ठगी: आरोपी दीपक वत्स ने महिला जज को अपने विश्वास में ले लिया और ऑनलाइन गेमिंग व सट्टेबाजी (Online Betting) में भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश करने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल ₹52,81,999 (52 लाख 81 हजार 999 रुपये) अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

🧹 खुद की बदनामी का डर; ‘बलि का बकरा’ बनी बेकसूर हाउस हेल्प

जब महिला जज को एहसास हुआ कि वे बुरी तरह हनीट्रैप और वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी हैं, तो कानून की मदद लेने के बजाय उन्हें अपनी सामाजिक छवि, लोकलाज और न्यायिक करियर के खत्म होने की चिंता सताने लगी। अपनी बदनामी छुपाने के लिए मैडम ने जो किया, वह बेहद शर्मनाक था:

  • नौकरानी के नाम पर FIR: महिला जज ने चालाकी दिखाते हुए खुद पीड़िता बनने के बजाय अपनी ‘हाउस हेल्प’ के सम्मान और अधिकारों को ताक पर रख दिया। उन्होंने दिल्ली पुलिस में पूरी शिकायत अपनी घरेलू सहायिका के नाम से दर्ज करवा दी, ताकि मुख्य जांच के केंद्र में उनका नाम न आए।
  • अदालती चपरासी का भी दुरुपयोग: इस जालसाजी की हद यहीं खत्म नहीं हुई। पूरे मामले में ₹52 लाख का ट्रांजैक्शन तो जज साहिबा के खातों से हुआ था, लेकिन ₹5 लाख का एक नकद (Cash) डिपॉजिट उन्होंने हरियाणा की अदालत में तैनात एक चपरासी (Peon) के जरिए सीधे बैंक में कराया। इस कैश को भी पुलिस की नजरों में नौकरानी का पैसा बताया गया था।

⚖️ पटियाला हाउस कोर्ट के जज सौरभ प्रताप सिंह ने बेनकाब किया सच

इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे का भंडाफोड़ तब हुआ, जब मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचा। एडिशनल सेशन जज (ASG) सौरभ प्रताप सिंह लालेर मुख्य आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका (Bail Petition) पर सुनवाई कर रहे थे:

  • कोर्ट की पैनी नजर: एएसजे लालेर ने केस डायरी और बैंक ट्रांजैक्शन की कड़ियों को देखते ही साफ कर दिया कि शिकायत भले ही एक गरीब हाउस हेल्प के नाम से है, लेकिन इस मामले की वास्तविक और मुख्य पीड़िता हरियाणा की वह महिला जज हैं, जिन्होंने अदालत के सामने तथ्यों को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया है।
  • महिला जज को कोर्ट की भयंकर फटकार: पटियाला हाउस कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए महिला ज्यूडिशियल ऑफिसर के आचरण की आलोचना की। अदालत ने अपने लिखित आदेश में कहा:

“हनीट्रैप या ऑनलाइन धोखाधड़ी में फंसना किसी भी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत रूप से शर्मनाक और पेशेवर तौर पर बेहद संवेदनशील हो सकता है। लेकिन, इस निजी असुविधा या डर के चलते एक आपराधिक जांच की अखंडता, निष्पक्षता और सच्चाई के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। कानून की नजर में एक आम नागरिक और एक जज दोनों बराबर हैं। जब दूसरों को न्याय देने वाली कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ही कानून का सामना करने के बजाय झूठ और प्रपंच का गलत रास्ता चुनता है, तो इससे पूरी न्याय प्रणाली और जांच तंत्र की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।”

❌ आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका खारिज

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी दीपक वत्स को किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया और उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसके पीछे ठोस कारण बताए:

  1. आरोपी दीपक वत्स पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा है।
  2. उसने फॉरेंसिक जांच के लिए अपने मोबाइल फोन का पासवर्ड बताने से इनकार कर दिया है।
  3. जांच में उसके बैंक खातों के भीतर जज साहिबा से ठगे गए ₹52 लाख से अधिक के अवैध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता और पुख्ता साक्ष्य मिले हैं।

विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद अब हरियाणा हाईकोर्ट के प्रशासनिक विभाग द्वारा आरोपी महिला जज के खिलाफ विभागीय जांच और सस्पेंशन (Suspension) जैसी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि एक न्यायिक अधिकारी से हमेशा उच्च नैतिक और विधिक आचरण की उम्मीद की जाती है।

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