‘राज्यसभा से पत्ता कटने के बाद मीनाक्षी नटराजन को हैदराबाद कोर्ट से बड़ी राहत; मजिस्ट्रेट ने कहा— “विधायकों पर ऐक्शन का हमारे पास अधिकार नहीं”, वापस लौटाई शिकायत!’
हैदराबाद/दिल्ली: राज्यसभा नामांकन रद्द होने के विवाद के बीच मीनाक्षी नटराजन को हैदराबाद कोर्ट से बड़ी तकनीकी राहत। चतुर्थ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. स्वर्णलता की कोर्ट ने क्षेत्राधिकार न होने का हवाला देकर शिकायतकर्ता की याचिका लौटाई। सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन बहाली की याचिका पर राहत देने से किया इनकार; चुनाव याचिका दायर करने की दी छूट। टीपीसीसी अध्यक्ष महेश गौड़ ने पीएमओ और भाजपा पर लगाया जानकारी लीक करने का आरोप, होगी सरकारी जांच। पढ़ें PNN24 की विस्तृत विधिक रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
हैडराबाद/नई दिल्ली (PNN24 News): कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन को रद्द कराने का आधार बनी हैदराबाद की विवादित निजी शिकायत (Private Complaint) को अदालत ने तकनीकी मोर्चे पर खारिज जैसी स्थिति में ला दिया है। हैदराबाद की चतुर्थ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. स्वर्णलता की अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास इस हाई-प्रोफाइल मामले पर संज्ञान लेने का कोई विधिक अधिकार नहीं है। लेकिन इस विधिक राहत के बावजूद कांग्रेस के हाथ से मध्य प्रदेश की वह प्रतिष्ठित राज्यसभा सीट लगभग निकल चुकी है, जिस पर नटराजन ने पर्चा भरा था।
⚖️ क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का पेच: क्यों लौटी शिकायत?
शुक्रवार 12 जून 2026 को मामले की आपातकालीन सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन और अन्य प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता रवि शंकर जंध्याला ने अदालत के सामने अकाट्य विधिक दलीलें पेश कीं:
- विधायकों पर सुनवाई का अधिकार नहीं: अधिवक्ता जंध्याला ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में नामजद कुल 7 प्रतिवादियों में से 4 वर्तमान में मौजूदा विधायक (Sitting MLAs) हैं। भारतीय न्यायशास्त्र के स्थापित नियमों के तहत, स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट (Special MP/MLA Court) के अलावा किसी सामान्य मजिस्ट्रेट अदालत को मौजूदा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ऐसे मामलों में संज्ञान लेने का विधिक क्षेत्राधिकार नहीं है।
- अदालत का फैसला: इस दलील के समर्थन में जैसे ही बचाव पक्ष ने एक विधिक मेमो दाखिल किया, मजिस्ट्रेट ए. स्वर्णलता ने तत्काल संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता महिला की याचिका को यह कहते हुए वापस लौटा दिया कि वे ‘उचित मंच (Appropriate Forum) के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करें।’
🏛️ सुप्रीम कोर्ट से भी झटका; अब ‘चुनाव याचिका’ ही एकमात्र रास्ता
एक तरफ जहां हैदराबाद की निचली अदालत ने याचिका लौटाई, वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार (12 जून) को ही देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) से कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को तुरंत पलटने या अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को भविष्य के लिए विधिक रास्ता बताते हुए कहा कि वे इस पूरी चयन प्रक्रिया और नामांकन खारिज होने के खिलाफ वैधानिक ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) दायर कर उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं।
🛑 क्या है पूरा विवाद और महिला की ‘प्रोटेस्ट पिटीशन’?
भारतीय कानून के तहत शिकायतकर्ता महिला (जो खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताती हैं) की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी गई है। इस विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है:
- यौन उत्पीड़न के आरोप: महिला ने नारायणपेट जिले के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के. शिवा कुमार रेड्डी पर यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
- पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट: हैदराबाद के पंजागुट्टा, उस्मानिया विश्वविद्यालय और बेंगलुरु के कब्बन पार्क पुलिस थानों ने करीब 22 महीने पहले ही इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर ‘क्लोजर रिपोर्ट’ (मामला बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल कर दी थी।
- नटराजन का नाम क्यों आया? महिला का आरोप था कि कांग्रेस आलाकमान और मीनाक्षी नटराजन ने शिकायत के बावजूद आरोपी शिवा कुमार रेड्डी को पार्टी से निलंबित नहीं किया, बल्कि वे आधिकारिक मंचों पर नारायणपेट की विधायक पर्णिका रेड्डी (रेड्डी की भतीजी) के साथ दिखते रहे। इसी क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ महिला ने अगस्त 2025 में कोर्ट में एक प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दायर की थी, जिसमें कोर्ट ने नियमित प्रक्रिया के तहत समन जारी किए थे।
💼 “चुनावी हलफनामे में समन की जानकारी अनिवार्य नहीं”— रेवंत रेड्डी
इस पूरे मामले में तीन दिन पहले तब राजनीतिक बवंडर आ गया जब रिटर्निंग ऑफिसर ने इस लंबित शिकायत को छिपाने (हलफनामे में दर्ज न करने) के आधार पर नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया। इस पर नई दिल्ली में मौजूद तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अपनी पार्टी का कड़ा बचाव किया:
“दो व्यक्तियों के आपसी विवाद को सुलझाने के प्रयास में मीनाक्षी नटराजन का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। चुनाव आयोग के हलफनामे (Affidavit) में ऐसा कोई कॉलम या नियम नहीं होता, जहां अदालत द्वारा जारी किसी सामान्य समन की जानकारी देना अनिवार्य हो। उम्मीदवारों को केवल अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों (FIR/Crime Number) का विवरण देना होता है। नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज ही नहीं है।”
🕵️ “पीएमओ और बीजेपी की साजिश”; टीपीसीसी चीफ ने दी जांच की चेतावनी
इधर हैदराबाद में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने शनिवार 13 जून 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार की गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया।
- सीधे पीएमओ पर आरोप: महेश कुमार गौड़ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ न तो कोई क्राइम नंबर था और न ही कोई आपराधिक मामला। इसके बावजूद कोर्ट के भीतर चल रही संज्ञान की गोपनीय विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी बाहर निकाली गई। इसके पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की भूमिका है ताकि मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को अनैतिक तरीके से कब्जाया जा सके।”
- लीक करने वालों पर होगी कार्रवाई: टीपीसीसी चीफ ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार इस बात की उच्च स्तरीय जांच कराएगी कि अदालत और प्रशासनिक स्तर से यह विधिक डेटा विपक्षी दलों तक कैसे और किस माध्यम से लीक हुआ। जानकारी लीक करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी ऐक्शन लिया जाएगा।
दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता महिला ने ‘द वायर’ से बातचीत में आरोप लगाया कि शुक्रवार को कोर्ट रूम में कांग्रेस समर्थित करीब 50 वकीलों ने पहुंचकर उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। महिला ने यह भी साफ किया कि वह हार नहीं मानेंगी और उचित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में सोमवार को के. शिवा कुमार रेड्डी और अन्य के खिलाफ नई विधिक याचिका दायर करेंगी।










