‘पश्चिम एशिया में थमीं बंदूकें: इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू; लागू होने से ठीक पहले भारी बमबारी में 18 की मौत, IDF के 4 सैनिक भी ढेर’
पश्चिम एशिया से बड़ी खबर: इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू, अमेरिकी अधिकारी ने की बीबीसी से पुष्टि। शुक्रवार शाम 4 बजे से थमीं बंदूकें। युद्धविराम से ठीक पहले इसराइली हमलों में 18 लेबनानी नागरिकों और हिज़्बुल्लाह के दर्जनों लड़ाकों की मौत, इसराइल के भी 4 सैनिक मारे गए। पढ़ें PNN24 की अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण रिपोर्ट।

आफ़ताब फारुकी
PNN24 News: महीनों से जारी विनाशकारी युद्ध के बाद इसराइल और लेबनान के हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम (Ceasefire) पर पूर्ण सहमति बन गई है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी (BBC) से विशेष बातचीत में इस ऐतिहासिक युद्धविराम की पुष्टि की है। यह समझौता शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे से जमीनी स्तर पर प्रभावी हो गया है। हालांकि, युद्धविराम लागू होने के आखिरी मिनटों तक दोनों ओर से भीषण गोलाबारी और सैन्य कार्रवाई देखने को मिली।
📢 “युद्धविराम में हैं, पर ज़रूरत पड़ी तो दोबारा लड़ेंगे” — इसराइली सेना
समझौता लागू होने के बाद इसराइली सेना (IDF) के प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डेफ़्रिन ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा:
“हम इस समय युद्धविराम की स्थिति में हैं। युद्धविराम का पालन किया जा रहा है, लेकिन यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ या ज़रूरत पड़ी, तो इसराइल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए दोबारा लड़ाई जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
💥 आखिरी रात बरपा कहर: दोनों पक्षों को भारी नुकसान
युद्धविराम के ठीक पहले की रात दोनों देशों की सीमा पर भारी तबाही लेकर आई:
- लेबनान में तबाही: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, युद्धविराम लागू होने से कुछ घंटे पहले रातभर हुए इसराइली हवाई हमलों ने दक्षिणी लेबनान को दहला दिया, जिसमें कम से कम 18 आम लोगों की मौत हो गई।
- 80 ठिकानों पर बमबारी: इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (IDF) ने दावा किया कि उसने ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह से जुड़े 80 रणनीतिक ठिकानों को हवाई हमलों में नेस्तनाबूद कर दिया, जिसमें हिज़्बुल्लाह के ‘दर्जनों’ सक्रिय सदस्य मारे गए।
- इसराइल को भी झटका: हिज़्बुल्लाह के पलटवार में इसराइली सेना को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। आईडीएफ ने स्वीकार किया है कि इस अंतिम झड़प में उसके 4 सैनिक भी मारे गए हैं।
🤝 ‘यूएस-ईरान पीस डील’ का असर; ट्रंप और वेंस का दबाव काम आया
वैश्विक रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस युद्धविराम की पटकथा असल में इस हफ्ते की शुरुआत में ही लिख दी गई थी, जब अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
वैश्विक दबाव: उस समझौते की मुख्य शर्तों में लेबनान फ्रंट समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने की अपील शामिल थी।
नेतन्याहू को दोटूक: इसराइल पर युद्ध रोकने का अमेरिकी दबाव साफ देखा जा रहा था। गुरुवार को ही अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने लेबनान में लगातार हो रहे हमलों को लेकर इसराइल को कड़ी फटकार (झिड़की) लगाई थी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के अड़ियल रुख को लेकर बेहद तीखे तेवर दिखा चुके थे। आखिरकार अमेरिकी दबाव के आगे इसराइल को युद्धविराम के लिए राजी होना पड़ा।










