‘बंगाल में चुनावी सुलगती आग: कोलकाता में 4000 EVM-VVPAT जलकर राख; दमकल मंत्री को “साजिश” का शक, TMC बोली— “सबूत मिटाने की सोची-समझी डकैती!”‘
पश्चिम बंगाल सियासत: चुनाव नतीजों के विवाद के बीच कोलकाता के अलीपुर में बड़ा अग्निकांड। दक्षिण 24-परगना जिला परिषद भवन में आग लगने से 10 विधानसभा क्षेत्रों की 4,000 EVM और VVPAT जलकर खाक। दमकल मंत्री कौशिक चौधरी ने 'सेबोटेज' (साजिश) की जताई आशंका। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और प्रवक्ता कुणाल घोष ने उठाए गंभीर सवाल। कोलकाता पुलिस की 4 सदस्यीय एसआईटी ने शुरू की जांच। पढ़ें PNN24 की विशेष विविधा रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
कोलकाता (PNN24 News): पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों पर मचा बवाल अभी थमा भी नहीं था कि कोलकाता के अलीपुर इलाके से एक ऐसी विस्मयकारी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश की राजनीति और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। बीते 10 जून की सुबह दक्षिण 24-परगना जिला परिषद की दस मंजिला इमारत की आठवीं और नौवीं मंजिल पर स्थित चुनाव कार्यालय में लगी ‘रहस्यमयी’ आग ने अप्रैल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव की 4,000 से अधिक कंट्रोल यूनिट, बैलट यूनिट और वीवीपैट मशीनों को जलाकर कोयला बना दिया है। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है।
🏢 चौथी-छठी मंजिल छोड़ सीधे आठवीं पर कैसे पहुंची आग? मंत्री को ‘सेबोटेज’ का शक
पश्चिम बंगाल के दमकल और आपदा प्रबंधन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने घटनास्थल का विस्तृत मुआयना करने के बाद पत्रकारों के सामने जो खुलासे किए, उसने इस हादसे को पूरी तरह एक प्रशासनिक और राजनीतिक साजिश की ओर मोड़ दिया है:
- असामान्य आग का पैटर्न: मंत्री ने बताया कि चश्मदीदों और शुरुआती जांच के मुताबिक, आग सबसे पहले सुबह 9:30 बजे इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर देखी गई थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि यह आग चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना सीधे छलांग मारकर सातवीं, आठवीं, नौवीं और दसवीं मंजिल तक कैसे पहुंच गई?
- लीपापोती या तोड़फोड़? दमकल मंत्री कौशिक चौधरी ने साफ तौर पर कहा, “यह कोई सामान्य आग नजर नहीं आती। हम इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि यह कहीं कोई तोड़-फोड़ (Sabotage) या सबूतों को नष्ट करने की कार्रवाई तो नहीं थी। सरकार किसी भी अंतिम विधिक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।”
⚡ “क्या यह लोकतंत्र के सबूत मिटाने की कोशिश है?”— तृणमूल और कांग्रेस का तीखा हमला
चुनावी नतीजों पर शुरुआत से ही धांधली का आरोप लगा रहीं टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के बाद पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस अग्निकांड पर सीधे चुनाव आयोग और विपक्षी ताकतों को लपेटे में लिया है:
“क्या यह महज एक सामान्य शॉर्ट-सर्किट का हादसा है या फिर लोकतंत्र के साथ की गई छेड़छाड़ के बाद बेहद अहम और निर्णायक विधिक सबूतों को गायब करने की एक सुनियोजित और क्रूर कोशिश है? आखिर ये आग लगी कैसे?”
तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर आग का वीडियो पोस्ट करते हुए उन सीटों की सूची जारी की है जिनकी किस्मत इन मशीनों में बंद थी। टीएमसी के मुताबिक, डायमंड हार्बर सबडिवीजन के तहत आने वाली कई महत्वपूर्ण सीटों के अलावा कस्बा, जादवपुर, बेहला पूर्व, बेहला पश्चिम, मटियाबुर्ज़ और सातगाछिया विधानसभा क्षेत्रों की वोटिंग मशीनें इस आग में राख हुई हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इसे गंभीर विधिक चूक बताते हुए इस पूरे अग्निकांड की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।
🕵️♂️ पुलिस कमिश्नरेट का कड़ा पहरा; एसीपी सुखेंदु मुखर्जी की अगुवाई में ४ सदस्यीय SIT गठित
मामले की गंभीरता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय राजनीतिक दबाव को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने दक्षिण 24-परगना जिला प्रशासन की शिकायत पर अलीपुर थाने में एक आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इसके साथ ही, मामले की परतें खोलने के लिए 4 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर उसे तुरंत कमान सौंप दी गई है।
इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी (SIT) में शामिल अधिकारी:
- सुखेंदु मुखर्जी (सहायक पुलिस आयुक्त – ACP): टीम के प्रमुख, जो पूरी विधिक जांच का नेतृत्व कर रहे हैं।
- हीरक दलपति (इंस्पेक्टर, खुफिया विभाग): डिजिटल और मानवीय खुफिया इनपुट्स खंगालने की जिम्मेदारी।
- अर्पण दास (इंस्पेक्टर): घटनास्थल और प्रशासनिक सुरक्षा कमियों की विधिक जांच।
- सुमन घोष (सब-सिस्पेक्टर): फोरेंसिक और चश्मदीदों के बयान दर्ज करने की जिम्मेदारी।
इस टीम को निर्देश दिया गया है कि वे आग लगने के प्राथमिक कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच के साथ-साथ राज्य सरकार के अन्य दफ्तरों को हुए नुकसान का भी वित्तीय फॉरेंसिक आकलन करें। गौरतलब है कि जिस इमारत में यह आग लगी, वहां टीएमसी के गिरफ्तार नेता और फाल्टा सीट से उम्मीदवार जहांगीर खान (जो जिला परिषद के अध्यक्ष थे) का भी दफ्तर मौजूद था।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इस घटना में गहरी साजिश की आशंका को खारिज नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना की टाइमिंग बेहद संवेदनशील है; चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी के बीच 4,000 ईवीएम का इस तरह जल जाना, आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक हिंसक और कानूनी मुकदमों के भंवर में धकेल सकता है।










