‘नर्मदापुरम “मॉब लिंचिंग” में ऐतिहासिक इंसाफ: 14 गो-रक्षकों को आखिरी सांस तक जेल; अदालत के फैसले के बाद भारी बवाल, पुलिस वैन के आगे लेटे परिजन!’
एमपी ब्रेकिंग: नर्मदापुरम के सिवनी मालवा मॉब लिंचिंग केस में बड़ा फैसला, एडीजे तबस्सुम खान की कोर्ट ने 14 गो-रक्षकों को सुनाई उम्रकैद की सजा। साल 2022 में अमरावती के नाज़िर अहमद की पीट-पीटकर हुई थी हत्या। फैसले के बाद कोर्ट परिसर में भारी ड्रामा, पुलिस वाहन के आगे लेटे दोषियों के परिजन, पुलिस से धक्का-मुक्की। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी विधिक रिपोर्ट।

तारिक खान
नर्मदापुरम/सिवनी मालवा (PNN24 News): “कानून को हाथ में लेने वालों का अंजाम सिर्फ सलाखें हैं”— मध्य प्रदेश की एक जिला अदालत ने इस बात को अपने कड़े फैसले से एक बार फिर साबित कर दिया है। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में साल 2022 में गो-तस्करी के महज शक के आधार पर भीड़ द्वारा की गई एक युवक की निर्मम हत्या (मॉब लिंचिंग) के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) तबस्सुम खान की अदालत ने सभी 14 आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की है।
⚖️ जज तबस्सुम खान की कोर्ट का कड़ा फैसला; इन धाराओं में पाए गए दोषी
शुक्रवार को खचाखच भरे कोर्ट रूम में इस बहुचर्चित मामले की अंतिम सुनवाई हुई। एडीजे तबस्सुम खान ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए चश्मदीद गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और मौके के वीडियो फुटेज को अकाट्य साक्ष्य मानते हुए 14 अभियुक्तों को निम्नलिखित धाराओं में मुजरिम करार दिया:
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संगीन धाराएं: कोर्ट ने सभी 14 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 147, 148 (बलवा/दंगा भड़काना) और 341 (गलत तरीके से रास्ता रोकना) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।
🚔 फैसले के बाद कोर्ट परिसर में ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’; गाड़ी के आगे लेटे परिजन
जैसे ही अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, कोर्ट परिसर के भीतर और बाहर मौजूद उनके परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और वहां स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई:
- पुलिस वाहन का घेराव: जब पुलिस की वैन सभी 14 दोषियों को जेल भेजने के लिए कोर्ट परिसर से निकलने लगी, तो दोषियों की मां, पत्नियां और रिश्तेदार चीखते-चिल्लाते हुए पुलिस की गाड़ी के आगे आकर लेट गए।
- पुलिस से धक्का-मुक्की: परिजनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वाहन को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और आक्रोशित महिलाओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया, जिसने सूझबूझ और आंशिक बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया और वैन का रास्ता साफ कराकर दोषियों को केंद्रीय जेल भिजवाया।
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परिजनों की दलील: दोषियों के परिजनों का रो-रोकर दावा था कि उनके बच्चे कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं, वे तो केवल गो-सेवा के पवित्र उद्देश्य से ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंचे थे। उनके मुताबिक, पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से फंसाया है और वे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट (जबलपुर) में अपील करेंगे।
सड़क पर 50-60 लोगों की उग्र भीड़; क्या था पूरा खूनी मामला?
यह पूरा जघन्य घटनाक्रम अगस्त 2022 का है, जिसने तत्कालीन शिवराज सरकार के दौरान प्रशासनिक सुरक्षा पर कई सवाल खड़े किए थे:
- मवेशियों से लदा था ट्रक: महाराष्ट्र के अमरावती का रहने वाला नाज़िर अहमद अपने दो साथियों (जिसमें ट्रक चालक शेख लाला भी शामिल था) के साथ एक ट्रक में करीब 30 दुधारू मवेशियों को लादकर अमरावती की तरफ जा रहा था।
- बराखड़ गांव के पास घेराबंदी: जैसे ही ट्रक सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास पहुंचा, खुद को ‘गो-रक्षक’ बताने वाले स्थानीय ग्रामीणों और दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं की उग्र भीड़ ने ट्रक के आगे अपनी गाड़ियां अड़ाकर उसे जबरन रुकवा लिया।
- बिना पूछे लाठियों से हमला: घायल ट्रक चालक शेख लाला ने पुलिस को दिए अपने मुख्य बयान में बताया था कि सड़क पर अचानक 50 से 60 लोगों की हिंसक भीड़ इकट्ठा हो गई थी। भीड़ ने ट्रक रुकवाते ही बिना कोई पूछताछ किए या वध के दस्तावेज देखे, तीनों को केबिन से खींच लिया और लाठी-डंडों व लोहे की रॉड से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
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तड़पकर हुई मौत: हमलावर भीड़ तीनों पीड़ितों को तब तक सरेआम सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटती रही, जब तक कि वे अचेत होकर गिर नहीं गए। बाद में सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने लहूलुहान हालत में तीनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां गंभीर आंतरिक चोटों और अत्यधिक खून बह जाने के कारण नाज़िर अहमद की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इस घटना का एक खौफनाक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें भीड़ पीड़ितों पर कहर बरपाती दिख रही थी, जबकि कुछ स्थानीय संभ्रांत लोगों ने बीच-बचाव कर बाकी दो लोगों को सुरक्षित बचा लिया था, जो इस केस में मुख्य सरकारी गवाह बने।











