‘मणिपुर में फिर बढ़ा महा-तनाव: 14 कुकी बंधकों की रिहाई के ठीक अगले दिन मिले 6 लापता नगा नागरिकों के शव; 450 जवानों के महा-अभियान के बाद बरामदगी, हाई अलर्ट!’
मणिपुर: कुकी बंधकों की रिहाई के अगले ही दिन मची सनसनी, कांगपोकपी में लापता 6 नगा लोगों के शव बरामद। 13 मई को लेइलोन वैफेई से कथित तौर पर किया गया था अगवा। मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के 450 जवानों ने चलाया 24 घंटे का सर्च ऑपरेशन। यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) ने जताया भारी आक्रोश, सीमावर्ती गांवों में रेड अलर्ट। पढ़ें PNN24 की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
इम्फाल (PNN24 News): पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा और गहरा झटका लगा है। राज्य के कांगपोकपी जिले के खारम वैफेई गांव के पास से बुधवार को पुलिस ने कई दिनों से लापता छह नगा नागरिकों के शव क्षत-विक्षत हालत में बरामद किए हैं। यह बरामदगी उस वक्त हुई है जब ठीक एक दिन पहले (मंगलवार को) नगा समुदाय के संगठनों ने सद्भावना के तौर पर बंधक बनाए गए 14 कुकी नागरिकों को सुरक्षित रिहा किया था। नगा नागरिकों की हत्या की पुष्टि होने के बाद से मणिपुर के सीमावर्ती और पहाड़ी गांवों में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
🐕 450 जवानों और स्निफर डॉग्स का 24 घंटे का महा-अभियान
मणिपुर पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन शवों को ढूंढने के लिए सुरक्षाबलों ने एक व्यापक और संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया था:
- चलाया गया बड़ा सर्च ऑपरेशन: मामले की गंभीरता को देखते हुए मणिपुर पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। इस खोजी अभियान में स्निफर डॉग्स (खोजी कुत्तों) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों को भी शामिल किया गया था।
- खारम वैफेई के पास मिले शव: लगभग 24 घंटे तक लगातार चले इस बेहद सघन और जोखिम भरे तलाशी अभियान के बाद बुधवार दोपहर को कांगपोकपी ज़िले के खारम वैफेई गांव के पास के जंगलों से छह लोगों के शव बरामद कर लिए गए।
- 13 मई से थे लापता: शुरुआती शिनाख्त के आधार पर पुलिस का मानना है कि मृतक वे ही अभागे नगा नागरिक हैं, जिन्हें 13 मई 2026 को हथियारबंद उपद्रवियों ने लेइलोन वैफेई इलाके से बंधक बना लिया था।
🤝 नगा काउंसिल ने दिखाई थी उदारता, बदले में मिलीं लाशें
इस दुखद घटनाक्रम के पीछे बंधक संकट और समुदायों के बीच चल रही आपसी बातचीत का एक संवेदनशील पहलू जुड़ा हुआ था:
- 48 नागरिकों का हुआ था अपहरण: दरअसल, मई महीने की शुरुआत में चर्च के तीन प्रमुख पादरियों/नेताओं की नृशंस हत्या के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में हालात बेकाबू हो गए थे। 13 मई को हथियारबंद समूहों ने दोनों पक्षों (कुकी और नगा) के कम से कम 48 नागरिकों को बंधक बना लिया था। इनमें से 28 लोगों को पुलिस ने 15 मई को ही छुड़ा लिया था।
- UNC ने की थी अपील: नगा समुदाय के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) ने बैपटिस्ट वर्ल्ड कम्युनिटी, नगा चर्चों और विभिन्न नागरिक संगठनों की भावुक अपील पर मंगलवार को अपनी हिरासत में लिए गए 14 कुकी बंधकों को पूरी तरह सुरक्षित और ससम्मान रिहा कर दिया था।
- सरकार से मांगा था आश्वासन: कुकी नागरिकों को छोड़ते समय यूनाइटेड नगा काउंसिल ने राज्य और केंद्र सरकार से यह कड़ा आश्वासन मांगा था कि कुकी समुदाय के पास बंधक बनाकर रखे गए उनके 6 लापता नगा नागरिकों को भी हर हाल में सुरक्षित वापस लाया जाएगा। लेकिन बुधवार को उन सभी के शव मिलने से नगा समुदाय स्तब्ध और आक्रोशित है।
⚠️ उखरुल से शुरू हुई थी नगा-कुकी हिंसा; गांवों में रेड अलर्ट
मणिपुर में पिछले साल से चल रही मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच, इसी साल फरवरी 2026 से तांगखुल नगा और कुकी समुदायों के बीच भी एक नया और खूनी मोर्चा खुल गया है।
- उखरुल से भड़की आग: इस नई हिंसा की शुरुआत नगा बहुल उखरुल ज़िले से हुई थी, जिसने देखते ही देखते आसपास के कई पहाड़ी जिलों की कानून व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
- सुरक्षाबल मुस्तैद: छह नगा नागरिकों की मौत की खबर फैलते ही दोनों समुदायों के मिक्स पापुलेशन वाले सीमावर्ती गांवों में हिंसक झड़पें होने की आशंका बढ़ गई है। मणिपुर पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के लिए भेज दिया है। साथ ही, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात कर ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया गया है।










