‘वाराणसी: “रेलवे बाद में आई, मस्जिद पहले से है!”— मस्जिद गंज शहीदा पर रेलवे के बुल्डोजर एक्शन के नोटिस के खिलाफ DM से मिली इंतेजामिया कमेटी; मिला बड़ा आश्वासन’

वाराणसी ब्रेकिंग: मस्जिद गंज शहीदा को हटाने के रेलवे के नोटिस के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन। कमेटी का दावा— काशी स्टेशन और रेलवे पुल बनने से पहले (1883) से मौजूद है मस्जिद; नगर निगम में दर्ज है भवन संख्या A36/4। डीएम ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी

वाराणसी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में एक बार फिर एक मस्जिद के अस्तित्व और उसकी जमीन को लेकर कानूनी व प्रशासनिक रार शुरू हो गई है। मामला काशी स्टेशन के समीप स्थित मस्जिद गंज शहीदा का है, जिसे रेलवे प्रशासन ने ‘अवैध अतिक्रमण’ बताते हुए ध्वस्त करने का अल्टीमेटम दिया है। इस नोटिस के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और इस पूरी कार्रवाई को रेलवे की ‘बदनीयती’ करार दिया।

🛑 रेलवे का नोटिस: 20 जून 2026 को ध्वस्तीकरण की चेतावनी

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अनुसार, पिछले दिनों रेलवे प्रशासन ने मस्जिद गंज शहीदा की दीवार पर एक कथित नोटिस चस्पा किया था।

  • रेलवे का दावा: नोटिस में उल्लेख है कि यह मस्जिद रेलवे की मालिकाना हक वाली भूमि पर अवैध रूप से बनी है।
  • अदालती आदेश का हवाला: रेलवे ने दावा किया है कि इस भूमि से संबंधित वाद संख्या 1174/1991 (अंजुमन इंतेजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) को माननीय न्यायालय द्वारा 28 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया है।
  • डेडलाइन: इसी आदेश के आधार पर रेलवे प्रशासन ने 20 जून 2026 तक मस्जिद को स्वेच्छा से हटाने को कहा है, ऐसा न करने पर रेलवे ने इसे ध्वस्त (Demolish) करने की चेतावनी दी है।

🏢 नगर निगम में दर्ज है भवन संख्या; इंतेजामिया ने दी यह दलील

जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्रक में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने रेलवे के दावों को सिरे से खारिज करते हुए मजबूत दस्तावेजी सबूत पेश किए हैं:

  • नगर निगम का रिकॉर्ड: कमेटी के मुताबिक, उक्त मस्जिद गंज शहीदा का नगर निगम वाराणसी में बकायदा भवन संख्या ए36/4 (A36/4) दर्ज है और इस पर टैक्स आदि की प्रक्रिया होती रही है।
  • खारिज वाद का सच: कमेटी ने स्पष्ट किया कि जिस वाद संख्या 1174/1991 के खारिज होने की बात रेलवे कह रहा है, वह दोनों पक्षों की अनुपस्थिति (Non-appearance) के कारण खारिज हुआ था। इसके अलावा, यह वाद खुद मस्जिद के ढांचे के लिए नहीं, बल्कि मस्जिद के बाहर पूर्व दिशा में स्थित एक जमीन के टुकड़े को लेकर दाखिल किया गया था।

🕰️ ‘काशी स्टेशन और गंगा पुल से भी पुरानी है मस्जिद’

ज्ञापन में इतिहास और राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) का हवाला देते हुए कमेटी ने एक बड़ा तार्किक दावा पेश किया है:

  • 1883 का बंदोबस्ती नक्शा: मस्जिद का वजूद साल 1883-1884 के सरकारी बंदोबस्ती नक्शे में साफ दिखाई देता है। यह वह समय था जब वाराणसी में ‘काशी स्टेशन’ का वजूद तक नहीं था।
  • 1887 में बना रेल पुल: गंगा नदी पर मालवीय पुल (डफरिन ब्रिज) का निर्माण साल 1887 में पूरा हुआ था, जिसके बाद ही इस पार ट्रेनें आईं।
  • कमेटी का सवाल: इंतेजामिया कमेटी ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब दस्तावेजी रूप से यह साफ है कि रेल बाद में आई और मस्जिद पहले से वहां मौजूद थी, तो वह जमीन पहले ही रेलवे की कैसे हो सकती है? अगर इन कागजातों की निष्पक्ष जांच हो, तो रेलवे की बदनीयती खुलकर सामने आ जाएगी।

🤝 मौलाना बातिन नोमानी और एस.एम. यासीन पहुंचे DM दफ्तर; मिला आश्वासन

जिलाधिकारी से भेंट करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के प्रमुख पदाधिकारी मौलाना अब्दुल बाकी, मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी और संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए एस.एम. यासीन ने बताया:

“जिलाधिकारी वाराणसी ने हमारी सभी दलीलों और दस्तावेजों को बहुत ही तसल्ली से सुना है। उन्होंने हमें पूरा भरोसा दिलाया है कि राजस्व और रेलवे के दस्तावेजों के आधार पर मामले की बिल्कुल निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होगी। मस्जिद को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।”

आगे की राह: एस.एम. यासीन ने साफ किया कि प्रशासनिक स्तर पर बात रखने के साथ-साथ कमेटी इस मामले में मजबूती से अदालती और कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है। जिलाधिकारी से मिले इस सकारात्मक आश्वासन ने कमेटी का हौसला बढ़ाया है और उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट और प्रशासन से उन्हें पूरा इंसाफ मिलेगा।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *