‘बिल्थरारोड में बंदर का खौफ: तेलमा जमालुद्दीनपुर में २० दिनों से उत्पात, दर्जन भर लोगों को काटा; गर्मी में भी घरों में कैद रहने को मजबूर ग्रामीण’
बलिया जन-समस्या: बिल्थरारोड के उभांव थाना अंतर्गत तेलमा जमालुद्दीनपुर गांव में पिछले 20 दिनों से एक खूंखार बंदर का आतंक। करीब एक दर्जन लोगों को बना चुका है शिकार, सुभावती देवी और कमलावती देवी अस्पताल में भर्ती। उमस भरी गर्मी में भी छतों पर जाने से डर रहे लोग, वन विभाग से बंदर को पकड़ने की गुहार। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

उमेश गुप्ता
बिल्थरारोड/बलिया (PNN24 News): जनपद के बिल्थरारोड तहसील अंतर्गत उभांव थाना क्षेत्र के तेलमा जमालुद्दीनपुर गांव में इन दिनों एक उत्पाती बंदर ग्रामीणों के लिए आफत का सबब बन गया है। इस बंदर के हिंसक व्यवहार और आतंक के कारण पूरे गांव में दहशत का माहौल है। रिकॉर्डतोड़ गर्मी और उमस के इस मौसम में भी लोग डर के मारे अपनी छतों पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले तीन हफ्तों से प्रशासन और वन विभाग को सूचित करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
🩸 दो बुजुर्ग महिलाएं गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बंदर अब तक गांव के करीब एक दर्जन (12) लोगों को काटकर लहूलुहान कर चुका है। हाल ही में इसके हमले का शिकार गांव की दो बुजुर्ग महिलाएं हुईं:
- सुभावती देवी (60 वर्ष) और कमलावती देवी (76 वर्ष) पर बंदर ने उस वक्त अचानक हमला कर दिया जब वे घर के पास थीं।
- बंदर के काटने और नोचने के कारण दोनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाना पड़ा।
🥁 टीन पीटकर और शोर मचाकर भगाने की नाकाम कोशिश
गांव में दहशत का आलम यह है कि लोग अब लाठी-डंडों के बिना घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। तेलमा जमालुद्दीनपुर निवासी धर्मनाथ गुप्ता ने PNN24 News को बताया कि बंदर को भगाने के लिए ग्रामीण सुबह और शाम को एकजुट होकर टीन पीटते हैं और जोर-जोर से शोर मचाते हैं। लेकिन इस देसी नुस्खे का भी बंदर पर कोई असर नहीं हो रहा है। वह थोड़ी देर के लिए भागता है और फिर लौटकर किसी न किसी पर हमला कर देता है।
🥵 छतों पर जाना बंद; घरों में कैद होने को मजबूर बच्चे और बुजुर्ग
इस उमस भरी गर्मी में जहां ग्रामीण इलाकों में लोग हवा के लिए छतों का रुख करते हैं, वहीं इस गांव के लोगों ने छतों पर जाना और रात में वहां सोना पूरी तरह बंद कर दिया है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर हैं, जिससे उनका घरों से निकलना भी बंद हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस तपती गर्मी में भी खिड़की-दरवाजे बंद कर घरों के भीतर रहने को विवश हैं।
🌳 वन विभाग और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
थके-हारे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) के उच्चाधिकारियों से हाथ जोड़कर मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द पिंजरा लगाकर या ट्रेंकुलाइज कर इस खूंखार बंदर को पकड़ा जाए और इसे किसी सुदूर जंगल में छोड़ा जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते वन विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची, तो यह बंदर किसी बड़ी अप्रिय घटना या किसी की जान लेने का कारण बन सकता है।











