‘एमपी में कांग्रेस का “खेला” उल्टा पड़ा: एयरपोर्ट पर खड़े रह गए विधायक, इधर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त; बीजेपी की 3-0 से क्लीन स्वीप तय!’ कांग्रेस ने लगाया भाजपा पर सीट चोरी का आरोप
भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा भूचाल! कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; बीजेपी के तीनों प्रत्याशियों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट की निर्विरोध जीत तय। हैदराबाद कोर्ट के एक नोटिस को हलफनामे (फॉर्म 26) में छिपाने का आरोप। इधर, बेंगलुरु भाग रहे 40 कांग्रेस विधायक भोपाल एयरपोर्ट से लौटे वापस। प्रियंका चतुर्वेदी का बीजेपी पर तीखा हमला। पढ़ें PNN24 की विशेष राजनैतिक-विधिक रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
भोपाल (PNN24 News): मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनावी मुकाबला मंगलवार शाम को एक बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक कानूनी मोड़ पर आकर खत्म हो गया। संख्या बल के हिसाब से सुरक्षित मानी जा रही कांग्रेस की एकमात्र सीट पर उस वक्त वज्रपात हुआ, जब स्क्रूटनी के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। इस चौंकाने वाले फैसले के बाद, कांग्रेस के जो करीब 40 विधायक क्रॉस वोटिंग और टूट के डर से बेंगलुरु जाने के लिए विशेष चार्टर्ड प्लेन में सवार हो चुके थे, उन्हें बैरंग भोपाल एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा।
✈️ विधायकों को बचाने में जुटी रही कांग्रेस, बीजेपी ने “कागज” से कर दिया खेल
मध्य प्रदेश विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट आसानी से मिल रही थी। लेकिन बीजेपी ने जैसे ही तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारा, कांग्रेस खेमे में ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर बैठ गया।
- विधायकों की बाड़ेबंदी की थी तैयारी: सोमवार और मंगलवार को दिनभर कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट करने और उन्हें कर्नाटक (बेंगलुरु) के रिसॉर्ट में शिफ्ट करने की रणनीति में व्यस्त रही। शाम 5 बजे तक विधायक विमान में बैठ भी चुके थे।
- रणनीति में हुई भारी चूक: कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर PNN24 News को बताया, “हमारा पूरा ध्यान विधायकों को टूटने से बचाने और बीजेपी की तीसरी सीट वाली साजिश को नाकाम करने पर था। हमें अंदाजा ही नहीं था कि बीजेपी दबाव बनाकर सीधे नामांकन ही निरस्त करवा देगी।”
⚖️ फॉर्म 26 और BNSS की धारा 223(1) का कानूनी पेंच… क्यों रद्द हुआ नामांकन?
इस पूरे विवाद की पटकथा बीजेपी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी की एक तकनीकी शिकायत से लिखी गई:
- तथ्य छुपाने का आरोप: बीजेपी ने रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा को शिकायत सौंपी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन हलफनामे (फॉर्म 26) में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक आपराधिक शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) का उल्लेख नहीं किया, जिसमें वे अभियुक्त क्रमांक 4 हैं।
- रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला: रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था, सितंबर 2025 में नोटिस जारी हुआ था और अक्टूबर 2025 में नटराजन ने जवाब भी दाखिल किया था। तथ्यों को छुपाने और अपूर्ण एफिडेविट के आधार पर नामांकन रद्द कर दिया गया।
- कांग्रेस की कानूनी दलील: मीनाक्षी नटराजन के वकील अजय गुप्ता ने इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कहा, “अदालत ने जिस नोटिस का हवाला दिया, वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत केवल एक ‘प्रस्तावित अभियुक्त’ को सुनवाई का अवसर देने के लिए था। अदालत ने अभी तक अपराध का संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया था और न ही कोई समन जारी हुआ था, इसलिए कानूनन यह लंबित आपराधिक प्रकरण नहीं था। इसे घोषित करना अनिवार्य नहीं था।”
🔥 “स्मृति ईरानी के 3 दावों पर चुप चुनाव आयोग, नटराजन पर सख्त क्यों?”— प्रियंका चतुर्वेदी
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होते ही विपक्षी खेमे ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। राज्यसभा की पूर्व सांसद और शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘एक्स’ पर बीजेपी को घेरते हुए लिखा:
“बीजेपी की स्मृति ईरानी जी लोकसभा चुनाव में अपनी शैक्षणिक योग्यता के तीन अलग-अलग दावों वाले हलफ़नामों के साथ चुनाव लड़ सकती हैं, चुनाव आयोग सभी शिकायतों को नज़रअंदाज़ कर देता है। लेकिन कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन इसलिए रद्द कर दिया जाता है क्योंकि उनके हलफ़नामे में एक ऐसे अस्पष्ट मामले का उल्लेख नहीं था, जिसमें न कोई एफ़आईआर दर्ज थी और न ही उन्हें चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखने का कोई अवसर मिला।”
🗳️ बीजेपी की ३-० से एकतरफा जीत तय; कौन हैं महेश केवट?
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 11 जून 2026 दोपहर 3:00 बजे तक है। अगर तब तक कांग्रेस को केंद्रीय चुनाव आयोग या हाईकोर्ट से कोई आपातकालीन कानूनी राहत नहीं मिलती है, तो मतदान की नौबत ही नहीं आएगी। ऐसी स्थिति में बीजेपी के तीनों उम्मीदवार— तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध (Unopposed) राज्यसभा सांसद चुन लिए जाएंगे।
- कौन हैं महेश केवट? बुंदेलखंड के निवाड़ी (ओरछा) से आने वाले महेश केवट पिछले चार दशकों से संघ (RSS) और एबीवीपी (ABVP) के समर्पित सिपाही रहे हैं। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। हालांकि 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में बगावत के चलते उन्हें 4 साल के लिए निष्कासित किया गया था, लेकिन उनकी संगठनात्मक उपयोगिता को देखते हुए 1 साल में ही वापसी हो गई।
- बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक: महेश केवट को राज्यसभा भेजकर बीजेपी ने पिछड़े वर्गों, विशेषकर मछुआरा, निषाद और केवट समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का एक बड़ा और अकाट्य सामाजिक संदेश दिया है।
इधर, बीजेपी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए दावा किया है कि मीनाक्षी नटराजन के इस अदालती मामले के गोपनीय दस्तावेज खुद कांग्रेस पार्टी के ही एक अंदरूनी गुट ने बीजेपी तक पहुंचाए थे, जो कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करता है। कांग्रेस अब इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुटी है।










