‘नोएडा श्रमिक आंदोलन: 2 महीने वयस्कों की जेल में काटने के बाद 16 वर्षीय नाबालिग जुवेनाइल होम से रिहा; अदालत ने घटाई जमानत राशि’

नोएडा श्रमिक आंदोलन: बड़ी राहत! दो महीने तक वयस्कों के साथ जेल और 6 दिन जुवेनाइल होम में रहने के बाद 16 वर्षीय नाबालिग रिहा। अदालत ने जमानत राशि 45 हजार से घटाकर 30 हजार रुपये की; जमानत के तौर पर जमा हुए मोटरसाइकिल के कागजात। मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाओं पर उठे सवाल। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी 

नोएडा (PNN24 News): नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में गिरफ्तार किए गए एक 16 वर्षीय नाबालिग को आखिरकार लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद गुरुवार (18 मई) को जुवेनाइल होम से रिहा कर दिया गया। यह मामला किशोर न्याय (Juvenile Justice) और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, क्योंकि इस नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने से पहले दो महीने की लंबी अवधि तक वयस्क अपराधियों के साथ सामान्य जेल में बंद रखा गया था।

🚨 वयस्क जेल से जुवेनाइल होम तक का सफर

मामले के अनुसार, नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने इस नाबालिग को भी गिरफ्तार किया था। उम्र की सही तस्दीक और कानूनी पेचीदगियों के कारण उसे शुरुआत में वयस्क मानकर आम जेल में भेज दिया गया, जहां उसने दो महीने काटे।

बाद में उम्र का प्रमाण पत्र और नाबालिग होने का दावा अदालत में स्वीकार होने के बाद, उसे पिछले छह दिनों से जुवेनाइल होम (बाल सुधार गृह) में स्थानांतरित किया गया था। गुरुवार को सुधार गृह की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे अपनों के बीच लौटने की अनुमति मिल गई।

⚖️ अदालत ने दी राहत: जमानत राशि में कटौती

नाबालिग की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत ने विधिक प्रक्रिया में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया:

  • जमानत राशि में छूट: अदालत ने पूर्व में तय की गई 45 हजार रुपये की भारी-भरकम जमानत राशि को घटाकर 30 हजार रुपये कर दिया।
  • वाहन के कागजात बने सहारा: गरीब परिवार के पास नकद राशि न होने के कारण, अदालत की अनुमति से 30 हजार रुपये के बदले एक मोटरसाइकिल के कागजात को बतौर जमानत (Guaranty) अदालत में जमा किया गया, जिसके बाद रिहाई का परवाना जारी हुआ।

🔬 मानवाधिकारों पर उठते गंभीर सवाल

इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और पुलिसिया कार्रवाई पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नाबालिग को गिरफ्तारी के तुरंत बाद किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के सामने पेश किया जाना चाहिए और उसे किसी भी परिस्थिति में वयस्कों के साथ जेल में नहीं रखा जा सकता। इस मामले में दो महीने तक नाबालिग का वयस्क जेल में रहना कानूनी प्रक्रियाओं की एक बड़ी चूक को दर्शाता है।

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