‘पीएम मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड: देश के सबसे लंबे समय तक बने “निर्वाचित” प्रधानमंत्री; कांग्रेस का भीषण पलटवार— “संवैधानिक संस्थाएं खत्म करने वाले बने भारत के गले का बोझ”!’
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, बने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री; पंडित नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़ा. इस बड़ी उपलब्धि पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का तीखा पलटवार— बोले, 'यह स्व-घोषित और संदिग्ध माइलस्टोन है, मोदी देश के लोकतंत्र की हत्या कर भारत के गले का बोझ बन गए हैं.' पढ़ें PNN24 की विशेष राजनैतिक रिपोर्ट.

आदिल अहमद
नई दिल्ली (PNN24 News): भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन (10 जून 2026) एक बहुत बड़े रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाले पहले ‘निर्वाचित प्रधानमंत्री’ बन गए हैं. पीएम मोदी ने लगातार 4,399 दिन प्रधानमंत्री पद पर रहकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों (1952 के पहले आम चुनाव के बाद निर्वाचित अवधि) के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. जहां इस मौके पर भारत मंडपम में एनडीए के घटक दल पीएम मोदी के इस 12 साल के सफल कार्यकाल का जश्न मना रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इस रिकॉर्ड को एक ‘मनगढ़ंत और तकनीकी’ ढोंग बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
🪨 “संदिग्ध माइलस्टोन पार करने वाले मोदी देश के गले का बोझ”— जयराम रमेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस रिकॉर्ड पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद लंबा और तीखा पोस्ट साझा किया. जयराम रमेश ने लिखा:
“मिस्टर मोदी ने भले ही आज एक ‘स्व-घोषित और संदिग्ध रूप से तैयार’ उपलब्धि (Milestone) हासिल कर ली हो, लेकिन सच यह है कि वह आज भारत के गले का एक बड़ा बोझ (Millstone) बन गए हैं. वह एक ऐसे नेता हैं जो अपनी आंखों के सामने देश में लोकतंत्र की बेरहमी से हत्या होते हुए देख रहे हैं और उसके खुद जिम्मेदार हैं.”
📉 संवैधानिक संस्थाओं के पतन और ‘नीट घोटाले’ पर घेरा
जयराम रमेश ने मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश की प्रमुख संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म होने का गंभीर आरोप लगाया:
- इलेक्शन कमीशन पर खतरा: उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में चुनाव आयोग जैसी पवित्र संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता को पूरी तरह छीन लिया गया है और देश की वोटर लिस्ट की शुचिता भी अब खतरे में है.
- आरक्षण को किया कमजोर: कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि निजीकरण और “नॉट फाउंड सूटेबल” जैसे दुर्भावनापूर्ण हथकंडों का इस्तेमाल करके अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए तय आरक्षण को लगातार कमजोर किया जा रहा है.
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण का खात्मा: हाल ही में सामने आई मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) और सीबीएसई (CBSE) से जुड़ी पेपर लीक और धांधली की बड़ी अनियमितताओं का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि मोदी राज में देश के शैक्षणिक संस्थानों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को पूरी तरह मिटा दिया गया है.
⚖️ नेहरू और मोदी के कार्यकाल और ‘जनादेश’ की तुलना
कांग्रेस नेता ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों के तीनों कार्यकालों के संख्या बल और जनसमर्थन की तुलना कर पीएम मोदी पर तंज कसा:
- पंडित नेहरू का दौर (1947-1952): जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 15 अगस्त 1947 को कार्यभार संभालने के बाद पंडित नेहरू ने एक ऐसी असाधारण कैबिनेट का नेतृत्व किया था, जिसकी मिसाल दुनिया में बहुत कम मिलती है. उस शुरुआती दौर में ही 560 से अधिक रियासतों का शांतिपूर्ण विलय हुआ, जमींदारी प्रथा खत्म हुई, दलितों-आदिवासियों को आरक्षण मिला और परमाणु ऊर्जा जैसी आधुनिक वैज्ञानिक सोच की नींव रखी गई, जिसे अब मोदी सरकार मिटाने पर तुली है.
- जनादेश पर खड़े किए सवाल: उन्होंने आगे कहा, “पंडित नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में देश की जनता के भारी और बेहद निर्णायक बहुमत के साथ जीत हासिल की थी. इसके विपरीत, नरेंद्र मोदी 2024 के लोकसभा चुनाव में काफी बड़े अंतर से अपनी पार्टी के लिए एक साधारण बहुमत (272 सीटें) भी हासिल नहीं कर पाए. उन्हें बीजेपी संसदीय दल को दरकिनार कर जल्दबाजी में एनडीए सहयोगियों की बैठक बुलानी पड़ी, ताकि खुद को तीसरी बार पीएम के रूप में स्वीकार कराया जा सके. साल 2024 निश्चित रूप से मोदी जी के लिए कोई व्यक्तिगत जनादेश नहीं था.”
📊 क्या है इस रिकॉर्ड का असली गणित? (The Legal Legwork)
इस विवाद के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इसे बीजेपी का ‘प्रोपेगैंडा’ करार दिया है. वास्तव में, पंडित जवाहरलाल नेहरू कुल 16 साल और 286 दिन (टोटल 6,130 दिन) देश के प्रधानमंत्री रहे थे, जो आज भी भारत के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है.
हालांकि, तकनीकी रूप से नेहरू का 1947 से 1952 तक का पहला 5 साल का कार्यकाल एक ‘अंतरिम सरकार’ (Interim Government) के प्रमुख के तौर पर था, क्योंकि देश में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ था. बीजेपी और केंद्र सरकार इसी तकनीकी पहलू को आधार बनाकर साल 1952 के पहले आम चुनाव के बाद के दिनों की गिनती कर रही है, जिसके अनुसार चुने जाने के बाद नेहरू लगातार 4,398 दिनों तक पीएम रहे थे, जबकि नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 से लेकर आज (10 जून 2026) तक लगातार निर्वाचित रहकर 4,399 दिन पूरे कर इतिहास रच दिया है.











