‘राम मंदिर के चढ़ावे में महा-गबन: जांच के लिए बनी हाई-लेवल SIT; पैसे गिनने वाला कर्मचारी गिरफ्तार, आलमारी और गोबर के ढेर से मिले १० लाख, खरीदी करोड़ों की जमीन!’

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में यूपी सरकार का बड़ा ऐक्शन, लखनऊ कमिश्नर IAS विश्वास पंत की अगुवाई में 3 सदस्यीय SIT गठित। आईपीएस किरन एस और स्पेशल फाइनेंस सेक्रेट्री नील रतन भी शामिल; 7 दिन में मांगी प्रिलिमिनरी रिपोर्ट। एसओजी ने रुदौली से आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा को दबोचा, घर में गोबर के ढेर से मिले ₹10 लाख। कर्मचारियों द्वारा करोड़ों की बेनामी संपत्ति खरीदने का खुलासा। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

ईदुल अमीन

अयोध्या/लखनऊ (PNN24 News): आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या धाम स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से चंदे और चढ़ावे की चोरी का एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। राम मंदिर के गर्भगृह और काउंटर पर आने वाले चढ़ावे की गिनती में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोपों के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने एक बेहद रसूखदार स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का ऐलान कर दिया है। इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब मंदिर में चंदा गिनने वाले एक संविदा कर्मी के घर पर छापेमारी की गई।

🕵️ IAS विश्वास पंत की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय SIT गठित

मामले की राष्ट्रीय संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग ने जांच के लिए त्रिकोणीय प्रशासनिक चक्रव्यूह तैयार किया है:

  • जांच टीम के हेड: लखनऊ संभाग के कमिश्नर और वरिष्ठ IAS अधिकारी विश्वास पंत को इस विशेष जांच दल (SIT) का अध्यक्ष (Head) नियुक्त किया गया है।
  • टीम के अन्य दिग्गज सदस्य: कमिश्नर विश्वास पंत के अलावा इस हाई-पावर टीम में तेजतर्रार IPS अधिकारी किरन एस और उत्तर प्रदेश शासन के स्पेशल फाइनेंस सेक्रेट्री (विशेष वित्त सचिव) नील रतन को शामिल किया गया है, ताकि प्रशासनिक, आपराधिक और वित्तीय ऑडिट तीनों स्तरों पर समानांतर जांच हो सके।
  • डेडलाइन: शासन ने एसआईटी को कड़ी हिदायत दी है कि वह अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (Preliminary Report) महज 7 दिनों के भीतर पेश करे, जबकि विस्तृत और अंतिम खोजी रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपनी होगी।

📱 अखिलेश यादव के ‘X’ पोस्ट से मचा था हड़कंप; चंपत राय ने दी थी सफाई

इस पूरे महा-विवाद की आधिकारिक शुरुआत 7 जून 2026 को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विस्तृत और हमलावर पोस्ट साझा की। अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और चंदे की भारी-भरकम राशि में बड़े पैमाने पर आंतरिक हेरफेर की जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल दागे थे।

विवाद बढ़ता देख श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को तुरंत मीडिया के सामने आकर मोर्चा संभालना पड़ा था। उन्होंने शुरुआती तौर पर किसी भी वित्तीय हेरफेर से साफ इनकार करते हुए कहा था कि राम मंदिर के खातों और चंदे का समय-समय पर पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) द्वारा बकायदा नियमित ऑडिट होता रहता है, और वर्तमान में भी रूटीन ऑडिट की ही प्रक्रिया चल रही है।

💩 गोबर के ढेर और आलमारी से निकले ₹10 लाख; लवकुश मिश्रा गिरफ्तार

भले ही ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर किसी गड़बड़ी को नकारा हो, लेकिन ग्राउंड पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने दावों की पोल खोल दी है। ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के खोजी पत्रकार मयंंक शुक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फैजाबाद के रुदौली इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी कर लवकुश मिश्रा नाम के एक युवक को दबोच लिया है। लवकुश पिछले 4-5 महीनों से राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नोटों और चंदे की गिनती (Cash Counting Desk) करने के विभाग में तैनात था।

6 सदस्यीय जांच टीम (जिसमें 2 वर्दीधारी पुलिसकर्मी और 4 सिविल ड्रेस में थे) ने जब लवकुश के रुदौली स्थित पैतृक आवास की तलाशी ली, तो दंग रह गए। आरोपी ने चोरी किए गए पैसों में से कुछ हिस्सा घर की आलमारी के खुफिया लॉकर में रखा था, जबकि एक बड़ी नकदी घर के पीछे बने गोबर के ढेर के भीतर पॉलीथिन में दबाकर छिपाई हुई थी। कुल मिलाकर मौके से ₹10,00000 (10 लाख रुपये) की नकदी बरामद की गई है।

💸 18 हजार की सैलरी और खरीदी ₹1.5 करोड़ की बेनामी संपत्ति!

जांच में यह भी सामने आया है कि इस रैकेट में लवकुश के अलावा एक अन्य मंदिर कर्मचारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इन दोनों की संदिग्ध संपत्ति जांच एजेंसियों के रडार पर है:

  • सैलरी बनाम प्रॉपर्टी: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन कर्मचारियों को मंदिर ट्रस्ट की तरफ से प्रति माह केवल 18,000 से 20,000 रुपये का वेतन (Salary) मिलता था। लेकिन हाल के 3-4 महीनों में इनकी आर्थिक स्थिति रॉकेट की रफ्तार से बदली।
  • डेढ़ करोड़ की जमीन: शुरुआती जांच में पता चला है कि संदेह के घेरे में आए एक कर्मचारी ने हाल ही में अयोध्या के पॉश इलाके में करीब ₹1.5 करोड़ की कीमती जमीन खरीदी है। वहीं दूसरे आरोपी ने लगभग ₹40 लाख का एक बड़ा कमर्शियल प्लॉट अपने नाम कराया है। इतनी कम सैलरी में करोड़ों के विधिक निवेश ने गबन के दावों पर पक्की मुहर लगा दी है।

हालांकि, आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए दावा किया है कि उनका बेटा बेकसूर है और घर से मिले 10 लाख रुपये खेती की जमीन गिरवी रखकर मकान बनाने के लिए जुटाए गए थे, जिसका राम मंदिर की चोरी से कोई लेना-देना नहीं है।

🏗️ नृपेंद्र मिश्रा पहुंचे अयोध्या, झाड़ा पल्ला

चंदे और गबन की इस बड़ी कॉर्पोरेट और आपराधिक लड़ाई के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी 5 दिनों के भीतर दूसरी बार आपातकालीन दौरे पर अयोध्या पहुंचे। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे चंदे की हेराफेरी पर सीधे सवाल किए, तो उन्होंने इस संवेदनशील विषय पर किसी भी टिप्पणी से साफ बचते हुए पल्ला झाड़ लिया। नृपेंद्र मिश्र ने केवल इतना कहा कि उनकी विधिक जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मंदिर के भौतिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा की निगरानी करना है, वित्तीय प्रबंधन ट्रस्ट का आंतरिक विषय है। अब पूरे देश की नजरें आईएएस विश्वास पंत की एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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