‘राम मंदिर चंदा चोरी में नया विधिक मोड़: ट्रस्ट को पहले से थी महाघोटाले की भनक! चंपत राय के इशारे पर 5 जून को हुई थी “अनौपचारिक” रेड; एसआईटी ने सीएम योगी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट’
राम मंदिर चंदा चोरी कांड में नया धमाका: सूत्रों का दावा—ट्रस्ट को पहले से थी चोरी की भनक, चंपत राय के कहने पर 5 जून को हुई थी 'अनौपचारिक' छापेमारी। अविनाश शुक्ला के घर से कैश बरामदगी का 24 सेकंड का नया वीडियो वायरल। एसआईटी (SIT) ने कैश हैंडलिंग और प्राइवेट स्टाफ हायरिंग की कमियों की रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपी।

शफी उस्मानी
लखनऊ (PNN24 News): अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में रोजाना आ रहे मोड़ अब इस पूरे घटनाक्रम को बेहद पेचीदा और गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर ले जा रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों और विधिक गलियारों से आ रहे दावों के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों को मंदिर की तिजोरी में हो रही संदिग्ध गड़बड़ियों और नकदी के गबन की जानकारी पहले से ही थी। बावजूद इसके, आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने में की गई देरी ने अब पुलिस और ट्रस्ट दोनों की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

🚨 5 जून की ‘अनौपचारिक’ रेड और 24 सेकंड का वायरल वीडियो
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा टाइमलाइन (घटनाक्रम के क्रम) को लेकर हुआ है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि , राम मंदिर के दान में कथित चोरी का मामला आधिकारिक रूप से 7 जून को सार्वजनिक हुआ था, लेकिन इसके दो दिन पहले यानी 5 जून 2026 को ही एक बड़ी गुप्त कार्रवाई हो चुकी थी।
- चंपत राय का कनेक्शन: सूत्रों का दावा है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय के सीधे निर्देश पर इस मामले से जुड़े एक आरोपी को साथ लेकर पुलिस की टीम 5 जून को ही दूसरे मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के घर धमक गई थी।
- अनौपचारिक बरामदगी: पुलिस ने अविनाश के घर की सघन तलाशी ली और वहाँ से भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 5 जून को हुई यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह ‘अनौपचारिक’ (Unofficial) थी, क्योंकि उस वक्त तक पुलिस रिकॉर्ड में कोई ‘ऑफिशियल एफआईआर’ दर्ज ही नहीं की गई थी।
- कैश से भरा काला बैग: इस बीच, सोशल मीडिया पर 24 सेकंड का एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर एक सफेद रंग की गाड़ी की ओर जा रहे हैं। पुलिस के हाथ में एक काला बैग भी दिखाई दे रहा है, जिसके बारे में सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में मंदिर से चुराई गई वह नकदी थी जिसे अनौपचारिक रेड में बरामद किया गया था।
हालांकि, जांच अधिकारियों और पुलिस प्रशासन ने अभी तक इस विधिक चूक और शुरुआती कार्रवाई में हुई देरी पर कोई भी आधिकारिक सफाई या बयान जारी नहीं किया है।
📋 एसआईटी (SIT) की जांच में बड़ा खुलासा: मैनेजमेंट और हायरिंग में घोर कमियां
मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने राम मंदिर के आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन (Internal Financial Management) में कई गंभीर और अक्षम्य विड़ंबनाओं का पर्दाफाश किया है।
एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मंदिर परिसर के भीतर निम्नलिखित कमियां पाई गईं:
- कैश हैंडलिंग में ढिलाई: भारी-भरकम दान राशि और चढ़ावे को गिनने और उसे बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की विधिक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) का पालन नहीं किया जा रहा था।
- सीसीटीवी मॉनिटरिंग का अभाव: तिजोरी और काउंटिंग रूम के कई संवेदनशील कोनों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बेहद कमजोर और त्रुटिपूर्ण थी।
- निजी एजेंसियों के जरिए संदिग्ध भर्ती: सबसे बड़ा संशय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के उन कर्मचारियों को लेकर है, जिन्हें एक प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए हायर किया गया था। जांच में पता चला है कि इनमें से कुछ कर्मचारियों की सीधी भर्ती (Hiring) ट्रस्ट के ही कुछ रसूखदार अधिकारियों की सिफारिशों से जुड़ी हुई थी। इन कर्मचारियों का कोई पुख्ता पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था।
📊 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी (SIT) ने अब तक की अपनी विस्तृत और गोपनीय जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आउटसोर्सिंग स्टाफ की नियुक्तियों की नए सिरे से स्क्रूटनी करने की सिफारिश की गई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही इस मामले में कई और बड़े रसूखदारों पर कानूनी गाज गिरना तय है।










