‘मध्य प्रदेश में डॉक्टरों का खौफनाक कारनामा: सर्दी-खांसी के मरीज मासूम की आंख में डाल दिया “कफ ड्रॉप”; 19 महीने के बच्चे की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए हुई खत्म, AIIMS भोपाल ने की पुष्टि’
एमपी के सागर में स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार: बंडा सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा की बड़ी लापरवाही, 19 महीने के मासूम की आंख में आई-ड्रॉप की जगह डाल दिया कफ सीरप (Cough Drop)। एम्स (AIIMS) भोपाल के डॉक्टरों ने की हमेशा के लिए रोशनी जाने की पुष्टि। सीएमएचओ (CMHO) डॉ. गंगा प्रसाद आर्य ने बिठाई 3 सदस्यीय जांच। पढ़ें PNN24 की ग्राउंड रिपोर्ट।

आदिल अहमद
सागर/भोपाल (PNN24 News): मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और घोर चिकित्सकीय लापरवाही (Medical Negligence) का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राज्य की चरमराती सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। जिले के बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए एक 19 महीने के मासूम बच्चे की आंखों की रोशनी अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों की कथित घोर लापरवाही के चलते हमेशा-हमेशा के लिए चली गई है। यह शर्मनाक घटना खुद सूबे के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के प्रभार वाले जिले के अंतर्गत आने वाले अस्पताल की है।
🧴 मामूली लालिमा का इलाज: आई-ड्रॉप की जगह डाल दिया ‘कफ ड्रॉप’
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक सागर जिले के भूसा कमालपुर गांव के निवासी इंद्रराज विश्वकर्मा बीते 29 मई 2026 को अपने 19 महीने के लाडले बेटे को लेकर बंडा सिविल अस्पताल पहुंचे थे।
- क्या थी शिकायत: पिता के मुताबिक, बच्चे को बेहद मामूली सर्दी-खांसी थी और उसकी आंखों में हल्की सी लालिमा (लाली) थी।
- अस्पताल में क्या हुआ: अस्पताल की ओपीडी (OPD) में ड्यूटी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने बच्चे की प्राथमिक जांच की और पर्चे पर कुछ दवाइयां लिख दीं।
- जानलेवा लापरवाही: पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि दवा काउंटर या उपचार कक्ष में मौजूद चिकित्सा स्टाफ ने बिना पढ़े घोर लापरवाही की। उन्होंने बच्चे की संवेदनशील आंखों में डाले जाने वाले आई-ड्रॉप (Eye-Drop) की जगह कफ (Sore Throat/Cough) साफ करने वाला गाढ़ा ‘कफ ड्रॉप’ डाल दिया।
🚨 बंडा से सागर और फिर AIIMS भोपाल में डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ
आंखों में गलत दवा डाले जाने के चंद मिनटों के भीतर ही मासूम बच्चा दर्द से बुरी तरह चीखने-चिल्लाने लगा और उसकी हालत बिगड़ने लगी। करीब तीन से चार घंटे तक अस्पताल में तड़पने के बाद भी जब बंडा के डॉक्टरों से स्थिति नहीं संभली, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए बच्चे को सागर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
सागर के डॉक्टरों ने भी स्थिति को नाजुक देखते हुए परिजनों को तत्काल देश के शीर्ष संस्थान एम्स (AIIMS) भोपाल जाने की सलाह दी। बदहवास परिजन मासूम को लेकर एम्स भोपाल पहुंचे। वहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जब बच्चे की आंखों की गहन जांच की, तो उन्होंने परिजनों को यह कहकर गहरे सदमे में डाल दिया कि गलत और अत्यधिक तीव्र केमिकल युक्त दवा आंख में जाने के कारण बच्चे के रेटिना/आंखों की रोशनी पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और अब इसे वापस लाना नामुमकिन है।
⚖️ बंडा थाने में FIR की तहरीर, CMHO ने बिठाई 3 सदस्यीय जांच
इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही सागर जिले के स्थानीय नागरिकों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित पिता इंद्रराज विश्वकर्मा ने बंडा थाने में बकायदा औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है और दोषी डॉ. हिमांशु वर्मा व संबंधित स्टाफ के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की है।
मामले के लगातार तूल पकड़ने और मीडिया में आने के बाद सागर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. गंगा प्रसाद आर्य ने आनन-फानन में पूरे मामले की जांच के लिए एक 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। सीएमएचओ डॉ. आर्य ने एनडीटीवी को बताया कि जांच समिति को एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर अपनी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह साफ किया जाएगा कि डॉक्टर ने वास्तव में क्या दवा लिखी थी और काउंटर से बच्चे को क्या दिया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर या नर्स को सेवा से बर्खास्त करने सहित कड़ी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🩹 सागर के अस्पतालों में लापरवाही का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड
गौरतलब है कि सागर जिले के सरकारी और मेडिकल कॉलेजों में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे महज कुछ दिन पहले ही बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में देवेंद्र पाठक नामक एक मरीज की इलाज के दौरान संदिग्ध मौत हो गई थी। तब परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉक्टरों ने मरीज को एनेस्थीसिया (Anesthesia) की अत्यधिक ओवरडोज दे दी थी, जिससे उसकी जान चली गई। उस समय भी मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने खुद संज्ञान लेकर जांच बैठाई थी, लेकिन ढाक के तीन पात साबित हुए और आज एक और मासूम इसका शिकार हो गया।











