‘महाराष्ट्र में “ऑपरेशन टाइगर” से थर्राई मातोश्री: उद्धव के 9 में से 7 सांसदों की बगावत तय? संजय राउत बोले— “50 करोड़ तय हुई बेस प्राइज, 15 करोड़ एडवांस चालू!”‘
महाराष्ट्र सियासत: उद्धव ठाकरे गुट में फिर बड़ी बगावत की सुगबुगाहट, 9 में से 7 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चाओं से हड़कंप। संजय राउत और महुआ मोइत्रा के बीच सोशल मीडिया पर 50 करोड़ के 'खोके' (एडवांस) को लेकर छिड़ी जंग। टूट को रोकने के लिए अनिल देसाई ने दिल्ली में बुलाई आपात बैठक; अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा कड़ा पत्र। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी राजनीतिक रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
दिल्ली (PNN24 News): महाराष्ट्र की सियासत में ‘खोके’ (करोड़ों रुपये की घूस) और बगावत का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पैर जमाने की कोशिश कर रहे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल शिवसेना (UBT) में एक बार फिर आंतरिक विस्फोट होने की खबरें पुख्ता होती जा रही हैं। राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 से 7 सांसद बहुत जल्द मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं या संसद में अपना एक अलग स्वतंत्र गुट घोषित कर सकते हैं।
💰 “अपना सपना मनी..मनी!”— 50 करोड़ की ‘बेस प्राइज’ पर संजय राउत-महुआ का बड़ा दावा
इस संभावित टूट की खबरों को सबसे ज्यादा हवा खुद शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक सोशल मीडिया पोस्ट से मिली। 16 जून की रात करीब 11 बजे राउत ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्फोटक दावा करते हुए लिखा:
“अपना सपना मनी..मनी! महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात हर एक सांसद को 15 करोड़ रुपये का एडवांस दिया जा रहा है। यह जानकारी बेहद चौंकाने वाली और घृणित है!”

इस पर आज (17 जून) सुबह संजय राउत ने दोबारा पलटवार करते हुए लिखा, “नहीं नहीं महुआ जी, प्रत्येक सांसद की न्यूनतम ‘आधार कीमत’ (Base Price) 50 करोड़ रुपये (पचास खोके) तय हुई है। 15 करोड़ रुपये तो सिर्फ एडवांस टोकन मनी है। उनकी कीमत इसलिए ज्यादा है क्योंकि शिवसेना और टीएमसी दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर बड़े ब्रांड लेबल हैं।”
🚪 ‘मातोश्री’ की बैठक से गायब थे 5 सांसद; बगावत की टाइमलाइन
दरअसल, इस टूट की पटकथा 14 जून (रविवार) को ही लिखी जा चुकी थी, जब उद्धव ठाकरे ने अपने मुंबई स्थित आवास ‘मातोश्री’ पर सभी सांसदों की एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक में 5 प्रमुख सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए और केवल ऑनलाइन औपचारिकता निभाई:
- अनुपस्थित रहने वाले सांसद: संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), नागेश पाटील (हिंगोली), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) और ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)।
- उपस्थित रहने वाले वफादार: अरविंद सावंत (दक्षिण मुंबई), अनिल देसाई (दक्षिण-मध्य मुंबई), संजय दीना पाटिल (उत्तर-पूर्व मुंबई) और राजाभाऊ वाजे (नासिक)।
संजय राउत का दावा है कि इन अनुपस्थित सांसदों ने बैठक में वर्चुअली जुड़कर भगवान, साईबाबा और अपने बच्चों की कसमें खाकर अंत तक उद्धव ठाकरे के साथ रहने की बात कही थी, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और ही बयां कर रही है। एकनाथ शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ अंतिम चरण में है; 7 सांसदों और 16 विधायकों के दल-बदल की डील पूरी हो चुकी है, विधायकों का ऑपरेशन मानसून सत्र के बाद अंजाम दिया जाएगा।
⚖️ डैमेज कंट्रोल में जुटा उद्धव गुट: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र
पार्टी को पूरी तरह बिखरने से बचाने के लिए शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने आनन-फानन में लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला को एक आधिकारिक विधिक पत्र सौंपा है:
- विधिक मांग: पत्र में मांग की गई है कि संसद में केवल उद्धव ठाकरे के गुट को ही ‘एकमात्र आधिकारिक शिवसेना’ के रूप में मान्यता दी जाए। किसी भी बागी या अलग होने वाले स्वतंत्र गुट को कोई भी विशेषाधिकार, कार्यालय या दर्जा न दिया जाए।
- एंटी-डिफेक्शन लॉ का अल्टीमेटम: सावंत ने स्पष्ट किया है कि यदि सांसद टूटते हैं, तो पार्टी संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कराने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रखती है।
इधर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सांसद अनिल देसाई ने कल यानी 18 जून को सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में सभी लोकसभा व राज्यसभा सांसदों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है।
🗣️ राजनीतिक वार-पलटवार: किसकी क्या है दलील?
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सुषमा अंधारे (नेता, शिवसेना UBT): “यह बगावत उद्धव जी के खिलाफ नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने के रास्ते में बीजेपी के ही केंद्रीय नेताओं द्वारा लगाया गया स्पीडब्रेकर है। हमें सत्ता जाने का डर नहीं है, हम असली किसान हैं, फिर से फसल बोएंगे; बागी तो सिर्फ चोरी करना जानते हैं।”
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नरेश म्हस्के (सांसद, शिंदे गुट): “उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब के हिंदुत्व के विचारों को तिलांजलि देकर कांग्रेस से हाथ मिलाया, जिससे उनके कार्यकर्ता, विधायक और सांसद बेहद नाराज हैं। लोग 24 घंटे काम करने वाले एकनाथ शिंदे के साथ आ रहे हैं, तो इसमें हमारी क्या गलती है?”
हालांकि, शिंदे सरकार के मंत्री उदय सामंत ने फिलहाल किसी भी गोपनीय मुलाकात या सांसदों को तोड़ने के दावों से आधिकारिक रूप से इनकार किया है। अगले 48 घंटे महाराष्ट्र की राजनीति और देश के दल-बदल विरोधी कानून की परीक्षा के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।










