‘बिहार का “भारत भूषण एनकाउंटर” मामला: सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार; याचिका में की गई थी पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी और CBI जांच की मांग’
बिहार ब्रेकिंग: सुप्रीम कोर्ट का भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार। जस्टिस नागरत्ना की कोर्ट ने वकील को रजिस्ट्री के पास जाने को कहा। याचिका में सीबीआई (CBI) जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग की गई थी। एनकाउंटर से पहले फेसबुक लाइव और एसपी के बयान पर उठे सवाल। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

आदिल अहमद
नई दिल्ली (PNN24 News): बिहार के भोजपुर (आरा) जिले में हुए भारत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को बड़ा झटका लगा है। देश की शीर्ष अदालत ने इस पूरे एनकाउंटर कांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया है।
⚖️ जस्टिस नागरत्ना की कोर्ट ने क्या कहा?
कानूनी मामलों की प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ के अनुसार, सोमवार (22 जून 2026) को सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को सुनने के बाद मामले को तत्काल सूचीबद्ध (List) करने से इनकार कर दिया। अदालत ने वकील को निर्देश देते हुए कहा कि वे इस मामले की तत्काल सुनवाई की अर्जी और दस्तावेजों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के सामने प्रस्तुत करें।
📋 जनहित याचिका में की गई हैं ये बड़ी मांगें
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस जनहित याचिका में बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
- दोषी पुलिसकर्मियों पर केस: भरत भूषण तिवारी की कथित तौर पर हत्या करने और कानून का उल्लंघन करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
- स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति: पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश (Retired Judge) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
- सीबीआई जांच: राज्य पुलिस के प्रभाव से दूर इस संवेदनशील मामले की बागडोर सीबीआई को सौंपी जाए।
📱 फेसबुक लाइव और एसपी के दावों में विरोधाभास?
यह पूरा मामला बिहार के भोजपुर का है, जहां 17 जून को पुलिस ने एक मुठभेड़ के दौरान भरत भूषण तिवारी नामक व्यक्ति को गोली मार दी थी। इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस और मृतक के दावों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:
- पुलिस का पक्ष (Self Defence): भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पुलिस टीम ने खुद की और आम जनता की सुरक्षा (आत्मरक्षा) के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पैर में लगी थी। घटना से ठीक एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें कागजों पर ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ (Mentally Unstable) भी बताया था।
- फेसबुक लाइव का सच: हालांकि, इस एनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ है। गोली लगने से ठीक पहले भरत भूषण तिवारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक लाइव वीडियो (Facebook Live) किया था। इस वायरल लाइव में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि उन्होंने अपनी पिस्टल पुलिसकर्मियों की तरफ फेंक दी थी (यानी वे निहत्थे हो चुके थे)। इसी वीडियो के आधार पर अब पुलिसिया कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के बाद, अब याचिकाकर्ता की नजरें रजिस्ट्री के जरिए नियमित सुनवाई की तारीख तय होने पर टिकी हैं।










