‘बंगाल में महा-संग्राम: स्पीकर के फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची TMC; 80 में से 58 विधायकों ने बदला पाला, 11 जून को सबसे ऊपर सूचीबद्ध हुई याचिका!’
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में बड़ी टूट! बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने के स्पीकर के फैसले को टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती। जस्टिस कृष्णा राव की अदालत में 11 जून को होगी सबसे पहले सुनवाई। 80 में से 58 विधायकों ने किया है बागी गुट का समर्थन। विधानसभा का सत्र 18 जून से। पढ़ें PNN24 की विशेष राजनैतिक-विधिक रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
कोलकाता (PNN24 News): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने वजूद और पार्टी के भीतर हुई ऐतिहासिक बगावत को संभालने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। टीएमसी ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के उस विवादित फैसले को आधिकारिक तौर पर चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने टीएमसी से अलग हुए बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में आधिकारिक रूप से ‘विपक्ष का नेता’ (LOP) स्वीकार कर लिया है।
📅 18 जून से सत्र शुरू, 11 जून को हाईकोर्ट में ‘टॉप’ पर होगी सुनवाई
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, टीएमसी के वरिष्ठ वकील ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने इस मामले की बेहद गंभीरता और आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए तुरंत (Argent) सुनवाई की मांग की:
- सत्र की दुहाई: अदालत को बताया गया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का आगामी 18वां सत्र 18 जून से शुरू होने वाला है। ऐसे में सत्र की शुरुआत से पहले विपक्ष के नेता पद के इस संवेदनशील विवाद का कानूनी निपटारा होना बेहद आवश्यक है।
- अदालत का निर्देश: मामले के महत्व को देखते हुए जस्टिस कृष्णा राव ने याचिका को आगामी 11 जून को सुनवाई के लिए सूची में सबसे ऊपर (Top of the List) रखने का कड़ा निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया है कि इस समयावधि के भीतर मामले से जुड़े सभी संबंधित पक्षों को अदालत का नोटिस तामील (भेजा) करा दिया जाए।
- स्पीकर मुख्य पक्षकार: याचिकाकर्ता के कानूनी दल ने माननीय कोर्ट को स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में खुद विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ही मुख्य पक्षकार (Main Respondent) हैं, क्योंकि चुनौती उनके ही प्रशासनिक निर्णय को दी गई है।
💥 80 में से 58 विधायकों की बगावत; टीएमसी में बड़ी टूट
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा के भीतर के आंकड़े टीएमसी संगठन में लगी बड़ी सेंधमारी की गवाही दे रहे हैं:
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बागी गुट को भारी बहुमत: पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने खुलकर बगावत कर दी है और विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का लिखित रूप से पुरजोर समर्थन किया है। यानी दो-तिहाई के करीब विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े हो चुके हैं।
📊 बंगाल चुनाव परिणाम और बदलते समीकरण
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल विधानसभा चुनावों के नतीजों ने सूबे की पूरी राजनैतिक तस्वीर को बदल कर रख दिया था:
- बीजेपी की प्रचंड जीत: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और सत्ता पर काबिज हुई।
- टीएमसी का सिकुड़ता दायरा: मुख्य सत्ताधारी दल रही टीएमसी को इस चुनाव में मात्र 80 सीटें ही नसीब हुईं। चुनाव नतीजों के ठीक बाद से ही राजनैतिक हलकों में टीएमसी के भीतर बड़ी टूट और विधायकों के पाला बदलने के दावे लगातार किए जा रहे थे, जो अब ऋतब्रत बनर्जी के रूप में पूरी तरह धरातल पर सच साबित होते दिख रहे हैं।
अब पूरी देश की निगाहें 11 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि विधानसभा के भीतर टीएमसी का आधिकारिक नेता कौन होगा और क्या स्पीकर का फैसला कानून सम्मत है या नहीं।











