‘UN की रिपोर्ट में इज़रायल पर फिलिस्तीनी बच्चों को “जानबूझकर” निशाना बनाने का आरोप; जस्टिस एस. मुरलीधर ने भारत को दी चेतावनी—”हितों के वक्त अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों पर दोहरा मापदंड नहीं चलेगा”‘
गज़ा में बच्चों की मौत पर UN की चौंकाने वाली रिपोर्ट। जांच समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से कहा- "भारत को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।" कुलभूषण जाधव मामले का उदाहरण देकर विदेश नीति पर पुनर्विचार करने और इज़रायल को हथियारों की आपूर्ति रोकने की मांग। पढ़ें PNN24 की पूरी रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
PNN24 News: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक स्वतंत्र जांच समिति ने इज़रायल-हमास युद्ध को लेकर एक बेहद विचलित करने वाली और ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में इज़रायल पर गज़ा और फिलिस्तीन के अन्य हिस्सों में ‘जानबूझकर’ (Intentionally) बच्चों को निशाना बनाने और उनकी भावी पीढ़ी को खत्म करने की सोची-समझी रणनीति अपनाने का संगीन आरोप लगाया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय जांच समिति की कमान भारत के वरिष्ठ और चर्चित न्यायविद, ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य जस्टिस एस. मुरलीधर संभाल रहे हैं।

📊 गज़ा में बच्चों के नरसंहार के खौफनाक आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकी हमले के बाद इज़रायल ने जो सैन्य कार्रवाई शुरू की, वह अक्टूबर 2025 तक आते-आते बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान बन चुकी है।
- मौत और चोट के आंकड़े: अक्टूबर 2025 तक गज़ा में कम से कम 20,179 फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44,143 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
- अनाथ और दिव्यांग पीढ़ी: रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इज़रायली हमलों के चलते वर्तमान में दुनिया में सबसे ज्यादा हाथ-पैर गंवाने वाले (Amputee) दिव्यांग बच्चे गज़ा में हैं। इसके अतिरिक्त, वहाँ 58,000 से ज्यादा बच्चे पूरी तरह अनाथ हो चुके हैं।
- रणनीति का हिस्सा: जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि नागरिकों और बच्चों पर किए जा रहे ये हमले गज़ा में फिलिस्तीनियों के वजूद और उसकी अगली पीढ़ी को नेस्तनाबूद करने की एक क्रूर सैन्य रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं।
⚓ “हथियार देने वाले देश भी युद्ध अपराधों के मददगार”— जस्टिस मुरलीधर
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के आदेशों और UN की रिपोर्टों को इज़रायल द्वारा बार-बार ठेंगा दिखाए जाने के सवाल पर जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि हमें वैश्विक व्यवस्था और कानून पर भरोसा नहीं खोना चाहिए। उन्होंने इस युद्ध में पश्चिमी देशों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा:
“इस समय इज़रायली सेना (IDF) में करीब 6,000 फ्रांसीसी, लगभग 200 ब्रिटिश और 700 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी देश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के ‘रोम स्टैच्यू’ (Rome Statute) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसलिए यदि उनके नागरिक वहां युद्ध अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो उन सरकारों की विधिक जिम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों पर कार्रवाई करें।”
इसके साथ ही उन्होंने भारत सहित इज़रायल को सैन्य साजो-सामान देने वाले देशों से अपील की:
“हम उन सभी देशों से अपील कर रहे हैं जो इज़रायल को हथियार देते हैं। भारत भी इज़रायल को छोटे हथियार (Small Arms) निर्यात करता है। ऐसे देशों को हथियारों की आपूर्ति तुरंत रोकनी चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हथियार देने वाले देश पर भी युद्ध अपराधों में सहायता/मदद करने (Aiding and Abetting War Crimes) का आरोप लग सकता है।”
⚖️ कुलभूषण जाधव केस का उदाहरण और भारत के लिए नसीहत
जस्टिस एस. मुरलीधर ने भारत सरकार को अपनी विदेश नीति और मानवाधिकारों के प्रति दृष्टिकोण पर दोबारा विचार करने की सख्त सलाह दी। उन्होंने भारत के ही एक पुराने मामले का उदाहरण देते हुए कूटनीतिक दोहरे मापदंडों पर प्रहार किया:
“जब भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें वहां निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल रही थी, तब भारत खुद अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) गया था। इसका मतलब यह है कि जब हमारे अपने राष्ट्रीय हितों की बात होती है, तब हम अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थाओं का सहारा सहर्ष लेते हैं। लेकिन जब बात दूसरे देशों में मानवाधिकारों के हनन की आती है, तो कई नेता इसे ‘विदेशी कानून या आंतरिक मामला’ कहकर नजरअंदाज करने लगते हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हम बुनियादी मानवीय सिद्धांतों को ऐसे ही कुचले जाने देंगे? अगर इतने पुख्ता और गंभीर सबूतों के बावजूद भारत वैश्विक मंच पर मूकदर्शक बना रहता है, तो भविष्य में जब हमारे ऊपर कोई संकट आएगा, तो खुद को सही साबित करना और दुनिया से मदद मांगना हमारे लिए मुश्किल हो जाएगा।
📋 रिपोर्ट की प्रमुख मांगें
संयुक्त राष्ट्र की इस स्वतंत्र जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में निम्नलिखित कदम उठाने की पुरजोर वकालत की है:
- निर्दोष नागरिकों और बच्चों पर हो रहे हवाई व जमीनी हमले तुरंत रोके जाएं।
- गज़ा में मानवीय सहायता, भोजन और चिकित्सा राहत सामग्री बिना किसी रुकावट के पहुंचाई जाए।
- युद्ध से प्रभावित पीड़ितों और अनाथ बच्चों को उचित मुआवजा दिया जाए।
- इस भयावह तबाही और बच्चों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार सैन्य व राजनैतिक कमांडरों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।










