‘दालमंडी चौड़ीकरण पर “हाई कोर्ट” का ब्रेक? लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद को बचाने कोर्ट पहुंची कमेटी; प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट के तहत याचिका संख्या 24156/2026 दाखिल, तत्काल सुनवाई की मांग!’
दालमंडी चौड़ीकरण बिग ब्रेकिंग: वाराणसी के दालमंडी रोड चौड़ीकरण की जद में आई ऐतिहासिक लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद। मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना बातिन नोमानी की अगुवाई में मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका 24156/2026 की दाखिल। 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट' के तहत तत्काल सुनवाई की मांग। यूपी सरकार, वक्फ बोर्ड और वाराणसी डीएम-कमिश्नर बनाए गए पार्टी। पढ़ें PNN24 की एक्सक्लूसिव विधिक रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के घने और ऐतिहासिक व्यापारिक क्षेत्र दालमंडी के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर एक बहुत बड़ी विधिक खबर सामने आ रही है। चौड़ीकरण की जद (अधिग्रहण सीमा) में आ रही प्रसिद्ध और प्राचीन मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ को लेकर मस्जिद इंतेजामिया कमेटी ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) की शरण ली है। कमेटी ने इस सरकारी योजना को धार्मिक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक स्वरूप के खिलाफ बताते हुए सीधे अदालत में रिट याचिका दाखिल कर दी है।
📅 दोपहर २:३० बजे दाखिल हुई याचिका; जानिए पूरा लीगल ब्योरा
इलाहाबाद हाई कोर्ट में मौजूद PNN24 News के अत्यंत विश्वसनीय विधिक सूत्रों के अनुसार, यह याचिका 16 जून 2026 की दोपहर लगभग 2:30 बजे हाई कोर्ट के रजिस्ट्री पटल पर आधिकारिक रूप से दर्ज करा दी गई है:
- याचिका संख्या (Petition Number): इस महत्वपूर्ण विधिक वाद को याचिका संख्या 24156/2026 के रूप में सूचीबद्ध (Index) किया गया है।
- मुफ्ती-ए-बनारस की अगुवाई: मस्जिद कमेटी की जानिब (ओर) से यह विधिक मोर्चा खुद मुफ़्ती-ए-बनारस मौलाना बातिन नोमानी ने संभाला है। उनके दिशा-निर्देशन में वकीलों के पैनल ने इस याचिका का मसौदा तैयार किया है।
🏛️ प्लेसेस ऑफ़ वर्शिप एक्ट (1991) बना मुख्य आधार
याचिका में मस्जिद इंतेजामिया कमेटी ने केंद्र सरकार के ऐतिहासिक कानून ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 1991’ का कड़ाई से हवाला दिया है। दलील दी गई है कि इस कानून के तहत किसी भी धार्मिक स्थल के 15 अगस्त 1947 के समय के स्वरूप और स्थिति के साथ किसी भी प्रशासनिक या विधिक योजना के तहत छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। चौड़ीकरण के नाम पर मस्जिद के किसी भी हिस्से को क्षति पहुंचाना इस विधिक अधिनियम का सीधा उल्लंघन होगा।
📌 इन बड़े प्रशासनिक महकमों को बनाया गया ‘पार्टी’ (Respondents)
मामले की गंभीरता और चौड़ीकरण के प्रशासनिक आदेशों को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश शासन और जिला प्रशासन की पूरी मशीनरी को इस केस में प्रतिवादी (पार्टी) बनाया है:
- उत्तर प्रदेश सरकार (शासन स्तर)
- जिला अधिकारी (DM), वाराणसी
- आयुक्त (कमिश्नर), वाराणसी मंडल
- उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड
- स्थानीय वक्फ प्रबंधन और संबंधित विभाग
⚡ ‘तत्काल सुनवाई’ की पुरज़ोर मांग
सूत्रों के मुताबिक, दालमंडी क्षेत्र में चल रही प्रशासनिक हलचल और पैमाइश की गति को देखते हुए मस्जिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने माननीय मुख्य न्यायाधीश की पीठ से इस बेहद संवेदनशील मामले में ‘अर्जेंट लिस्टिंग’ (तत्काल सुनवाई) की गुहार लगाई है। आशंका जताई जा रही है कि यदि अदालत ने इस पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो विकास कार्य के नाम पर ऐतिहासिक ढांचे को विधिक क्षति पहुंच सकती है। उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इस याचिका पर हाई कोर्ट की खंडपीठ में पहली सुनवाई हो सकती है।
दालमंडी के व्यापारी और स्थानीय अवाम इस विधिक कदम के बाद पूरी तरह से अदालत के रुख पर नजरें टिकाए हुए हैं। PNN24 News की विधिक टीम इस याचिका और हाई कोर्ट के आने वाले हर आदेश की पल-पल की लाइव अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।












