‘वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण पर घमासान: अंजुमन के एस.एम. यासीन का बड़ा बयान— “आज लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद, कल ज्ञानवापी होगी”; प्रशासन पर लगाया सारी हदें पार करने का आरोप!’
वाराणसी: दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन का बड़ा बयान। कहा— 'आज लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद, कल ज्ञानवापी मस्जिद होगी'। वक़्फ एक्ट 2025 का हवाला देते हुए पीडब्लूडी के पत्र और प्रशासन के रवैए पर उठाए गंभीर कानूनी सवाल। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
वाराणसी (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दालमंडी इलाके के चौड़ीकरण (Widening) को लेकर चल रही प्रशासनिक कवायद के बीच एक नया और बड़ा सियासी व धार्मिक मोड़ आ गया है। इस चौड़ीकरण प्रोजेक्ट की जद में आने वाली 6 मस्जिदों को लेकर शहर में उहापोह और तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी दरमियान ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली प्रतिष्ठित संस्था ‘अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी’ के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने एक बेहद भावुक और तीखा बयान जारी किया है। यासीन ने जिला प्रशासन पर नाजायज दबाव और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि “आज लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद है, तो कल ज्ञानवापी मस्जिद होगी।”
🧓 “80 साल की उम्र में पहली बार देखा ऐसा दबाव, गैंगस्टर्स में भी होती थी नैतिकता”
एस.एम. यासीन ने अपनी विज्ञप्ति के माध्यम से खुद पर और संस्था पर पड़ रहे प्रशासनिक दबाव का जिक्र बेहद कड़े शब्दों में किया है। उन्होंने अपनी बेबसी और आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा:
“होकर मजबूर बहुत दिनों तक आज मजबूरन हमने चन्द लाइनें लिखने का फैसला किया है। हो सकता है यह आखिरी भी हो। क्योंकि अस्सी वर्ष की उम्र में और पिछले पचास सालों के सार्वजनिक जीवन में मैंने इतना दबाव कभी नहीं देखा। पूर्वांचल में हमने क्या, बल्कि आप सबने गैंगवार का दौर देखा होगा। लेकिन एक बात ग़ौरतलब है कि उन गैंगस्टर्स में भी इतनी नैतिकता (Ethics) होती थी कि वे कभी एक-दूसरे के परिवार के सदस्यों को नुक़सान नहीं पहुंचाते थे और अभी भी वे इस मर्यादा पर क़ायम हैं। लेकिन जब से दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट आरंभ हुआ है, अरबाबे हुकूमत (शासन-प्रशासन) ने उत्पीड़न की सारी हदें पार कर दी हैं।”
🕌 “इस्लाम में मस्जिदें बिकाऊ नहीं होतीं”— PWD के पत्र पर उठाया सवाल
संयुक्त सचिव ने चौड़ीकरण की जद में आ रही वक़्फ संपत्तियों और मस्जिदों की कानूनी और धार्मिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रशासन को घेरा:
- मस्जिदों को खरीदने की इच्छा: यासीन ने खुलासा किया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ बोर्ड को दिनांक 17 अप्रैल 2026 को एक पत्र लिखा था, जिसमें इन मस्जिदों को क्रय (खरीदने) करने की इच्छा जाहिर की गई थी।
- धार्मिक नियम का हवाला: इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यासीन ने कहा कि शायद इन अधिकारियों को यह बुनियादी बात नहीं मालूम कि इस्लाम में मस्जिदें बिकाऊ नहीं होती हैं और न ही उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट (विस्थापित) किया जा सकता है। ‘वक़्फ एक्ट 2025’ के अनुसार, यदि कोई मुतवल्ली या व्यक्ति ऐसा कोई कदम उठाता है, तो वह कानूनन पूरी तरह अवैध और शून्य (Void) माना जाएगा।
📜 वक़्फ एक्ट 2025 की धारा 51 और 91 का दिया हवाला; कहा— “सब कानून विरुद्ध”
एस.एम. यासीन ने अपनी विज्ञप्ति में पीडब्लूडी के पत्र पर सुन्नी सेंट्रल वक़्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) द्वारा दिए गए जवाब का भी विवरण साझा किया:
- वक़्फ बोर्ड का जवाब: सीईओ वक़्फ बोर्ड ने 23 अप्रैल 2026 को पीडब्लूडी को जवाब देते हुए स्पष्ट किया था कि वक़्फ एक्ट 2025 ने इस प्रकार की अनुमति का अधिकार केवल वक़्फ बोर्ड को दिया है, और चूंकि वर्तमान में वक़्फ बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता। बोर्ड ने प्रशासन को एक्ट की धारा 51 तथा 91 को ध्यान में रखकर ही कार्य करने की सलाह दी थी।
- धारा 51 का नियम: इस धारा के तहत वक़्फ संपत्ति की बिक्री, गिफ्ट या रेहन (गिरवी) रखना बिना बोर्ड की अनुमति के कानूनी रूप से पूरी तरह शून्य है। यासीन का आरोप है कि आज तक जो भी कदम उठाए गए हैं, वे इस्लाम और देश के कानून दोनों की नजरों में मुजरिम सद्रश हैं।
- धारा 91 और भूमि अधिग्रहण कानून 2013: इसके तहत किसी भी वक़्फ संपत्ति के अधिग्रहण के लिए कलेक्टर को पहले वक़्फ बोर्ड को कानूनी नोटिस देना होता है, और आवश्यक कानूनी खानापूर्ति के बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया बढ़ सकती है। लेकिन प्रशासन नैतिक-अनैतिक और वैध-अवैध का विचार किए बिना केवल काम खत्म करने की जल्दबाजी में है।
🕊️ शांत शहर को अशांत होने से बचाने की अपील; ज्ञानवापी को लेकर जताया डर
अंजुमन के संयुक्त सचिव ने आशंका जताते हुए कहा कि शासन-प्रशासन की इस अत्यधिक जल्दबाजी से उन्हें डर है कि कहीं काशी का यह शांत शहर अशांत न हो जाए और कई जोशीले युवा इसकी भेंट न चढ़ जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंजुमन मसाजिद इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति देने से लगातार इसीलिए इनकार कर रही है, क्योंकि जो हथकंडे आज लंगड़े हाफ़िज़ मस्जिद पर अपनाए जा रहे हैं, कल वही छल-बल ज्ञानवापी मस्जिद के लिए भी आजमाया जाएगा।
अंत में उन्होंने काशी के आवाम से अपील की कि वे सुनी-सुनाई बातों और सोशल मीडिया की अफवाहों पर यकीन न करके हकीकत जानने की कोशिश करें। साथ ही, अरबाबे हुकूमत (सरकार) से गुजारिश की कि इस संवेदनशील धार्मिक और सामाजिक मामले में जल्दबाजी दिखाने के बजाय केवल कानूनी और शांतिपूर्ण रास्ता ही अपनाया जाए।












