‘लोहता में बड़ा सियासी व कानूनी उबाल: तालिब मौत मामले में मां ने लगाया “कथित आत्महत्या” नहीं, “निर्मम हत्या” का आरोप; डॉ. केके जैन जैसी लापरवाही के शक में घिरी पुलिस और पीएम रिपोर्ट!’
वाराणसी: लोहता के कोटवा खरका में युवक तालिब की संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़। मां शाहजहाँ ने पत्नी और ससुराल वालों पर लगाया निर्मम हत्या का आरोप, पुलिस कमिश्नर से की शिकायत। शव के पास खून और प्राइवेट पार्ट पर चोट के बावजूद पंचनामे में ज़िक्र न होने पर उठे सवाल। हाल ही के चर्चित डॉ. केके जैन केस से की जा रही है तुलना। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी रिपोर्ट।

मो0 सलीम
वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र अंतर्गत कोटवा के खरका ग्राम में गत 21 मई 2026 को हुई युवक तालिब की संदिग्ध मौत का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और खौफनाक मोड़ पर पहुंच गया है। जिसे पुलिस और ससुराल पक्ष शुरुआत में ‘कथित आत्महत्या’ मानकर फाइल बंद करने की तैयारी में थे, उसे मृतक की मां ने एक सोची-समझी क्रूर हत्या करार दिया है। मृतक की मां ने इस संबंध में सीधे पुलिस कमिश्नर को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं, स्थानीय चर्चाओं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने वाराणसी पुलिस और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की कार्यशैली को गंभीर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
🤝 ससुराल में रहता था मृतक; संदिग्ध परिस्थितियों में मिली लाश
मृतक तालिब की मां शाहजहाँ द्वारा पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार:
- ससुराल में था डेरा: तालिब का विवाह छितौनी की रहने वाली शमा के साथ हुआ था। विवाह के बाद से ही तालिब अपने ससुराल में रह रहा था।
- आत्महत्या की मिली सूचना: 21 मई 2026 को प्रार्थिनी (मां) को सूचना दी गई कि उसके बेटे तालिब ने आत्महत्या कर ली है।
- पुलिस ने जल्दबाजी में की कार्रवाई: परिजनों का आरोप है कि लोहता पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ससुराल पक्ष के बयानों को ही अंतिम हकीकत मान लिया। पुलिस ने त्वरित रूप से शव का पंचनामा (Inquest) तैयार किया और उसी के आधार पर पोस्टमार्टम भी करा दिया गया।
📸 वायरल वीडियो और तस्वीरों ने खोली पोल; प्राइवेट पार्ट पर घाव का दावा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब घटना स्थल और मृतक के शरीर की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इन साक्ष्यों ने पुलिस के दावों पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं:
- जमीन पर बिखरा खून: वायरल तस्वीरों के मुताबिक, घटना स्थल पर शव के पांव के पास भारी मात्रा में खून पड़ा हुआ था, जो सामान्य तौर पर फंदे से लटककर आत्महत्या करने के मामलों में दुर्लभ माना जाता है।
- प्राइवेट पार्ट पर गहरे घाव: मां और परिजनों का गंभीर आरोप है कि तालिब के प्राइवेट पार्ट (गुप्तांग) पर गहरे और बेरहमी से किए गए घाव के निशान थे।
- पंचनामे से गायब मिले सबूत: परिजनों का सबसे संगीन आरोप यह है कि मृतक के चचा (चाचा) द्वारा पुलिस की वीडियोग्राफी के सामने मृतक के शरीर पर लगी एक-एक चोट को स्पष्ट रूप से दिखाया और दर्ज कराया गया था। इसके बावजूद, पुलिस ने अपनी आधिकारिक पंचनामा रिपोर्ट में उन चोटों और गुप्तांग के घाव का कोई जिक्र नहीं किया।
🏥 क्या फिर दोहराया गया ‘डॉ. केके जैन’ जैसा कांड? पीएमओ तक पहुंची गूंज
लोहता पुलिस द्वारा चोटों को छिपाने और पोस्टमार्टम में इसका स्पष्ट जिक्र न होने के कारण अब इस मामले की गूंज देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है। मृतक के चाचा ने इस संदिग्ध आचरण को लेकर पीएमओ में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार अब इस मामले की तुलना वाराणसी अदालत द्वारा हाल ही में सुनाए गए ऐतिहासिक ‘डॉ. केके जैन फैसले’ से कर रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही वाराणसी की अदालत ने 29 साल पुराने कस्टोडियल डेथ मामले में मंडलीय अस्पताल के तत्कालीन डॉ. केके जैन को पुलिस से सांठगांठ कर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने और चोटों को छिपाने के जुर्म में 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। तालिब के परिजनों को भी यही शंका है कि इस मामले में भी रसूखदार ससुरालियों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम और पंचनामे में वैसी ही बड़ी और आपराधिक लापरवाही या हेरफेर की गई है।
इस पूरे मामले में मृतक की मां शाहजहाँ की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। यदि वीडियोग्राफी के साक्ष्यों और पंचनामे की लिखापढ़ी में विसंगतियां पाई जाती हैं, तो यह वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की साख पर एक बड़ा बट्टा होगा। फिलहाल, पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मामले की जांच की बात कही जा रही है।











