‘वाराणसी साड़ी व्यापार घोटाला: 36.50 लाख की ठगी के आरोपी की पुलिस रिमांड अर्जी कोर्ट ने की खारिज; केस डायरी अधूरी होने पर जैतपुरा पुलिस बैरंग लौटी’
वाराणसी ब्रेकिंग: साड़ी व्यापार के नाम पर 36.50 लाख की ठगी मामले में जैतपुरा पुलिस को कोर्ट से झटका, रिमांड अर्जी खारिज। सरैया के व्यापारी मोहम्मद याकूत से विदेश में माल सप्लाई के नाम पर हुई थी धोखाधड़ी। फर्जी चेक और रेप केस में फंसाने की धमकी का आरोप। एसीजेएम कोर्ट ने केस डायरी में कमी देख पलटा फैसला। पढ़ें PNN24 की पूरी कानूनी रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
वाराणसी (PNN24 News): जनपद के थाना जैतपुरा क्षेत्र से जुड़े साड़ी व्यापार के एक बेहद चर्चित और बड़े धोखाधड़ी मामले में स्थानीय पुलिस को अदालत में उस वक्त भारी मायूसी का सामना करना पड़ा, जब कोर्ट ने आरोपी की पुलिस रिमांड की मांग वाली अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पुलिसिया कार्रवाई में जल्दबाजी और केस डायरी में अपूर्ण साक्ष्यों को आधार बनाते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है। इस आदेश के बाद जैतपुरा पुलिस को कोर्ट परिसर से खाली हाथ (बैरंग) वापस लौटना पड़ा।
🧵 विदेश में साड़ी सप्लाई का झांसा देकर 36.50 लाख की चपत
यह पूरा मामला जैतपुरा थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या (मुअसं) 78/2026 से संबंधित है।
- पीड़ित का आरोप: लाट भैरव (सरैया), वाराणसी निवासी पीड़ित साड़ी व्यवसायी मोहम्मद याकूत ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि आठ लोगों के एक संगठित समूह ने उनके साथ सुनियोजित तरीके से विश्वासघात किया।
- धोखाधड़ी का तरीका: आरोपियों ने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा कपड़ा कारोबारी बताया और झांसा दिया कि वे विदेशों में बनारसी साड़ियों की बड़ी खेप सप्लाई करते हैं। उनके झांसे में आकर पीड़ित ने 11 मई 2025 से 5 सितंबर 2025 के बीच कुल 36,50,000 रुपये (36.50 लाख) का साड़ियां और अन्य माल उधार दे दिया।
- फर्जी खाते और फर्जी दस्तखत: माल उठाने के बाद आरोपियों ने भुगतान के तौर पर जो चेक दिए, वे बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए। जांच करने पर पता चला कि न केवल चेकों पर किए गए हस्ताक्षर जाली थे, बल्कि जिन बैंकों के चेक दिए गए थे, उनमें आरोपियों के खाते महीनों पहले ही बंद या निष्क्रिय हो चुके थे।
🤫 दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने और अपहरण की धमकी
व्यापारी मोहम्मद याकूत का आरोप है कि जब उन्होंने अपने व्यापारिक भुगतान के लिए आरोपियों पर दबाव बनाया, तो आरोपियों ने अपराधीकरण का रास्ता चुन लिया। 16 अक्टूबर 2025 की रात को आरोपियों ने फोन पर पीड़ित को भद्दी-भद्दी गालियां दीं और उनका अपहरण करने व जान से मारने की सीधी धमकी दी।
इतना ही नहीं, मामले में नामजद महिला आरोपी रेशमा परवीन ने पीड़ित व्यापारी को डराने-धमकाने के लिए उन पर दुष्कर्म (Rape) जैसा संगीन और झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी भी दी, ताकि पीड़ित डरकर अपने पैसे मांगना छोड़ दे। मामले में शाहिद अख्तर, जाहिद अख्तर, खालिद अख्तर, मिलाद अख्तर, नसीम अख्तर, एखलाक हाजी और अशफाक सहित कुल 8 लोग नामजद हैं।
⚖️ कोर्ट का सख्त रुख: “अधूरे साक्ष्यों के साथ रिमांड नहीं”
इस मामले की अहम सुनवाई वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (अष्ठम) सौरभ द्विवेदी की अदालत में हुई। विवेचना को आगे बढ़ाने और कड़ियों को जोड़ने के लिए जैतपुरा पुलिस ने आरोपी की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) मांगी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने जब केस डायरी और पुलिस द्वारा जुटाए गए अब तक के सबूतों का अवलोकन किया, तो उसमें कई तकनीकी कमियां और अपूर्ण साक्ष्य पाए गए। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पुलिस की जल्दबाजी को अनुचित माना और रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया।
📝 अब कतरन और पर्चियों की हो रही है वैज्ञानिक जांच
कोर्ट से झटका लगने के बाद जैतपुरा पुलिस अब बैकफुट पर है और कानूनी कमियों को दूर करने में जुट गई है। मामले की कमान अब उपनिरीक्षक (SI) सत्य देव को सौंपी गई है। पुलिस की टीमें अब पीड़ित व्यापारी द्वारा मुहैया कराए गए व्यापारिक बिलों, माल की पर्चियों, बैंक के बाउंस मेमो और धमकी भरे फोन कॉल के ऑडियो/वीडियो साक्ष्यों का वैज्ञानिक और विधिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि अदालत के समक्ष मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।











