‘बंगाल में ऐतिहासिक नीतिगत उलटफेर: शुभेंदु सरकार ने विधानसभा से पास कराए OBC आरक्षण संशोधन बिल; 17% से घटकर 7% हुआ कोटा, 113 मुस्लिम उप-जातियां बाहर; मदरसों में “वंदे मातरम्” अनिवार्य’

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 17% से घटाकर 7% करने के दो बड़े संशोधन बिल पास कर दिए हैं, जिससे 113 मुस्लिम उप-जातियां सूची से बाहर हो गई हैं। साथ ही मदरसों का बजट आधा कर 'वंदे मातरम्' अनिवार्य किया गया है। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

मो0 सलीम

कोलकाता (PNN24 News): पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार, 29 जून 2026 को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण सूची में भारी कटौती करने वाले दो महत्वपूर्ण विधेयकों को विधानसभा में ध्वनि मत से पास करा लिया है।

सदन से पास हुए इन दोनों विधेयकों के नाम हैं— ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) सरकारी नौकरियों और पदों में आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026’ इन बिलों के पारित होने के साथ ही राज्य में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार और वाम मोर्चा सरकार के समय बढ़ाए गए आरक्षण के ढांचे को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

⚖️ हाईकोर्ट के आदेश और ‘मूल सूची’ की बहाली का तर्क

विधेयक पेश करते हुए राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरी शंकर घोष ने साफ किया कि यह फैसला किसी राजनैतिक द्वेष के कारण नहीं, बल्कि मई 2024 में आए कलकत्ता हाईकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के तहत लिया गया है।

  • 7% आरक्षण और 66 जातियां: नई व्यवस्था के तहत राज्य में अब कुल ओबीसी आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर पुनः 7 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • 113 जातियां सूची से बाहर: वर्ष 2010 के बाद वामपंथियों और ममता सरकार द्वारा जल्दबाजी में जोड़ी गईं 113 नई जातियों को सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिनमें मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय की कई उप-जातियां शामिल थीं। अब केवल साल 2010 से पहले की मूल सूची में शामिल 66 जातियां ही आरक्षण के दायरे में बनी रहेंगी।

सदन में बोलते हुए मंत्री गौरी शंकर घोष ने पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रहार किया:

“पिछली सरकारों ने बिना किसी वैज्ञानिक और जमीनी सर्वेक्षण (Field Survey) के, केवल अपने वोट बैंक और एक खास समुदाय के तुष्टीकरण के लिए आयोग को दरकिनार कर इन जातियों को जोड़ा था, जिसे हाईकोर्ट ने अवैध माना था। अब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पूरी तरह स्वतंत्र होकर वैज्ञानिक जांच करेगा और यदि कोई वास्तविक पिछड़ा वर्ग छूट गया है, तो उसकी सिफारिश सरकार से करेगा।”

📉 मदरसा शिक्षा बजट आधा; तुष्टीकरण पर कड़ा प्रहार

आरक्षण में कटौती के अलावा, शुभेंदु सरकार ने राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं में भी बड़ा फेरबदल किया है। वित्त मंत्री स्वप्नदास गुप्ता द्वारा पेश किए गए राज्य के पहले बजट में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के बजट को आधी से भी कम कर दिया गया है।

  • बजट में कटौती: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान टीएमसी शासन में अल्पसंख्यक मामलों के लिए 5,713 करोड़ रुपये आवंटित थे, जिसे भाजपा सरकार ने घटाकर 2,165 करोड़ रुपये कर दिया है।

🎶 मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना हुआ अनिवार्य

प्रशासनिक सुधारों की इसी कड़ी में सरकार ने राज्य के सभी सरकारी, मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों (MSK, SSK और इंग्लिश मीडियम मॉडल मदरसों सहित) में क्लास शुरू होने से पहले होने वाली सुबह की असेंबली (प्रार्थना सभा) में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है।

मदरासा शिक्षा निदेशालय द्वारा 19 मई को जारी इस आदेश के तहत, ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान (जन गण मन) के समान ही विधिक सुरक्षा दी जा रही है। इसके क्रियान्वयन के दौरान किसी भी तरह की बाधा या इसका अपमान करना एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) माना जाएगा, जिसमें कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान शामिल है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने मदरसों के पाठ्यक्रमों और गतिविधियों की जांच के लिए 5 जुलाई तक एक राज्यव्यापी सर्वेक्षण (Survey) भी शुरू कर दिया है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *